DAUGHTER is not Equal to Son , It is Better Than a SON…..!

रविंदर डोगरा 

बेटी निकलती है तो

कहते हो छोटे कपडे
पहन कर मत जाओ ….
पर बेटे से नहीं कहते
हो कि नज़रों मैं गंदगी
मत लाओ….

बेटी से कहते हो कि
कभी घर कि इज्जत
ख़राब मत करना …
बेटे से क्यों नहीं कहते
कि किसी के घर कि
इज्जत से खिलवाड़ नहीं करना …

हर वक़्त रखते हो नज़र
बेटी के फ़ोन पर …
पर ये भी तो देखो बेटा
क्या करता है इंटरनेट पर .

किसी लड़के से बात करते देखकर
जो भाई हड़काता है .
वो ही भाई अपनी गर्लफ्रेंड
के किस्से घर मैं हंस हंस
कर सुनाता है .

बेटा घूमे गर्लफ्रेंड के साथ तो कहते हो अरे बेटा बड़ा हो गया .
बेटी अपने अगर दोस्त से भी
बातें करें तो कहते हो बेशर्म हो गयी
इसका दिमाग ख़राब हो गया …..

पहले शोषण घर से बंद करो
तब शिकायत करना समाज से …….

हर बेटे से कहो कि हर बेटी कि इज़ज़त करे आज से ………।

बात निकली है तो दूर
तक जानी चाहिए

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