जित देखूं मैं उत सखी रे मेरो सावरिया

मधुरिता

जित देखूं मैं उत सखी रे, मेरो सावरिया मेरो सावरिया । मीरा ने देखियो सखी रे, मीरा ने देखियो सखी , वो तो हो गई बावरिया, वो तो हो गई बावरिया । जित देखूं मैं उत सखी रे मेरो सावरिया ।

राधा ने देखियो सखी रे, राधा ने देखियो सखी रे , सुध बुध खोई रही , वो तो बन गई रे गुजरिया, वो तो बन गई रे गुजरिया , जित देखूं मैं उत सखी रे मेरो सावरिया ।


जिसने भी देखियो सखी रे जिसने भी देखियो सखी रे , वो सांवरी सुरतिया मोहिनी मुरतिया , सांवरी सुरतिया मोहिनी मुरतिया बिसर गयो सारी दुनिया रे, वो तो सारी दुनिया रे , जित देखूं मैं उत सखी रे मेरो सावरिया ।

ऐसो हाल भयो सखी रे, ऐसो हाल भयो सखी रे, कछु न बहवे कछु न सुहावे, कछु न भावे कछु न सुहावे , जित देखूं उत श्याममयी है जित देखूं उत श्याममयी है , जित देखूं मैं उत सखी रे मेरो सावरिया ।

ऐसी लगन लगी मोहन सो ऐसी लगन लगी मोहन सो, भूल गई सारा आपा रे, मैं तो भूल गई सारा आपा रे , जित देखूं मैं उत सखी रे मेरो सावरिया ।

Leave a Reply