‘पुस्तक इंडियन एडवर्टाइजिंगः लाफ्टर एंड टियर्स’ का विमोचन


प्रेमबाबू शर्मा  

अरूण चैधरी की नई पुस्तक ‘इंडियन एडवर्टाइजिंगः लाफ्टर एंड टियर्स’ का विमोचन क इंडिया इंटरनेश्नल सेंटर, नई दिल्ली में हुआ। इस मौके पर काॅरपोरेट और विज्ञापन जगत की कई जानीमानी हस्तियाॅ मौजूद थी। इस का प्रकाशन नियोगी बुक्स के द्वारा किया गया था।

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इस समारोह में अन्य गणमान्य लोगों के साथ श्री किशोर चक्रबर्ती, वी.पी. कंज्युमर इंसाइट एंड एचएफडी, मैक्कैन, नई दिल्ली; श्री मोहित हीरा सी.ई.ओ तथा प्रकाशक, ओपन पत्रिका तथा श्री मोनोजित लाहिड़ी, विज्ञापन, सिनेमा तथा लोकप्रिय संस्कृति के विख्यात लेखक के साथ श्री रविंदर जुत्शी, उप निदेशक सैम्संग इलैक्ट्रिोनिक प्रा0 लिमिटेड भी मौजूद थे ।

इंडियन एडवर्टाइजिंगः लाफ्टर एंड टियर्स ने 1950 से वर्तमान तक विज्ञापन पेशेवरों के विकास को बताया है।विज्ञापन जगत को एक बहुत ही चमकदमक वाले पेशे के रूप में देखा जाता है जो व्यक्तित्व को तय करता है। यह पुस्तक उन लोगों के बारे में रेखाचित्र बनाती है जिन्होनें इस पेशे को आकार दिया। विज्ञापन में नेतृत्व में एक खास विषेषता है। किसी का भी आप अस्वीकार नहीं कर सकते हैं। इनमें से हर किसी का अपना अलग ही दृष्टिकोण, अलग विचार होता है और वे अपने हर दोस्त, पड़ोसियों को अपनी ही नजर से देखते हैं।

यह एक ऐसा पेशा रहा है जिसने हर समय सत्ता को शाक की ही निगाह से देखा है, फिर चाहे वह कोई भी सरकार रही हो। इंडियन एडर्वटाइजिंग, सामाजिक आर्थिक पहलुओं को बताती है जिन्होनें इस पेशे को आजादी के बाद से ही प्रभावित किया है। यह किताब विज्ञापन जगत को भी दिखाती है कि इतने दर्शकों में क्या हुआ है?
उन पुरूषों तथा महिलाओं के विचार जिन्होनें इस पेशे को एक रूपरंग और आकार दिया है उन्हें इस पुस्तक में उन भाषणों के वक्तव्यों के माध्यम से स्थान दिया गया है जो उन्होंनें काफी समय पहले दी थी। यह पुस्तक एक ऐसे समय से शुरूआत करती है जब कंपनियों को एक पूर्णकाकालिक विज्ञापन एजेंसी की जरूरत होती थी जो कि रचनात्मक, मीडिया तथा पीआर सेवाओं को प्रदान करती थी। यह उस समय में समाप्त होती है जब संस्थाएं पूर्णकालिक संस्थाओं में रूचि नहीं ले रही थी, हर क्षेत्र में अब विषेषज्ञ कंपनियां हैं। तो जाहिर है कि विज्ञापन जगत काफी दूर आ गया है।

लेखक अरूण चैधरी ने विज्ञापन जगत में अपना कैरियर 1970 में क्लेरियन मैक्केन एड्वर्टाइजिंग सविर्सेज के साथ शुरू किया था। फिर उन्होनें ओबीएम और आरके स्वामी में, कोलकाता में कैंपेन कंपनी शुरू करने से पहले काम किया। उन्होनंें 1997 ब्र्रांड नामक मार्केटिंग शोध, ग्रामीण मार्केटिंग तथा रचनात्मक सेवाओं में सिद्धहस्तता वाले एक संस्थान को आरंभ किया। वे कई विश्वविद्यालयों के साथ भी संबंधित रहे हैं जहां पर उन्होनें 1990 के आरंभ से ही विज्ञापन और जनसंपर्क को पढ़ाया है। उनके अन्य कार्यों में सम्मिलित हैं इलैवन न्यु प्लेज (2013), इंडियन एडवर्टाइजिंग 1780 से 1950 (2007), आईटीसी वर्सेज बैट ( 1997) तथा रिवैल्युशन (1992)।

प्रकाशक नियोगी बुक्स के पास सूची में 250 सक्रिय पुस्तकें हैं। उन्हें उच्च गुणवत्ता वाली पुस्तकों के लिए जाना जाता है जिसमें कला से लेकर फोटोग्राफी, दक्षिण एशिया की संस्कृति, सभ्यता के बारे में हैं। इसने पुस्तक मुद्रण में देशी तथा विदेशी हर प्रकार के सम्मानों को हासिल किया है। इस का प्रकाशन ’चाय, द एक्सपीरिएंस आॅफ इंडियन टी’ को फेडरेशन आॅफ इंडियन पब्लिशर्स द्वारा 2014 के दौरान प्रकाशित सर्वश्रेष्ठ आर्ट बुक (अंग्रेजी) के लिए सम्मानित किया गया। एक अन्य नियोगी बुक्स प्रकाशन ’मेघा मीट्स विश्वकर्मा – द स्टोरी आॅफ इंडियन क्राफ्ट’ ने जनरल बुक्स श्रेणी (अंग्रेजी) में प्रथम पुरस्कार जीता था।

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