भजन गायिकी में भी हुनर का कमाल होता है: स्वाति निरिखी


चंदन शर्मा

भाव गीत, सुगम संगीत, बॉलीवुड के सिनेमाई गीत, गजल और भजन गायिकी के विभिन्न पक्षों से संबद्ध कलाकारों का अंदाज जुदा जुदा होता है.  प्राय सभी फनकारों की अपनी अलग थलग शैली होती है.यूँ तो लता मंगेशकर, आशा भोंसले, अलका याग्निक कविता कृष्णमूर्ति आदि गायिकाओं ने गायन की हर विधा को गाया है, किन्तु फिर भी उन्हें अपना एकाधिकार एक निश्चित पक्ष में करना ही पडा है. जसपिंदर निरुला, ऋचा शर्मा ने अपनी गायिकी की हुंकार माता के जागरण, माता की चोकी और विविध भजनों के गायन से की, आज भी इन्हें इस गैलिरी की ‘विशिष्ट गायिका’ का दर्जा दिया जाता है, स्वाति निरिखी भी इसी विधा की उभरती हुई युवा भजन गायिका हैं इलाहाबाद से संबद्ध यह गायिका भजन गायन की पराकाष्ठा को छूना चाहती हैं ..समूचे उत्तर प्रदेश में कई कार्यकर्मों के जरिये स्वाति निरिखी ने संगीत, भजन प्रेमियों में अपना लोहा मनवा लिया ..

 मुंबई की म्युजिक कंपनी ‘रेड एंड यलो ‘ने स्वाति निरिखी की आवाज में ८ विविध भजनों का एक एलाबम ‘जयकारा तेरे नाम का’ रिलीज किया है.  इस अवसर पर स्वाति से उनके कैरियर को लेकर अन्तरंग बातचीत हुई, यहाँ प्रस्तुत है उसके महत्वपूर्ण अंश:

गायिका के रूप में आपने अपने हुनर पहचाना और क्या आप इस प्रोफेशन में शुरू से ही आने को तैयार थी ?-“मै तो डॉक्टर बनाना चाहती थी, सीरियसली मैने उस दिशा में अपनी पढाई शुरू कर दी थी, कभी सपनों में नही सोचा था, कि डाक्टरी का मिशन सिंगर के प्रोफेशन में तब्दील हो जायेगा. हुआ यूँ कि मै अपने एक कर्जन की शादी में गई हुई थी, वहाँ मुझसे गाने की फरमाइश की गई ..मैंने आशा जी का गाया एक गीत गा दिया बड फिर क्या कहने, हर ओर से मेरी हौंसला अफजाई होने लगी. तभी से मै गायन और संगीत के बारे में सोचने लगी .”

क्या आपने गायन की बाकायदा ट्रेनिंग ली और इस अनजाने सफर में चलने में क्या महसूस किया?-“मै कायस्थ घराने से ताल्लुक रखती हूँ, जहाँ गाना बजाना आना आम बात है. मगर जब प्रोफेशन का सवाल उठा, तब मैंने फोर्मल शिक्षा अपने चाचा जी से ली, बाद में मैंने प्रयाग संगीत विद्यापीठ, इलाहाबाद से ‘संगीत प्रभाकर‘ की डिग्री ली. किसी भी नए क्षेत्र में कदम रखना आसान नहीं होता, पहले पहल तो डर तो हर किसी को लगता ही है, मुझे भी लगा किन्तु मैंने अपने आत्म विश्वास को डिगने नहीं दिया, शायद यही वजह ही कि मै शुरुआत कर सकी .
आप अपना रोल मॉडल किसे मानती हैं,क्या आप उनसे मिल पाई ?-“ऋचा शर्मा और जसपिंदर निरुला मेरे प्रेरणा स्तंभ हैं, कुछ हद तक मै अलका याग्निक के भी करीब अपने आपको पाती हूँ. जहाँ तक’ पसंदीदा सिंगर’की बात है तो वो स्थान मै आशा भोंसले जी को ही दूंगी …मै उनकी तरह विविध रंगों वाली गायिका बनना चाहती हूँ . काश मै उनसे मिल पाती ‘’

आपके पहले म्युजिक एलबम को कितना और कैसा रिस्पोंस मिला गायिका के तौर पर आपने क्या महसूस किया ?-मेरे म्युजिक एलबम जयकारा तेरे नाम का ‘को बहुत बढिया रिस्पोंस मिला, इस एलबम ने मेरी अंदर की गायिका को ना केवल संतुष्ट किया बल्कि मुझे आगे बढने का एक अच्छा टेक ओफ्फ दिया. मै अब अपने अगले एलबम की तैय्यारी में लग गई हूँ .”
आपका पसंदीदा संगीतकार कौन हैं,किसकी कम्पोजीशन में गाने की तमन्ना है.-“यूँ तो मै एल.पी और आर.डी बर्मन की गहरी फैन हूँ , मगर इस्माइल दरबार मेरे फेवरेट म्युजिक कम्पोजर हैं, मै उनके संगीत निर्देशन में गाने की तमन्ना रखती हूँ .”

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