भारतीय योग संस्थान का 48वाँ योग दिवस भव्य रूप से सम्पन्न

भारतीय योग संस्थान के 48वें योग दिवस समारोह का भव्य आयोजन दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में अति उल्लास, अनुशासन एवं व्यवस्थित रूप से सम्पन्न हुआ। श्वेत वस्त्र धारक साधक-साधिकाओं ने आसन, प्राणायाम, ध्यान प्रदर्शन से जहाँ प्रातःकालीन आभा को उत्कृष्ट बना दिया वहीं शंख ध्वनि, आकाश में उड़ाए गए रंग-बिरंगे गुब्बारों व शांति के प्रतीक कबूतरों ने वातावरण को मनमोहक बना दिया।

समारोह का शुभारंभ ध्वजारोहण, दीप प्रज्ज्वलन एवं सरस्वती वंदना से हुआ। तत्पश्चात महिला योग विशेषज्ञों द्वारा संचालित लगभग 15000 साधक-साधिकाओं के सामूहिक योगाभ्यास से मनोरम एवं विहंगम दृश्य प्रस्तुत हुआ। भारतीय योग संस्थान के महामंत्री श्री देसराज ने योग से मधुमेह रोग के निदान की प्रक्रिया से अवगत कराया। प्रधान श्री जवाहर लाल जी ने अपने आशीर्वचन में ‘सर्वे भवंतु सुखिनं, सर्वे सन्तु निरामयाः’ की कामना करते हुए समस्त मानव जाति से योग को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारतवर्ष में योग साधना की परंपरा प्राचीन काल से ही चली आ रही है। योग से धर्म, अर्थ, काम एवं मोक्ष की प्राप्ति संभव है। योग जीवन जीने की कला है। इसके निरंतर अभ्यास से शक्ति, सामर्थ्य एवं कार्य क्षमता में वृद्धि होती है। योग से ईर्ष्या-द्वेष का नाश होकर निष्काम सेवा का भाव उत्पन्न होता है। संस्थान के दिल्ली प्रांत प्रधान श्री ललित गुप्ता ने दिल्ली प्रांत की प्रगति एवं भावी योजनाओं पर प्रकाश डाला।

संस्थान के प्रवक्ता श्री राजकुमार जैन ने बताया कि ‘जीयो और जीवन दो’ के सिद्धान्त पर चलने वाला भारतीय योग संस्थान गत 47 वर्षों से देश-विदेश में संचालित अपने 2200 से अधिक केंद्रों के माध्यम से मानव की निःशुल्क सेवा कर उन्हें सुख-शांति प्रदान कर रहा है। देश एवं देश के बाहर युके, आस्ट्रेलिया, मारीशस एवं फीजी में संचालित संस्थान के योग साधना केन्द्र में प्रतिदिन लाखों लोग योगाभ्यास करते हैं। समारोह के दौरान डॉ. मीनू एवं साथियों ने संगीतमय सुमधुर भजन प्रस्तुत की। संस्थान के मंत्री श्री रायसिंह चैहान ने सभी के प्रति आभार ज्ञापित किया। अतीव श्रद्धा एवं समर्पण सहित संस्थान की प्रार्थना, शांति पाठ एवं प्रसाद वितरण के पश्चात समारोह का समापन हुआ।

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