श्री शनिधाम में उमड़ा आस्था का सैलाब

अशोक कुमार निर्भय

शनि तीर्थ श्री सिद्घ शक्तिपीठ शनिधाम असोला, फतेहपुरी बेरी महरौली में शनि अमावस्या को दिन भक्तों का ताता लगा रहा।शनि अमावस्या पर्व पर देश के कोने-कोने से आये लाखों की संख्या में श्रद्घालुओं ने शनिधाम में भाग्यविधाता, कर्मफल दाता, ज्ञान के सागर, सफलता के मूल तथा सर्वोच्च न्यायाधीश श्री शनिदेव का तैलाभिषेक किया तथा शं शं शनिदेव के मंत्रों के जाप से पूरा शनि परिसर गूंजायमान हो गया। स्वर्गानन्द की अनुभूति में तब्दील पूरा क्षेत्र श्री शनिदेव की आस्था के सैलाब में डुबा हुआ दिखाई दे रहा था। जहां पर कालसर्प योग, ढैय्या तथा साढ़ेसाती सहित शनि संबंधी सभी बाधाओं से मुक्ति के लिए श्री शनिधाम पीठाधीश्वर शनिचरणानुरागी श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर परमहंस दाती मदन महाराज जी ने विशेष अनुष्ठïान का आयोजन किया जिसमें शनि संबंधी अनेक बाधाओं से मुक्ति पाने के लिए लाखों की संख्या में आये भक्तगणों ने तैलाभिषेक तथा श्री शनिदेव का पूजन कर विशेष लाभ प्राप्त किया।

शनि अमावस्या महोत्सव के पूजन की शुरुआत शुक्रवार 25 जुलाई, रात 12 बजे से ही शुरू हो गयी थी। सर्वप्रथम श्री शनिधाम पीठाधीश्वर शनिचरणानुरागी श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर परमहंस दाती मदन महाराज ने पूजन की शुरुआत महाआरती से की। 26 जुलाई को महाआरती के बाद गुरुदेव ने श्रीशनिदेव का भस्माभिषेक व पंचामृत महाभिषेक किया। इसके साथ ही हवन की पूर्णाहुति से मंदिर के द्वार भक्तों के लिए खोल दिए गए जो कि हजारों की संख्या में लाइन में लगे हुए थे। देश-विदेश से भारी संख्या में विशिष्टï व अतिविशिष्टï लोग भी इस अवसर मौजूद थे। इस पावन मौके पर परमहंस दाती जी महाराज ने कहा कि मानव जीवन अति महत्वपूर्ण होता है। इसको संवारने के लिए कर्म के देवता के शरण में आना अति आवश्यक होता है। ये वे देवता हैं जो आपके अपने दुष्कर्मों की सजाय देकर सत्कर्म की तरफ प्रेरित करते हैं।

श्री शनिधाम पीठाधीश्वर गुरुदेव शनिचरणानुरागी दाती मदन महाराज जी का कथन है कि कर्मप्रधान है अर्थात जो व्यक्ति जैसा कर्म करेगा श्रीशनिदेव उसको उसी के अनुसार फल देंगे। गुरुदेव के कथन की छटा शनिधाम में दिखाई पड़ जाती है जहां पर बड़े-बड़े शब्दों में अंकित है कि व्यक्ति को सत्ï कर्मों पर ही विश्वास करना चाहिए। श्रीशनिदेव हमेशा ही सत्ï कर्मों के अनुयायियों के ही साथ रहते हैं। जो व्यक्ति बुरे कर्म करता है उसके साथ शनिदेव कभी नहीं रहते। जो व्यक्ति सत्ï कर्म करते हुए मां-बाप की सेवा, पति-पत्नी के बीच वैवाहिक धर्म का पालन तथा देश के प्रति वफादार होता है, उसे क्षण भर में शनिदेव सफलता के शीर्ष पर पहुंचा देते हैं। सत्ï कर्म न करने वाला व्यक्ति भले ही कितना बड़ा पुजारी ही क्यों न हो, खुद को शनिदेव का सबसे बड़ा सेवक मानता हो तथा टनों में तेलाभिषेक करता हो, शनिदेव उसका भला नहीं करते हैं। इसी अमृत वचन की आभा को समेटे हुए श्रीसिद्घ शक्ति पीठ शनिधाम आज कर्मफल दाता, भाग्यविधाता तथा सृष्टिï के रक्षक श्रीशनिदेव के नगरी में परिवर्तित हो गया है जहां पर आकर मात्र शीश झुकाने से ही उसके सारे कष्टï दूर हो जाते हैं। जो व्यक्ति तैलाभिषेक कर श्रीशनिदेव को प्रसन्न करता है, उसकी शनि संबंधी सभी बाधाएं दूर हो जाती हैं।

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