कामेडी से पूरिपूर्ण है ‘हम है,तीन खुरापाती’: सुधीश शर्मा


प्रेमबाबू शर्मा 

स्टाईल,एक्सक्यूज मी जैसी अनेक फिल्में जो कालेज के दौरान की गयी शरारतों पर आधारित थी, इस तरह का विषय युवाओं में खासा द्वारा पंसद भी है। अब इसी कथानक को फिल्म से भुनाया है, निर्देषक सुधीष षर्मा ने फिल्म ‘हम है,तीन खुरापाती’ में। हालांकि उनका कहना है कि ‘यह लीक से हटकर बनीं फिल्म है।’

फिल्म 28 नवंबर को रिलीज हो रही है।मजेदार बात यह कि फिल्म का निर्देशन सुधीश के अलावा निर्देशक राजेश्वर चैहान भी कर रहे है। कई सीरियल, टेलीफिल्में और डाक्यूमेंटी का निर्देशक करने के बाद में ‘हम है, तीन खुरापाती’ सुधीश शर्मा पहली निर्देशित फिल्म है। उनका इस फिल्म पर क्या कहना है,जानते है उनकी ही जुबानीः

फिल्मों में आज कल कालेज जैसे कथानक को काफी भुनाया जा रहा है,और आपने भी अपनी फिल्म में इस तरह की कहानी का चुना है ?
कालेज में पढाई के दौरान कुछ पल यादगार बन जातेे है। इस तरह की कहानी को अक्सर फिल्मों दोहराया जाता रहा है,लेकिन कालेज जीवन में की गयीं षरारतें पूरी उम्र याद रहती है। इसलिए इस कारण इस तरह की कहानी का चुना।

ये आइडिया कैसे आया ?
बतौर निर्माता जब जयविंदर सिंह भाटी फिल्म निर्माण की योजना शुरू किया तो उन्हें ऐसी कहानी चाहिए थी,तो दिल करे छूए। कई कहानी के आइडिये,हमारे सामने आए,लेकिन वो हमारी पंसद नही थे। तभी बातों में भाटी जी, ने हमें अपने कालेज जीवन की कुछ शरारत भरी घटनाओं सुनाई,हम सात आठ लोग बैठे थे, सभी उनकी बातों पर ठहाके लगाकर हंसने,बस मेरे दिमाग में आइडिया आया कि क्यों ना इन यादों को ही फिल्म की कहानी में उतारा जाए। इस जन्म हुआ ‘हम है,तीन खुरापाती’ के रूप में आपके समाने है।

फिल्म ‘हम है,तीन खुरापाती’ की कहानी क्या है?
कहानी कालेज में पढने बाले तीन युवा रोहित राहुल और राजू के इर्द गिर्द घूमती है।उनकी शरारतें पूरे कालेज में मशहूर है। तीनों का एक ही सपना हैं,कि एक फिल्म का निर्माण करना है। प्रियांशू कालेज स्टूडेंट के अलावा उसे फिल्म डायरेक्शन का शौक है, जबकि श्रेय लेखक है और मौसम को अभिनय का शौक है। उनका परिवार चाहता है,कि वे उनके अनुसार काम करे। लेकिन वे अपना सपना करने में जुट जाते है। इस काम में साथ है उनकी प्रेमिका भी। फिल्म द्वारा बताया गया है, कि इंसान किसी को पूरा करने का संकल्प कर लेता है,,तो वह एक दिना पूरा ही है। कहानी के द्वारा यह भी बताया है कि प्यार की कोई परिभाषा नहीं होती! यह सच है कि प्यार का अहसास हमारे अंदर से आता है।

फिल्म में नये स्टार है,लगता फिल्म सफल हो पाएगीं ?
इसकी क्या गारंटी है कि मल्टी स्टारर फिल्में ही सफल होती है। मैं आपकों ऐसी बहुत सी फिल्मों के नाम बता सकता हॅू,जो मल्टी स्टारर के बाद भी बुरी तरह फलाप रही। लेकिन अब जिसे तेजी से दौर बदल रहा है। नये कलाकारों और अच्छी कहानी वाली फिल्मों को पंसद किया जा रहा है। हमारी दमदार कहानी दर्षकों के सर चढकर बोलेगी और नये कलाकार के बाद उसे कामयाबी मिलेगी।

ल्ेकिन आपके पास भी फिल्म का खास अनुभव नही है ?
पिछले 25 सालों से मेरा फिल्मोघोग से पुराना रि श्ता रहा है। मैंने टेली फिल्मस,सीरियल और कार्पोरेट जगत के लिए फिल्मों का निमाण किया है,यह अनुभव ही फिल्म निर्माण काम आया है। मेरा मानना सीरियल हो या फिल्म, सबके निर्माण में एक ही विधा का प्रयोग होता है। बाकी फिल्म देखने के बाद बताना कैसी रही फिल्म।

निर्माता भाटी के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा ?
जयविंदर सिंह भाटी से साथ काम करने का एक अलग ही अनुभव रहा। वे किसी काम में दखल नही देते। उनका कहना है हर आदमी अपने काम में माहिर होता है। इसीलिए कम समय में फिल्म का निर्माण हो सका।

फिल्म में संगीत पर आपका क्या कहना है?
फिल्म का संगीत बेहद खूबसूरत है संगीतकार हर शी रिचर्ड ने अपना हुनर संगीत में पिरोया है। फिल्म सारे गीत विभिन्न चैनलों पर दिखाएं जा रहे है जबकि एक गीत तो जूम चैनल पर नंबर दो की पोजिसन पर है। गीतकार सत्या प्रकाश, दीपक नूर, स्वेता राव हैं और गीतों का स्वर दिया है, सुनिधि चैहान, श्रेया घोषाल, अजीत सिंह, ममता शर्मा, अमिताभ , नारायण, विशाल मिश्रा और याशिता यशपाल।

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