पुरुषोत्तम राम से प्रेरणा लेनी चाहिए


मुझे रामायण में सबसे अच्छा पात्र भगवान राम लगते हैं। वे सभी पुरुषों में उत्तम थे। इसीलिए उन्हे मर्यादा पुरुषोत्तम  की उपमा दी जाती है। वे अपने माता-पिता, गुरुओं, बुजुर्गों व स्त्रियॉं का अत्याधिक सम्मान करते थे। वे कथनी व करनी में विश्वास रखते थे। वे अयोध्या नरेश राजा दशरथ के सबसे बड़े पुत्र थे। उनका लक्ष्मण से गहरा प्यार था। उन्होने सभी रिश्ते बखूबी निभाए, जैसे एक बेटे का, पति का, भाई का। वे भगवान विष्णु के सांतवेअवतार माने जाते हैं। उन्होने शिव भगवान का धनुष तोड़कर राजा जनक की बेटी सीता से विवाह किया। उन्होने सीता को रावण के चंगुल से छुड़ाने के लिए लंका पर हमला बोला तथा कई राक्षसों समेत रावण का वध भी किया और उन्ही के उपासक तथा रावण के ही भाई विभीषण  को लंका का राज पाठ सौंपा। हमें पुरुषोत्तम  राम से प्रेरणा लेनी चाहिए तथा उनके द्वारा चुने गए रास्ते पर चलकर अपने-अपने कार्य को कुशलतापूर्वक अंजाम देना चाहिए।

शिवम 


कक्षा सांतवी
(आर. डी. राजपाल पब्लिक स्कूल, 
सैक्टर-9, द्वारका, दिल्ली)

द्वारका श्री रामलीला सोसाइटी द्वारा लेख आमंत्रित

प्रिय बच्चों आप भी पवित्र रामायण पर आधारित किसी भी चरित्र के बारे में लिखे लेख व पेंटिंग गोकुल गार्डन, सैक्टर-7, द्वारका तथा ramliladwarka@gmail.com पर प्रेषित किए जा सकते हैं। सुश्री नीता अरोड़ा, डॉ. कीर्ति काले, श्री प्रेम बिहारी मिश्र व डॉ. सरोज व्यास अनुभवी शिक्षाविद्धों की निर्णायक मंडली द्वारा चुना जाएगा। चुने गए श्रेष्ठ लेखों/पेंटिंग के लिए स्कूली बच्चों को विशेष रूप से आगामी रामलीला में भव्य मंच पर पुरुस्कृत किया जाएगा। तथा इस प्रतियोगिता में शामिल प्रतेयक प्रतिभागी को प्रमाण पत्र से सममाननीत भी किया जाएगा।

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