संजय संग काम करना सौभाग्य की बात: अरशद

प्रेमबाबू शर्मा

‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस’, ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ ‘धमाल’, ‘डबल धमाल’, ‘एंथनी कौन है’ और ‘वाह! लाइफ हो तो ऐसी’ फिल्मों में संजय दत्त के साथ में काम कर चुके बॉलीवुड अभिनेता अरशद वारसी एक बार फिर से संजय दत्त के साथ फिल्म ‘जिला गाजियाबाद’ में नजर आएंगे। आनंद कुमार निर्देशित ‘जिला गाजियाबाद’ वैसे इन दिनों विवादों के घेरे में है। लेकिन अषराद को इस बात से कोई लेना देना नही है। वे अपने फिल्मी करियर को लेकर क्या सोचते है जानते है उनकी ही जुबानी।

फिल्म 22 जुलाई को रीलिज होनी है, लेकिन कुछ लोगों का आरोप है कि फिल्म में ‘जिला गाजियाबाद की छवि को धूमल दिखाया है, इसके ही चलते उन्होंने अदातल का दरवाजा खटखटाया है इस आपकी राय ?
यह बात मेरी जानकारी में नही है। फिल्म में अभिनय करने के बाद में मेरा दायित्व समाप्त हो गया था। फिल्मों पर अक्सर विवाद होते है। लेकिन इस बारे में मुझ से बेहतर जबाव निर्माता ही दे सकते है।

आप संजय दत्त के साथ एक बार फिर नजर आयेंगे फिल्म जिला गाजियाबाद में ?
जी हाँ । संजय दत्त के साथ काम करना सौभाग्य की बात है। मैने संजय दत्त के साथ में ‘मुन्ना भाई एम.बी.बी.एस’, ‘लगे रहो मुन्ना भाई’ कई फिल्मों में काम किया और सभी ही फिल्में हिट रही हैं।

लगता है आपकी संजय दत्त के साथ में अच्छी टयूनिंग है?
टयूनिंग तो है ही,इसके अलावा वे एक अच्छे इंसान और अपने सहकलाकारो के साथ पूरा सहयोग करते है। मैं उनके काम से हमेशा प्रभावित रहा हूँ साथ ही उनके साथ काम करते हुए, उनसे काफी कुछ सीखने को मिलता है। दुसरी बात जब आप किसी ऐसे कलाकार के साथ काम करते हैं जो बेफिक्र और निश्चिंत स्वभाव का है तो आप भी बेहतर महसूस करते हैं। संजय बहुत बेफिक्र कलाकार हैं। आप उनके सामने कुछ भी करें उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता।

फिल्म में आपका किरदार क्या हैं?
मैं महेन्द्र बैंसला के किरदार में हूँ  जिसे हालात फौजी से गैंगस्टर बना देते है और उसकी दुश्मन है सतबीर गुर्जर( विवेक ओबराय) । दोनों के गिरोह के खूनी टक्क्र होती रहती है।

आपकी कई फिल्मों की सफलता ने इस फिल्म के प्रति दर्शकों की अपेक्षाएं काफी बढा दी हैं। क्या कहना है आपका?
सही कहा आपने। जब किसी की पहली फिल्म हिट होती है, तो स्वाभाविक रूप से उसकी दूसरी फिल्म पर दबाव काफी बढ जाता है, लेकिन उस दबाव को झेलने के लिए मेरे साथ संजय दत्त,बाबी गिल जैसे अभिनेता हैं। मैं जानता हूं कि पब्लिक को क्या पसंद है। ‘जिला गाजियाबाद’ में उनकी पसंद के सारे मसाले हैं।

फिल्म में आप गैंगस्टर के रोल में है,जबकि अनेकों फिल्मों में इसी प्रकार के रोल में नजर आए?
मुझे बार-बार गैंगस्टर की भूमिका मिलती है, तो इसमें मैं क्या कर सकता हूं? मेरी पर्सनैल्टी को यह सूट करता है। वैसे ऐसी भूमिकाओं में मैं दर्शकों द्वारा पसंद किया जाता हूं। मैं भी ऐसे किरदार में सहज महसूस करता हूं। इसलिए ऐसे रोल स्वीकार करता हूं।

किस तरह की फिल्म है ?
आनंद कुमार निर्देशित ‘जिला गाजियाबाद’ मारधाड़ से भरपूर एक राजनीतिक रोमांच है जिसमें विवेक ओबरॉय, बाबी गिल,मिनीशा लांबा और रवि किशन भी हैं।

आपमें टैलेंट है, लेकिन आपकी प्रतिभा को कई मौका नही मिला?
मैं आपकी बात से सहमत नही हूँ । फिल्म ‘तेरे मेरे सपने के’ बाद से आज मैंने जो भी काम किया उसे लोगों ने नोटिस किया।मैं हर काम को हाँ नहीं। सिर्फ वही करता हूं जो चीज मुझे अच्छी लगती है।

अरशद के करियर में कुछ ऐसी भी फिल्में रही जो बुरी तरह से फ्लॉप रही इसको लेकर क्या सोचते है?
मुझे किसी भी फिल्म को लेकर कोई पछतावा नहीं है। अगर फिल्म फ्लॉप होती है, तो मैं क्या कर सकता हूं और अगर हिट होती है तो मैं क्या करूंगा। फिल्म की सफलता या असफलता को लेकर आप केवल अपनी राय बदल सकते हैं। मेरी फिल्में फ्लॉप हुईं और मैंने इस बात को स्वीकार किया। लेकिन सभी फिल्मों के लिए मेहनत करने में मैंने कोई कसर नहीं छोडी।

फिल्में साइन करने से पूर्व आपका क्या नजरिया होता है?
कहानी,उसमें मेरा किरदार और निर्देशक देखकर ही फिल्में साईन करता हूँ । मैं फिल्में सोच समझकर ही साईन करता हूँ । मेरा सिर्फ यही आधार होता है कि मुझे कोई चीज भा गई, एक्साइट कर गई तो मैं कर लूंगा। मैंने कैरेक्टर को अच्छे से निभाया। वही मेरी सक्सेस है।

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