सहानुभूति नहीं समानुभूति की हकदार हैं महिलाएं: सुश्री सुरभि


महिलाओं के हितों की रक्षा एवं उनके संरक्षण के लिए कार्यरत संगठन ”जस्टिस फाउंडेशन” ने जेजी ब्लाक विकासपुरी में ”सेव वुमन” की परिकल्पना पर आधारित जागरूकता अभियान चलाया । इस दौरान क्षेत्रीय निगम पार्षद एवं दिल्ली विश्वविद्यालय की पूर्व अध्यक्षा सुश्री अमृता धवन, एडवोकेट शिखा त्यागी , गवर्मेंट स्कूल पालम की प्रिन्सिपल श्रीमती सुषमा गुप्ता , शिक्षिका श्रीमती सीमा जैन , इंजीनियर श्री दिनेश वत्स एवं आईटी प्रोफेशनल श्री प्रदीप कुमार सहित बड़ी संख्या में लोगों ने यथासंभव महिलाओं के हितों की रक्षा करने की प्रतिबद्धता जताई । 

इस अवसर पर ”सेव वुमन” कैम्पेन की कन्वीनर सुश्री सुरभि ने महिलाओं के विरुद्ध जारी हिंसा एवं इस पर अंकुश लगाने के प्रति लोगों को जागरुक किया। सुश्री सुरभि ने कहा कि यह शर्मनाक है कि देश में महिलाओं के खिलाफ हिंसा के मामले दिनोदिन बढ़ते ही जा रहे है। कन्या भ्रूण हत्या से लेकर रेप जैसी घटनाओं को सिलसिलेवार अंजाम दिया जा रहा है। परन्तु यह दुर्भाग्य ही है कि इस पर अंकुश नहीं लगाया जा सका है। सुश्री सुरभि ने कहा कि निश्चित रूप से पुलिस के काम करने के तौर-तरीके, न्याय व्यवस्था के विभिन्न पहलुओं और दंड विधान के प्रावधानों में अपेक्षित बदलाव किए जाने चाहिए, लेकिन साथ ही साथ समाज की मानसिकता में भी बदलाव लाने की जरुरत है।

सुश्री सुरभि ने कहा कि स्त्री के प्रति हमारी खराब मानसिकता का ही परिचय खाप पंचायतों के वे आदेश भी देते हैं, जिनमें कभी तो उनके जींस पहनने पर पाबंदी लगा दी जाती है और कभी मोबाइल रखने पर। कभी प्रेम विवाह कर लेने पर उनकी हत्या को जायज ठहरा दिया जाता है और कभी गाना सुनने पर प्रतिबंध लगा दिया जाता है। कभी दहेज के लिए उनकी जान ले ली जाती है और कभी परिवार के मान-सम्मान के नाम पर। इतना ही नहीं, कोई अप्रिय घटना घट जाने पर समाज के जिम्मेदार लोगों की उंगलियां भी अराजक तत्वों के बजाय स्वयं उनकी ही ओर उठने लगती हैं, जो कि घटना की भुक्तभोगी होती हैं। समाज के रवैये के कारण ही अपराधी सीना ठोक कर घूमते हैं और पीड़ित अपराध बोध से भर जाती है। ऐसे में यदि समाज की सोच को बदलने का काम नहीं किया जाता तो स्थितियों में सुधार की उम्मीद कम ही है।

सुश्री सुरभि ने कहा कि नारीशक्ति सहानुभूति की नहीं बल्कि समानुभूति की हकदार हैं। महिलाओं के प्रति समाज को नकारात्मक रुख छोड़कर उन्हें पूरी स्वतंत्रता , मान-सम्मान एवं समान अवसर प्रदान करनी ह¨गी ,तभी सही मायने में राष्ट्र-समाज की प्रगति संभव है। इस अवसर पर क्षेत्रीय निगम पार्षद सुश्री अमृता धवन सहित बड़ी संख्या में उपस्थित लोगों ने महिला हितों एवं उनके संरक्षण के लिए कार्य करने की प्रतिबद्धता जताई ।

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