महिला प्रधान फिल्म है- मरदानी : रानी मुखर्जी


प्रेमबाबू शर्मा 

रानी मुखर्जी ने कहा कि मुझे लगता है कि आज के समय में सिर्फ सलमान ही ऐसे कलाकार हैं जिनकी फिल्में बॉकस ऑफिस पर सिर्फ उनके नाम पर बिकती हैं। हालांकि अगर फिल्म की विषय वस्तु अगर अच्छी हुई तो फिल्में बहुत अच्छी कमाई करती हैं लेकिन अगर कहानी ढंग की ना भी हुईं तो मुनाफा तो कमा ही लेती हैं।

रानी इस बात को भी स्वीकारती है कि मेरे फैंस आज भी इसलिए हैं क्योंकि मैंने अभी तक अधिकतर ऐसी फिल्में की हैं जिनका विषय और जिनकी कहानी बेहतर थी। जिन भी फिल्मों की कहानी, कंटेंट अच्छा नहीं था वो पिटी भी हैं तो आज के समय में मैं ये कह सकती हूं कि फिल्में स्टार्स के नाम पर नहीं बिकती। कहा जा रहा है कि फिल्म मरदानी’ में रानी का दमादर रोल कहीं महिलाओं के एक संदेश प्रेरक भी होगा। पिछले दिनों रानी से उनकी शादीशुदा जिंदगी और इस फिल्म के बारे में हुई बातचीत.


आप महिला.प्रधान फिल्में करने के लिए जानी जाती हैं। क्या यह फिल्म भी महिला प्रधान ही है?
मेरे शुरूआत के दौर की फिल्म मेंहदी से मेरा करियर शुरू हुआ और लोगों ने फिल्म और मुझे पंसद किया आज तक वो सिलसिला जारी है। रही बात महिला प्रधान फिल्मों के साइन करने की तो मैं पहले अपनी भूमिका देखती हूं, उसके बाद फिल्म। अगर दोनों अच्छी हैं तो ही वह फिल्म करना पसंद करती हूं।

फिल्म में मरदानी का क्या मतलब है?
फिल्म एक ईमानदार और बहादुर पुलिस ऑफिसर इंस्पेक्टर शिवानी शिवाजी राव कहानी है, जो निडर और काम के प्रति सजग है। इस रोल को मैने निभाया है।

चर्चा है कि यह किरदार कही सिंघम’ से प्रेरित है ?
जी हाॅ। इंस्पेक्टर शिवानी को ‘लेडीज सिंघम’ कहा जाए तो यह अतिशयोक्ति नहीं होगी। लेकिन फिल्म को महज इसलिए ‘संघम’ से कम्पेयर नहीं किया जा सकता। हालांकि वह भी एक ईमानदार और बहादुर पुलिस ऑफिसर की कहानी है। बेशक दोनों फिल्मों का बैकग्राउंड पुलिस डिपार्टमेंट हो सकते हैं लेकिन दोनों के इश्यूज अलग हैं।

फिल्म क्या मैसेज देती है?
जैसा कि मैंने कहा कि अभी फिल्म के बारे में ज्यादा कुछ कहना उचित नहीं होगा। फिर भी इस फिल्म के द्वारा मैं सरकार से एक डिमांड करना चाहूंगी कि स्कूल.कॉलेज में लड़कियों के लिए सेल्फ डिफेंस मार्शल आर्ट्स की ट्रेनिंग अनिवार्य कर देनी चाहिए।

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