लोगों को जागरूक करने में गैर सरकारी संस्थाओं (एन.जी.ओ.) की भूमिका अहम् है

रानी सिंह 

आज दिनांक 28.07.2012 को एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में गैर सरकारी संस्थाएं वर्तमान में सामाजिक जीवन की विभिन्न क्षेत्रों में कल्याणकारी कार्यों में अपना महत्वपूर्ण योगदान दे रही है।


आधुनिकता से जहाँ एक ओर आर्थिक समृद्धि बढी है वहीं सामाजिक जटिलताओं में भी बढोतरी हुई हैं। लोगों को जागरूक करने में इन गैर सरकारी संस्थाओं की भूमिका अहम्  है। उक्त विचार भारतीय सामाजिक संस्थान के सौजन्य व श्री ज्ञान गंगोत्री विकास संस्था के द्वारा आयोजित एकदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में पधारे राजीव झा जी ने कहे। 

प्रशिक्षण एवं कार्यशाला में पश्चिमी दिल्ली के अन्तर्गत रोहिणी, पंजाबी बाग, जनकपुरी, उत्तम नगर, द्वारका, कीर्ति नगर, राजौरी गार्डन और पटेल नगर आदि क्षेत्रों से गैर सरकारी संस्थाओं (एन.जी.ओ.) के लगभग 60 प्रतिभागियों ने इसमें में भाग लिया।
राजीव झा जी ने कार्यशाला में आये लोगों को आगे कहा कि बदलते समय के दौर में सामाजिक संस्थाओं का भी धीरे-धीरे निजीकरण होने लगा और कल्याणकारी योजनाए भी सरकारी क्षेत्र से दूर होती जा रही है। ऐसी स्थिति में जो सामाजिक कल्याणकारी कार्य थे उन कार्यों से जनता और सरकार के बीच हाई बढती गई और सामाजिक समस्याओं का निपटारा समय पर नहीं होने लगा।

राजीव झा जी ने आगे कहा कि जहाँ एक ओर गैर सरकारी संस्थाएं समस्याओं का समाधान कर रही है वहीं दूसरी ओर फायदे का दुकान भी बन रही है। जिसका प्रमाण यह है कि बहुत सारी गैर सरकारी संस्थाएं फर्जी कामों में पकडी गई और उनका पंजीकरण रद्द भी किया गया। उन्होंने सुझाव दिया कि इन संस्थाओं को अधिक से अधिक फन्ड मुहैया कराया जाए और समय-समय पर निरिक्षण और परीक्षण भी किया जाए ताकि इन पर सरकारी अंकुश लगा रहे।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए निर्मल माता जी ने महिलाओं को जागरूक करने पर जोर दिया और समाज में बदलाव आ सकता है। उन्होंने कहा कि महिलाओं के क्षेत्र में काम करने वाली गैर सरकारी संस्थाओं को प्रोत्साहन के लिए सरकार समय-समय पर समानित करें ताकि उनके बीच कल्याणकारी कार्यों के लिए प्रोत्साहन मिल सके। उन्होंने जार देकर कहा कि ये गैर सरकारी संस्थाएं दलित, पिछडे, आदिवासी क्षेत्रों में काम करें।

भारतीय सामाजिक संस्थान, दलित प्रभाग के कार्यक्रम संयोजक श्री कमलकान्त प्रसाद ने गैर सरकारी संस्थाओं को किन-किन मुद्दों पर काम करना चाहिए तथा उनके लिए सरकार के द्वारा कौन-कौन सी नितियाँ है और उन्हें कैसे लागू किया जाए। उन्होंने झुग्गी-झोपडी व मलिन बस्तियों में रहने वाले मजदूरों की सामाजिक व आर्थिक स्थिति का अवलोकन करने के लिए गैर सरकारी संस्थाओं की भूमिका को अह्म बताया। उन्होंने कहा कि एन.जी.ओ. जैसी संस्थाओं का दायित्व है कि सामाजिक जिम्मेदारियों को पूरा करने के लिए सरकार और जनता के बीच सामंजस्य स्थापित करें। उन्होंने विशेष घटक योजना कार्यक्रम एवं दलित कैडर और सामाजिक कार्यकर्ता विषय पर विस्तृत रूप से कार्यशाला में आए प्रतिभागियों को जानकारी दी।

संस्था के महासचिव भाई बी.के.सिंह ने कहा कि गैर सरकारी संस्थाओं का दायित्व है कि वह समाज के उस तबके के लिए काम करें जो समाज में सबसे उपेक्षित है। साथ ही उन्होंने कार्यशाला में आए तमाम प्रतिभागियो से यह अपील की वे अपने अपने क्षेत्र में शिक्षा, विकंलागता, बेरोजगारी, मानवाधिकार, स्वास्थ्य, निरक्षरता, कन्या भ्रूण हत्या जैसे विषयों को लेकर अपने अपने क्षेत्र में कार्यशाला करें।
संस्था की उपाध्यक्ष रानी सिंह ने प्रशिक्षण एवं कार्यशाला में आए तमाम प्रतिभागियों को संस्था के विषय में बताया तथा गैर सरकारी संस्थाओं की वर्तमान समय में क्या उपयोगिता है जानकारी दी। कार्यशाला एवं प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों ने वक्ताओं से प्रश्न पूछे और उनके प्रश्नों का समाधान भी किया। इस कार्यशाला में विजय कुमार, मनमीत कुमार, मूरत कुमार, मुस्कान आदि ने भी अपने विचार रखें।                                                 

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