दिल्ली की सड़के एवं जीवन का दर्शन

डॉ श्वेता गुप्ता

कई बार ऐसा प्रतीत होता है कि दिल्ली की सड़को और जीवन के दर्शन में बहुत कुछ समान है | अगर एक बार गलत रास्ते पर निकल जाओ तो आभास होने के बावजूद आपको तब तक चलना होता है जब तक सही मार्ग पर वापस आने का विकल्प प्राप्त न हो | मुड़ कर फिर चलना प्रारंभ करते हैं पुनः उसी स्थान पर पहुँचते है जहाँ से गलत चलना प्रारंभ किया था और फिर सही रास्ते का रूख करते हैं |इस घटना के परिणाम स्वरुप हम अपना उत्साह, समय, धन एवं परिश्रम सब कुछ व्यर्थ करते हैं |

जीवन में अनेक बार ऐसे अवसर आते हैं जब हमें यह अहसास तो बहुत पहले प्रारंभ हो जाता है की हम गलत रास्तों पर चल निकले हैं किन्तु चाह कर भी हम तुरंत, ना वर्तमान परिस्थितियों को बदल सकते है न ही भूतकाल में जा कर सब कुछ वांछित ढंग से ठीक कर सकते हैं | दुसरी तरफ हम कई बार यह भी चर्चा करते हैं की अमुख निर्णय हमारे जीवन का टर्निग प्वाइंट साबित हुआ और आज मै इस सफलता के मुकाम पर खड़ा हूँ|
अब प्रश्न यह उठता है की हम अपने जीवन के लिये क्या चाहते है पहले प्रकार की गलती या दुसरे तरह की सफलता | दोनों ही परिस्थितियों में एक बात समान है सही जानकारी की उपलब्धि एवं सही समय पर सही निर्णय का चयन |

जानकारियों की मर्यादा होती है सत्यता एवं विश्वसनीयता अतः सही जानकारी हेतु एक निश्चित मात्रा में जानकारियों का एकत्रीकरण करें एवं उनको समाकलित कर ठोस जानकारियों को चिन्हीत कर लें |

निर्णयों की मर्यादा होती है उपलब्ध संसाधनों का कुशलतम प्रयोग अतः जो उपलब्ध है उसके आधार पर सही निर्णय लें | कोई भी निर्णय पूर्णतः ना तो सही होता है न ही गलत| यह पूर्णतः व्यक्तिगत एवं प्रासंगिक होता है | अतः सोच समझ कर लिये गये निर्णय कभी भी दिग्भ्रमित नही करते एवं पूर्ण मनोयोग से गतिशील रहने में सहायता करते हैं | केवल एक व्यक्ति विशेष ही समझ सकता है कि उन्होंने एक विशेष निर्णय क्यों और किस परिस्थितियों में लिया है |

इन सब के बावजूद भी यदि कभी यह लगने लगे कि कुछ गलत हो रहा है तो जीवन की सबसे बड़ी पूँजी अपने कीमती रिश्तों का मौका दें |

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