एक शाम कविता के नाम

सामाजिक एवं सांस्कृतिक सेवा में सलंग्न वरिष्ठ नागरिकों की संस्था “सुख दुःख के साथी” ने द्वारका सेक्टर-२२ में २८ अप्रेल रविवार की शाम एक काव्य संध्या का आयोजन किया। संस्था के प्रधान श्री विजय शंकर ने बताया कि संस्था के संयुक्त सचिव और काव्य संध्या के संयोजक श्री प्रेम बिहारी मिश्र ने हिन्दी साहित्य की छिपी प्रतिभाओं को संगठित करने और उन्हें एक समुचित मंच प्रदान करने के लिए नियमित पाक्षिक काव्य गोष्ठी आरम्भ करने का निश्चय किया है। इसी क्रम में, सर्वप्रथम गोष्ठी “सुख दुःख के साथी” के सौजन्य से कुछ विस्तार के साथ इस काव्य संध्या के रूप में की गई।

पूरे तीन घंटे अविरल रूप से चली इस काव्य संध्या में श्रोता मन्त्र मुग्ध से बैठे रहे। श्री अशोक लव की कविता–‘ चलो भूल जाएँ’की पंक्तियाँ “किस-किस बात को याद करें, चलो सब भूल जाएँ और कविता’प्रवासी पुत्र-पुत्रियाँ ‘ की पंक्तियाँ “कैसे-कैसे सजाते हैं स्वप्न माता-पिता, और हिस्से में आ जाते हैं उदासियों के ढेर” ने कुछ श्रोताओं की आँखें नम कर दीं। अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त डॉ स्नेह सुधा की सुप्रसिद्ध ‘स्त्री-पुरुष’ एवं अन्य कविताओं ने और मुख्य-अतिथि डॉ हरीश नवल की अम्मा-बापू संबंधी मर्मस्पर्शी कविता ने सभी के हृदय को छू लिया। श्री अशोक वर्मा और डॉ शबाना नजीर की गजलों और शेरों ने ऐसा मंत्रमुग्ध किया की श्रोता भोजन तक पर जाने के लिए इंकार करते हुए दिखाई दिए। वरिष्ठ कवियत्री श्रीमती आशा शैली की कविताओं को विशेष रूप से सराहा गया। श्री प्रेम बिहारी मिश्र की कविता “कल्पित से स्पर्श मात्र ने मुझको मद में चूर कर दिया” और श्रीमती सुधा सिन्हा, श्री अनिल उपाध्याय, श्री वीरेंद्र कुमार मंसोत्रा, कर्नल प्रेम चंद चौधरी, डॉ प्रबोध, श्री ध्रुव कुमार गुप्ता आदि सभी की कविताओंपर श्रोता बार बार तालियाँ बजाते हुए दिखाई दिये।

सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार एवं अंतर्राष्ट्रीय शिक्षाविद मुख्य अतिथि डॉ हरीश नवल ने काव्य संध्या की साहित्यिक उत्कृष्टता तथा श्रोताओं की प्रभुद्धता की भूरि-भूरिप्रशंषा करते हुए अतीव प्रसन्नता व्यक्त की । जाने माने साहित्यकार तथा समाजसेवी डॉ अशोक लव ने इस काव्य संध्या की अध्यक्षता की और काव्य संध्या के समापन पर अपने मोनोद्गार व्यक्त करते हुए कहा कि ऐसे समय में जबकि कवि सम्मेलन धीरे धीरे फूहड़ हास्य का मंच बनते जा रहे हैं तब श्री प्रेम बिहारी मिश्र का यह प्रयास निस्संदेह सराहनीय है । कार्यक्रम के अंत में सुख दुःख के साथी संस्था के सदस्यों की ओर से सभी उपस्थित व्यक्तिओं के लिए सम्मानपूर्वक भोजन की व्यवस्था भी की गई।

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