‘समानता’ की पक्षधर हैं विद्याबालन

प्रेमबाबू शर्मा

मनोरंजन जगत में कुछ ऐसे चुनिंदा कलाकार है जो किरदारों को परिभाषित नहीं, बल्कि चरित्र को पूरी संजीदगी से जीते हुए उनको एक नयी परिभाषा दे देतें हैं और विद्या बालन उनमे से एक हैं।वह चमत्कारिक रूप से एक लंबे समय से निरंतर यही विधा अपनाई हुई है।उन्होंने जो भी किरदार निभाया है वो सदा के लिए अमर हो गया है और शायद इसीलिये विद्या के व्यक्तित्व में एक जादुई अनूठी छाप देखते ही बनती है। चाहे उनका फ़िल्म ‘कहानी’ का मार्मिक किरदार हो या फ़िल्म ‘डर्टी पिक्चर’ में सफलता के पीछे दीवानी सिल्क स्मिता का चरित्र, प्रतिभावान विद्या ने हमेशा से ही सामाजिक अतिक्रमण के खिलाफ आवाज़ उठायी है।

एक अत्यंत प्रभावशाली आभावान् इस अभिनेत्री ने न केवल फिल्मों में वरन् वास्तविक ज़िन्दगी में भी समानता ले लिए बहुत कार्य किये हैं।

वर्ष 2015 उनके लिए अत्यंत महत्त्वपूर्ण है क्योंकि इस वर्ष वह फ़िल्म जगत में अपने सफल कैरियर के 10 साल पूरे कर रहीं हैं। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि वो निरंतर भारतीय सिनेमा को पूरी दुनिया में फ़ैलाने के लिए खुद को सदैव् लगाये रखेंगी।

2012 में शुरू हुए इंडियन फ़िल्म फेस्टिवल ऑफ़ मेलबोर्न के मुख्य चेहरे के रूप में देखे जाने वाली विद्या बालन लगातार चौथे वर्ष भी इस आयोजन का मुख्य आकर्षण होंगी। 14 से 27 अगस्त 2015 तक ऑस्ट्रेलिया के मेलबॉर्न शहर में होने वाले इस फेस्टिवल में भारतीय सिनेमा को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर मनाया जा रहा है।
इस वर्ष इस फेस्टिवल की थीम ‘समानता’ है जिसे खुद विद्या बालन ने ही सुझाया है।यह फेस्टिवल भावी फिल्मकारों के लिए एक ऐसा अवसर है जहाँ वो अपनी प्रतिभा का खुलकर प्रदर्शन कर सकते है।

इस बारे में विद्या का कहना है कि आज के समय में स्वतंत्र और समान दुनिया की परिकल्पना से ज़्यादा ज़रूरी शायद ही कुछ और हो सकता है और समानता एक ऐसा विषय है जिसे लेकर वह हमेशा से ही अत्यधिक उत्साही रहीं हैं। उन्हें यह विश्वास है कि कला और फिल्में, परिस्थितियों, द्रष्टिकोणों और मानसिकताओं को बदलने का वजूद रखती हैं और वह बेहद खुश हैं कि इस तरह की शानदार फिल्में और कार्यक्रम इस आयोजन में प्रदर्शित होने जा रहे हैं जिसके माध्यम से उन सभी विभिन्नताओं का खुले दिल से स्वागत किया जा सकता है, जो कहीं न कहीं हम सभी को परिभाषित करती है।

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