राष्ट्रीय भावनाओं से ओतप्रोत है फिल्म टु लिटिल इंडियन्स: रवि भाटिया

प्रेमबाबू शर्मा 

राजकपूर से प्रभावित होकर बालीवुड में दस्तक देने वाले का युवा प्रतिभा सम्पन्न फिल्मकार रवि भाटिया इन दिनों चर्चाओं में एक बार फिर से है, अपनी नयी बाल फिल्म ‘टु लिटिल इंडियन्स’ को लेकर। वे अपनी इस पहली फिल्म को बडे ही योजनाबद्व तरीके से पूरे विश्व में रीलिज करने की तैयारी में है। हालातों और जीवन में अकस्मित घटनाओं के कारण सख्त हुए आर्मी कर्नल और दो शरारती बच्चों के बीच अनुशासन, जीने की एक अनुठी शैली और चल रहे अंर्तदंद्व देश के प्रति समर्पित भाव के साथ जबावदेही की पृष्ठभूमि पर आधारित है यह फिल्म । हाल में ही निर्माता निर्देशक रवि भाटिया से बातचीत हुई पेश है चुनिदा अंश:

आपकी फिल्म टु लिटिल इंडियन्स किस प्रकार से अन्य चाईल्स फिल्मों की तुलना में लीक से हटकर है?

जब मैंने ‘टु लिटिल इंडियन्स’ की तैयारी की थी तब मेरे दिमाग में फिल्म जागते रहे और बूट पालिस जैसी यादगार फिल्मों के कैनवस रहे । सबजेक्ट टकृटमेंट और आम दर्शको से जुडाव बने रहे है यह मेरा प्रयास था । टु लिटिल इंडियन्स में कोई मार्केवल स्टार वैल्यूज तो नही है, मगर इसमे जिन तथ्यों पर पूरी फिल्म अपनी चरम सीमा पर पहुंचती है, यही उसका यूएसपी है।

किंग अंकल,तारे जमीं पर,भूत अंकल सतरंगी छाता,भूत और स्टेली का डिब्बा, आदि फिल्मों में मार्किट वैल्यू वाले कलाकारो का अहम् रोल रहा है टु लिटिल इंडियन्स में दर्शको का जुडाव बना रहे इसके लिए आपके पास में क्या जादुई करिश्मा है ?
मैं प्रयोगधर्मी फिल्माकार हू पिछले 20 साल से फिल्म मीडिया को अपने साथ में साये की तरह से जोड रखा है और राज साहब ही रोल माडल रहे है उनकी फिल्मों की मेकिंग मे मेरी डारेक्टर वाली पर्सनलिटी को ना केवल पुख्ता जमीन दी है बल्कि, कहानी को फिल्म के रूप में पेश करने का हुनर भी सिखाया । मेरी इस फिल्म में वाजिव पात्रों का चरित्र और दिल पर गहरी छाप छोडे जाने वाले प्रसंगों का समावेश है। मेरी मार्केटिग स्टेजी भी उसी प्रकार की है।

बतौर निर्देशक के रूप में आपने अपनी पहली फिल्म कम्पलीट की है, क्या आपने निर्देशन की विधिवत् ट्रेनिंग भी ली, या फिर सेल्फ लांचिग प्रोसेस में यूं ही फिल्म बना डाली ?
नही बाबा नही, मैं थिंक स्टेडी और वर्किग वाले स्कूल से जुडा रहा हूँ । बिना अनुभव के खाली स्लेट पर इवादत लिखने में मेरा विश्वास कभी नही रहा, राजकपूर की फिल्में देख देख कर बडा हुआ मगर फिल्म मैंकिग के गुर फिल्म गदर वाले अनिल शर्मा की छत्रछाया में सीखे । उसके बाद में स्वतंत्र रूप से टेली फिल्में कब होगी सुबह हमारी, और नन्हे कदम दूरदर्शन के लिए डारेक्ट की। रियल्टी म्युजिकल शो सुरों का कांरवा,उस समय बनाया जिस दौर में इस तरह के शो का प्रचलन ही नही था। अब हिन्दी फिल्म भी बना रहा हूँ पूरी शिदद के साथ।

ऐसी कोई यादगार फिल्म जो आपके दिल पर घर कर गयी हो ?
मैं अब तक जागते रहे फिल्म को नही भुला पाया, और मेरा नाम जोकर का मनोविज्ञानिक दर्शन
और मौलिक मंत्र क्या कोई दुसरा फिल्म मैकर ओडियंस में पेश कर पाया । मेरा मानना है कि राजकपूर बालीवुड की रामायण कुरान बाईबल है जिन्हे पढकर गुनकर कई फिल्म मेकर बन सकते है।

आप बार बार कह रहे है कि टु लिटिल इंडियन्स आम फिल्मो की लीक से हटकर है आखिर इस फिल्म में ऐसा क्या है ?

मेरी फिल्म टु लिटिल इंडियन्स मर्मिक राष्टकृय भावनाओं से ओतप्रोत संदेश वाहक फिल्म है। रोहित और रौनक दो शरारती बच्चे अपने पडोसी कर्नल अंकल के साथ में उजफिजूल हरकतें किया करते है ,हर छोटी बात पर उनकी टशन चला करती है अंकल अनुशासन प्रिय शक्स है कोई उनके डिसीपिलिन को तोडे, वे बदर्शत नही कर पाते है उनके डिसीपिलिन को तोडने वाले दो बच्चें ही क्यों ना हो। वक्त बीतता जाता है कर्नल और रौनक रोहित एक दुसरे को अच्छी तरह से समझ लेते है उनमें सैंसटिव टयुनिंग बन जाती है यह टयुनिंग उन बच्चों में ना केवल राष्ट्रीय भावना जगाती है बल्कि उनसे ऐसे करतब करा लेती है जिसकी वजह से पूरा देश उनको टु लिटिल इंडियन्स कहने में गौरान्वित महसूस करता है

टु लिटिल इंडियन्स की कास्ट और क्रेडिट के बारे में खुलासा कीजियें?
मेरी फिल्म में कलाकर नही चरित्र पेंट है। रौनक भाटिया व अंश सिन्हा प्रमुख कलाकारों मं है कमल चोपडा, शुभांगी पुरी, मुश्ताक खान, देवेन्द्र मदान और कृषदेवू और एक संक्षिप्त भूमिका मैंने भी की है।

टु लिटिल इंडियन्स के बाद में आपकी भावी योजनाऐं क्या है?
इस फिल्म के अलावा मेरी अगली फिल्म सत्यांश पूरी तैयारी में स्क्रिप्ट पर काफी दिनों से काम कर रहा हूँ

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