एक अलग प्रकार का किरदार है पद्मनी: सोनिया रक्कड़

प्रेमबाबू शर्मा 

जी टीवी कामेडी शो, मनिबेन डाट काम और दर्द का रिश्ता सहित अनेकों धारावाहिकों में अपने अभिनय के रंग बिखरने वाली सोनिया रक्कड इन दिनों चैनल सहारावन शो कहानी चंद्रकांता की में नजर आ रही है। शो में वे पदमिनी नामक किरदार को जीवंत कर रही है। उपन्यासकार बाबू देवकी नंदन खत्री द्वारा रचित व तिलिस्मी दुनियां कारनामों को रेखांकित करती कृति पर बने ‘चंद्रकांता संतति’ के निर्देशक सुनील अग्निहोत्री है। फैटेंसी ड्रामा ‘कहानी चंद्रकांता की’ में वैसे तो चंद्रकांता मुख्य चरित्र है लेकिन पद्मिनी का पात्र भी किसी से कम नही है। सहारावन के शो कहानी चंद्रकांता की’ जैसे बडे बिग शो के बीच में पदमिनी की भूमिका मिलना ही सोनिया के लिए एक सपना सच होने जैसा है, जो वो कभी बचपन में देखा करती थी। अब जबकि वो पदमिनी के किरदार में रम गई है तो उनकी अब तक की परफोरमेंस और धारावाहिक को लेकर प्रेमबाबू शर्मा बातचीत हुई। सोनिया ने बड़े आत्मविश्वास के साथ सवालों के जवाब दिये। 
  
पदमिनी के चरित्र की क्या विशेषता है?
इस चरित्र की अपनी एक अलग विषेषता है। पद्मनी एक योद्वा है जिसमें जो वफादारी व बहादुर कूट कूट कर भरी है। मुझे यह कहने में जरा भी संकोच नही है। कि आज के समय में जहां दर्शकों के पास मंनोरजन के कई साधन है वो इस काॅस्टयूम ड्रामा में मेरे किरदार कि भी खूब प्रंशसा करते है। ऐसा मुझे फीड बैक मिला है यह मेरे लिए बडे़ गर्व की बात है। अभी तक मै तकरीबन 70 एपीसोड में दर्शकों के सामने आ चुकी हूँ । मेरी यह भूमिका लंबी चलने वाली है और मेरा यह मानना है कि आने वाले ऐपीसोड में दर्शक एक अलग अदाकारा को देख पायेगें।

क्या पदमिनी का चरित्र आपके कैरियर का सषक्त रोल है?
मेरे लिए एक्टिंग  का मतलब सिर्फ एक्टिंग  है। हालांकि मैने कई तरह की भूमिकाएं की है लेकिन मेरा यह मानना है कि पदमिनी की भूमिका मेरे लिए उल्लेखनीय है।

सहारावन के अलावा आप आपने किन किन धारावाहिकों में काम किया है ?
अपने अभिनय सफर में अब तक जी टीवी का एक कामेडी शो, मनिबेन डाट काम और दर्द का रिश्ता जैसे शो किये।

आपका होम टाउन कौन कहां है और अपनी अभिनय यात्रा के बारे में बताएं ?
मेरा होम टाउन रोपड पंजाब है और मैंने पंजाब यूनिवर्सिटी चण्डीगढ़ से क्रिमिनल ग्रेजएट की है लेकिन वकालत की अपेक्षा मेरा रूझान अभिनय में था । अपने इसी शौक को पूरा करने मुंमई मायानगरी की ओर कूंच किया । मुंमई नगरी में मेरे भाग्य ने भी साथ दिया और मायानगरी में कम सघर्श के बाद ही काम मिलना शुरू हो गया।

आपके परिवार और मित्रों की कैसी प्रतिक्रिया रही है आपकी परफारमेंस को लेकर?
परिवार और मित्रों की सदैव मुझे प्रंशसा और प्रतिक्रियायें मिलती रहती है। एक कलाकार के लिए सबसे अहम बात होती है दर्षकों की प्रतिक्रियायें।
एक्टिंग को लेकर कभी परिवार में विरोध हुआ?
मै एक शिक्षित परिवार से  हूँ । मेरे पिता एयरफोर्स से रिटार्यड आफिसर है। जब मैने एक्टिंग  की बात की तो एक बार मेरे परिवार को लगा कि उनकी बेटी वकालत करते करते एक्टिंग  में क्या करेगी, क्योंकि मुंबई में एक न्यू कमर को संघर्ष करना पडता है। खैर मुझे मुंबई में जाने की इजाजत मिल गई और मै आज मायानगरी में खुद को पाकर बहुत खुश हूँ । मुझे ज्यादा संघर्ष नही करना पड़ा।

चन्द्रकांता कास्टूम ड्रामा है इसके अनेक सीन्स तो आपके चुनौतीपूर्ण रहे होगें ?
इसमें दो राय नही की चन्द्रकांता कास्टूम ड्रामा है और सेट पर हर बार हमें अनेकों बार सीन देने के लिए कुछ अलग करना पडता है। कई बार कहानी और पटकथा में नैचुरल फ्लो नही होता है। कहानी में इतने ज्यादा ट्विस्ट होते है कि आप हैरान हो जाते है। यह एक चुनौती ही है ।

एक एक्टर के तौर पर आप क्या फील करती है?
जब काम की तारीफ होती है तो बहुत अच्छा लगता है। उस वक्त मेरे पांव जमीन पर नही होते जब शूटिगं के बाद बाहर जाने पर दर्शक पद्मिनी के रूप में पहचान लेते है।

बडे़ पर्दे की जगह छोटा पर्दा क्यों चुना?
छोटा पर्दा मेरे लिए एक अच्छा प्लेटफार्म है। यहां शोहरत जल्दी मिलती है क्योंकि धारावाहिक लबें चलते है। मुझे अब तक छोटे पर्दे से बहुत कुछ मिला है। मै पूर्ण रूप से संतुष्ट हूँ  अपने कैरियर को लेकर।

अभिनय के क्षेत्र में पहचान नही बना पाती तो ?
अब अभिनय के कारण आम लोगों में मेरी अपनी एक अलग पहचान है। अगर ऐसा नही होता तो मैं चंडीगढ़ में वकालत कर रही होती। 

भविष्य की योजनाएं?
फिलहाल इनदिनों मेरा लक्ष्य ‘कहानी चंद्रकांता की’ है लेकिन समय मिला तो फिर कुछ अलग सोचा जा सकता है।

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