एलबम निकालने को जोखिम भरा नहीं मानता : सौरभ

चन्द्रकांत शर्मा 

संगीत की दुनिया में बिना प्रशिक्षण लिए आगे बढ़ना और खुद का एलबम निकालना न केवल जोखिम भरा शौक है, बल्कि कई बार यह घातक भी हो सकता है। लेकिन गायक सौरभ ढींगरा ऐसे अलबेले व हरफनमौला कलाकार हैं कि उन्होंने न केवल अपना एलबम निकाला, बल्कि पारंपरिक भारतीय संगीत का प्रशिक्षण लिए बगैर सुर और ताल में सामंजस्य भी बिठा लिया है। एक बिजनेसमैन के घर में इस तरह के हुनर का उभरना उनके प्रशंसकों को और चौंका भी देता है। लेकिन सौरभ ढींगरा ने यह बात सच कर दिखाई है कि अगर रास्ता सही हो, तो मुकाम मिलना असंभव नहीं होता। अब सौरभ संगीत की दुनिया में अपने नए एलबम एसडी के साथ मौजूद हैं। लेकिन इससे पहले रीयल लाइफ में वह एक एक्टर, कंपोजर, परफाॅर्मर और सामाजिक कार्यकर्ता की भूमिकाएं निभा चुके हैं। प्रस्तुत है उनसे की गई बातचीत के अंशः


सबसे पहले अपनी नई प्रस्तुति के बारे में बताएं।
मेरी नई प्रस्तुति एक एलबम है जिसका नाम है एसडी। यह एक सिंगल ट्रैक का एलबम है, जो एक कहानी पर बेस्ड है। पहले वाॅल्यूम में पिया हो सांग है, जिसे टी-सीरीज के प्रोडक्शन में निकाला गया है। इसकी सफलता को देखते हुए इसके अगले दो सीरीज और निकालूंगा। इससे यह भी पता चलेगा कि मैं किस लेवल पर गा सकता हूं।

आज संगीत की दुनिया में मुकाम हासिल करना काफी कठिन है। आपने ऐसा मुश्किल सपना क्यों देखा?
संगीत मेरा पैशन है। बल्कि मैं जो भी काम करता हूं, डूबकर करना पसंद करता हूं। इसलिए मुझे अपने हर काम का परिणाम जरूर मिलता है। बात करूं संगीत की, तो आज इसमें आगे बढ़ना मुश्किल जरूर है, लेकिन सफल होना नामुमकिन कतई नहीं है। मुझे तो बचपन से शौक है गाने का, खासकर माइक में कुछ बोलने का, कुछ गुनगुनाने का। ऐसे में माता-पिता का साथ मिला, तो मेरे हौंसले को पंख लग गए और मैंने इसमें काम करना शुरू कर दिया। स्कूल के दिनों में तो जहां से माइक पर प्रेयर होती थी, वहां पहुंचने का प्रयास किया, फिर जब वहां सफल हो गया, तो लगा कि और आगे जा सकता हूं। बस तब से मेरा म्यूजिक को लेकर प्यार और बढ़ गया।

आज एलबम निकालना जोखिम भरा काम समझा जाता है। फिर आपने ये जोखिम क्यों लिया?
यह सच है कि एलबम निकालना खुद को डुबाने जैसा काम हो गया है। लेकिन इससे भी बड़ा सच तो यह है कि बाॅलीवुड हो या म्यूजिक की दुनिया, आज भी अच्छा सिंगर एलबम से ही निकल रहा है, जिसकी सबसे बड़ी बानगी हनी सिंह हैं। ऐसे में मैं इस काम को जोखिम भरा नहीं मानता हूं। हां लेकिन कद्रदान कम हो गए हैं, यह जरूर कहा जा सकता है।

और गानों के मशीनों के बढ़ते प्रयोग के बारे में आप क्या कहेंगे?
मैं तो बस इतनी कोशिश करता हूं कि मेरे एलबम में मेरी आवाज जेनुइन रहे। फील अच्छी आए और गानों के शब्दों पर मेरी आवाज सही ढंग से उतरे। फिर रही बात मशीनों की, तो इसका ज्यादा प्रयोग अपनी आवाज को दबाने के लिए किया जाता है, जो मुझे पसंद नहीं है। मेरी कोशिश यही रहती है कि अपने फैन्स को मैं ओरजीनल ही दूं।

गानों के अलावा आप और क्या-क्या काम कर चुके हैं?
सबसे पहले तो मैं एक बिजनसेमैन हूं और एसडी के नाम से ब्रांड है हमारा। जिसे मेरे पापा देखते हैं। इसके बाद गायिकी, गाने लिखना, परफाॅर्म करना और सामाजिक कार्य भी करता रहता हूं। मेरी खुद की एनजीओ है, जिसका नाम है वी फाॅर पीपल। यह संस्था कई मुद्दों पर काम करती है। हमने महिला सुरक्षा के लिए शरम नाम से प्रोजेक्ट भी चला रखा है। इसके अलावा टीवी शो कितनी मुहब्बत है कर चुका हूं और एक्टिंग के दूसरे प्रोजेक्ट्स भी हैं।

आप कहां के रहने वाले हैं और पढ़ाई कहां तक की है?
मैं दिल्ली के तिलक नगर का रहने वाला हूं और वहीं के डीएवी सेंट्रल पब्लिक स्कूल में नर्सरी से बारहवीं तक पढ़ाई की है। उसके बाद गुड़गांव इंजीनियरिंग काॅलेज से मैकेनिकल में इंजीनियरिंग की। इसके साथ-साथ डांस एकेडमी चलाता था और शुरूआत में पापा के साथ गारमेंट के बिजनेस में भी जुड़ चुका हूं।

आपके एलबम के बारे में कोई अच्छी बात बताएं।
हां जरूर। एक तो एलबम का गाना बड़ा प्यारा है और लोगों को अच्छा भी लग रहा है। तभी तो टी-सीरीज के यूट्यूब पर केवल 8 दिनों में इसे 85,0000 लाइक्स मिल गए थे। इससे मेरा हौसला भी बढ़ा है।

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