ठेकेदार श्रम कानूनों को ताक पर रखकर निकाले कर्मचारी बैठे धरने पर


अशोक कुमार निर्भय

आचार्य भिक्षु अस्पताल मोतीनगर में 2005 से काम कर रहे ठेके पर रखे गए 42 हाउस कीपिंग और 59 नर्सिंग अर्दली पदों पर कार्यरत महिलाओं और पुरुष कर्मंचारियों को केवल इस लिए चिकित्सा अधीक्षक की शह पर निकाल दिया है। इन कर्मचारियों ठेकेदारों ने इसलिए निकला की उन्होंने 2005 अस्पताल के शुरू होने से लेकर अभी तक का काटा जाने वाला अपना प्रोविडेंट फंड मांग लिया। प्राप्त जानकारी के अनुसार इन कर्मचारियों ने राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग भारत सरकार को और श्रम आयुक्त को भी गुहार लगायी किन्तु किसी ने इन कर्मचारियों को न्याय दिलाने में मदद नहीं की। निकाले गए कर्मचारी पिछले तीन महीनों से संघर्ष कर रहे है अब उन्होंने अस्पताल के बाहर न्याय की आस में अनिशिचितकलीन धरना दे दिया है। कर्मचारियों की मांग है की जो प्रोविडेंट फंड काटा गया उसको ठेकेदार ने चिकित्सा अधीक्षक डॉ.उमेद सिंह और उपचिकित्सा अधीक्षक डॉ कल्पना, केयरटेकर और फार्मासिस्ट रविन्द्र मेहता,ठेकेदार सुनील कौशिक और गजेन्द्र ने गबन करके खा लिया और प्रोविडेंट फण्ड कार्यालय में जमा नहीं कराया। इस पूरे प्रकरण की किसी स्वतंत्र एजेंसी से जाँच की मांग इन कर्मचारियों ने की है। कर्मचारियों का आरोप है की चिकित्सा अधीक्षक और उनके सहयोगी न केवल ठेकेदारों से मोती कमीशन वसूलते है वंही हर सामान की खरीद पर कंपनियों से मोटी रकम दलाली के रूप में वसूली जाती रही है।

इनके राजनैतिक रसूख के कारण कोई इनके खिलाफ अस्पताल में आवाज नहीं उठता और जो उठता है उसे बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता हैं। कर्मचारियों ने तुरंत नौकरी बहाली की मांंग करते हुए श्रम आयुक्त समेत चिकित्सा अधीक्षक से की है। धरने पर बैठे कर्मचारियों ने आरोप लगते हुए बताया की चिकित्सा अधीक्षक के साथ मैसर्स श्रीबालाजी इंटरप्राइज़िज़,मैसर्स शिवालिक हाउसकीपिंग सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड और मैसर्स प्राइम सर्विसेस प्राइवेट लिमिटेड यहां अस्पताल में कर्मचारियों का दैहिक,आर्थिक ,सामाजिक,मानसिक शोषण कर रही है। श्रम कानूनों की धज्जियाँ उड़ाकर यह कम्पनियाँ डॉ उमेद सिंह की शह पर सरकार और कर्मचारियों की मेहनत की कमाई लूट रही है। इन कंपनियों ने मात्र 5000 प्रतिमाह के हिसाब से नए कर्मचारी भर्ती किये है जबकि न्यूनतम वेतनमान 7000 अधिक है लेकिन यहाँ अस्पताल में एक तो वेतन कम दिया जा रहा है वहीँ पी एफ का पैसा भी यह अस्पताल प्रशासन लूटने में लगा है। कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया की डिप्टी लेबर कमिश्नर अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक और ठेकेदारों के खिलाफ कार्रवाई नहीं कर रहे है रहे है। कर्मचारियों ने बताया की अक्टूबर 2014 से तक वेतन तक इन कर्मचारियों नहीं दिया गया है। इनके खिलाफ पटेल नगर और मंगोल पूरी थाने में धारा 407 /420 के तहत मामला दर्ज़ है।पुलिस भी कोई कार्रवाई नहीं कर रही। भूखमरी की कगार पर पहुँच चुके इन कर्मचारियों ने कहा की स्थानीय नेता भी हमारी कोई मदद नहीं कर रहे जबकि वह भी अस्पताल प्रबंधन से जुड़े है। धरने में बैठे कर्मचारियों ने कहा की कहा की ठेका बगैर टेंडर के बगैर पंजीकरण के चल रही है। उन्होंने कहा की जब तक इनकी मांगे नहीं माने जाने तक धरना जारी रहेगा। इस धरने में अजय, सुनीता, उमा, आशीष, आशा, संदीप, कंचन, सन्नी, प्रीतम सिंह, रानी, रेनू, राजेश, सोनू, पुष्पा, आशा रानी, उषादेवी, ममता, निर्मला, संतोष, पूनम, नीलम, सरोज देवी,मदन गोपाल, मिथलेश, गोमा, राकेश, राजा, अनीता, ब्रह्मपाल, बिजेंद्र, सुभाष, सीता, बबीता, मुन्ना, परवीन, पवन, श्रीमती कंचन, रीटा, सावित्री, साधना, अनुपम, धीरज समेत अनेक कर्मचारी अपनी मांगे मनवाने के लिए कड़कती ठण्ड खुले आसमान नीचे बैठे है।

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