लीक से हटकर है फिल्म बजाते रहो- रणवीर शौरी

प्रेमबाबू शर्मा 


एक था टाईगर,खोसला का घोसला,चांदनी चैक टू चायना,किंग इज सिंह,एक छोटी सी लव स्टोरी, लक्ष्य, हमदम, यूं होता तो क्या होता, हनीमून ट्रैवल प्रा. लि., ट्रैफिक सिंगल, भेजा फ्राई, आजा नचले, सिर्फ, उगली पगली जैसी अनेकों फिल्मों में अपने अभिनय के जलवे दिखाने वाले रणवीर शौरी जल्द ही रीलिज फिल्म ‘बजाते रहो’ में एक अहम् किरदार में नजर आएगें। अपने फिल्मी करियर और फिल्म के बारे में उनका क्या कहना है जानते हुए उसकी ही जुबानी: 

अपनी अपकमिंग फिल्म ‘बजाते रहो’ मैं आपने किरदार के बारे मैं कुछ बताएं ?

फिल्म ‘बजाते रहो’ मैंने मुख्य पात्र के बचपन के दोस्त बलवंत को निभाया हैं ।यह दोस्त फिल्म के हीरो के परिवार के बुरे समय में मदद करता है। बंलवत दिल्ली मैं पार्किंग लोट का मालिक हैं, लेकिन गरम मिजाज होते हुए भी ये एक अच्छे दिल का और मजकियाँ अंदाज वाला चतुर इंसान हैं !

फिल्म ‘बजाते रहो’ की कहानी क्या है ? 
 फिल्म चार लोगो की मजकियां या पागलपंती भरी कहानी हैं, जो एक ही शहर में किसी एक मकसद से साथ आये हैं। यह फिल्म सही काम को गलत तरीके से करने पर आधारित हैं ।

फिल्म में आप और शशांत एक साथ काम कर रहे, उनके साथ काम करने का आपका अनुभव कैसा रहा ?
शशांत और मैंने टीवी मैं एक साथ कई सीरियलों में काम किया हैं, जिसमें ‘द ग्रेट इंडियन’ कॉमेडी शो भी शामिल हैं और वह मेरा अच्छा दोस्त भी हैं। शशांत कॉमेडी के अलावा डांस में भी माहिर है। इस फिल्म को मैंने शशांत के कारण हर साइन की थी। 


लेकिन आपकी अधिकतर फिल्में विनय पाठक के साथ ही रही है। क्या यह कहा जा सकता है की आप उनका आधार मानते हुए फिल्मों का चुनाव करते हैं ?
विनय और मेरा पिछले 15 वर्षों का साथ रहा हैं और हम दोनों के बीच अच्छी टयूनिंग है।इसलिए मैं उनके साथ करना पंसद करता हूँ। 

सुनने में आया है कि फिल्म में विनय पाठक से ज्यादा आपका लाउड किरदार रहा हैं क्या यह सही हैं ?
मेरा किरदार दिल्ली के एक व्यवसायी का है , जिसके कारण मेरा किरदार लाउड था। वहीं विनय का किरदार एक शांत व्यक्ति के व्यव्हार के सामान हैं जिससे यह कहा जा सकता हैं की हम दोनों के किरदारों की अलग – अलग आवश्यकता थी ।

शूटिंग का पूरा समय कैसा रहा ?
मौजमस्ती करते हुए कब शूटिंग पूरी हो गई पता ही नही चला। बजात रहो के दौरान बहुत कुछ सीखने को भी मिला। 


रिवेंज कॉमेडी पर आपके क्या कहना हैं ?
बजाते रहो एक रिवेंज कॉमेडी की जगह एक कॉमिक थ्रिलर हैं। यह अपने आप मैं पहली स्क्रिप्ट हैं, जो फिल्म को और रोचक बनती हैं । 

ऐसा कहा गया हैं की सेट पर कास्ट अपनी लाइन के लिए हमेशा झगडती रहती थी । इसके बारे मैं कुछ बताएं ?
हाँ, यह कुछ हद तक सही हैं। हमारे निर्दशक शशांत शाह बहुत सरल आदमी हैं और और यह उनका एक अंदाज था हम लोगो में जो भी सेट पर पहले आता था उसे पहले लाइन मिल जाती थी । 

फिल्म में काम कर रहे कलाकारों से आपके संबध कैसे रहे ?
सभी का एक दुसरे के साथ अच्छा संबंध था। शशांत , मैं और विनय एक दुसरे को बहुत अच्छे से जानते थे तो कोई परेशानी नहीं थी ।

खोसला का घोसला के बाद दिल्ली मैं शूटिंग करने का का आपका अनुभव कैसा रहा ?
एक तरह से सब कुछ पहला जैसा ही था, फिल्म की शूटिंग फिल्म ‘खोसला का घोसला’ से काफी मिलती हुई जगहों पर हुई हैं । फिल्म के किरदार भी एक हद तक एक जैसे हैं , जो परिवार और दोस्तों की खोज में लगा रहता हैं।

आपके अपकमिंग प्रोजेक्ट्स के बारे मैं कुछ बताएं ?
फिलहाल मेरा पूरा ध्यान ‘बजाते रहो’ पर हैं। मेरे लिए कहानी और उसमें मेरा किरदार ज्यादा महत्व रखता है। सही बताऊँ तो मेरे पास अभी कोई बहुत अच्छी स्क्रिप्ट्स भी नहीं आई हैं । जल्दी हैं ।

क्या खास है फिल्म में जिसे दर्शक देखे ?
यह फिल्म बहुत लाइट मनोरंजक फिल्म हैं और इसकी स्क्रिप्ट अलग होते हुए भी बहुत रोचक हैं। इस तरह की फिल्म पहली कभी नहीं बनी हैं और दर्शक इस कहानी को खूब एन्जॉय करेंगे , जिससे कहते हैं बजाते रहो।

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