अवहेलना से पनप रहे चाइल्ड क्राइम की सजीव तस्वीर ‘गोल-गैंग ऑफ लिटिलस’


प्रेमबाबू शर्मा

आज समूचे विश्व में आम जन समान्य लोनली यानि अकेलापन और इग्नोरेंस यानि अवहेलना जैसी बीमारियों का शिकार है,जो समय रहते इनका सोल्युशन ढूंढ लेते हैं वो अपने परिवार या अपने प्रियजनों को अपने से दूर नहीं जाने देते ,अपनात्व देकर उनके ह्रदय में समाये.पी.एन ए.एंटरटेनमेंट प्रा.लिमिटेड प्रस्तुत निर्माता दीपक जैन और निर्देशक वैभव विकास कृत फिल्म ‘गोल- गैंस ऑफ लिटिल’इसी ज्वलंत प्रॉब्लम पर पूरी.मुस्तैदी के साथ फोकस कर .रही है।

अवि(अभिषेक जैन)सत्या(क्र्रिश) बल्ली ( विनय)बेनजीर(रौशनी वालिया ))देहरादून के जाने माने दून इंटरनेशनल स्कूल में पढ़ते हैं,तीनों दोस्तों में कमाल की टयूनिंग है और तीनों ही बहुत प्रतिभाशाली हैं.शायद उनकी इन्ही खूबियों की वजह से इस तिकड़ी को ‘गैंग ऑफ मल्टी टॅलेंट्स’ कहा जाता है.पूरे स्कूल में इन्हें असाधारण तौर पर लिया जाता है.अवि के पिता गौतम (राहुल सिंह)बैंक में जनरल मैनेजर हैं और माँ (गीतांजलि)घरेलू महिला है,मगर दोनों के पास अपने बच्चे के लिए वक्त नहीं है,अवि क्या करता है? उसकी पढ़ाई कैसी चल. रही है ? उसकी सोसायटी कैसी है? भविष्य को लेकर उसकी अपनी क्या प्लांलिंग है? इन अहम् मुद्दों को लेकर उसके माता -पिता को कोई सरोकार नहीं है और ना ही उनके पास अवि के लिए समय है.सत्या विलक्षण बुद्धि का मालिक है और हरफन मौला भी,हर समय कुछ नया सोचना और कर गुजरना उसकी प्रवृति है,बल्ली का पूरा का पूरा दिमाग इंजीनियरिंग वाला है.इसीलिए कबाड़ी की दुकानों में वह हर समय .कुछ ना कुछ ढूंढता रहता है,बेनजीर लोअर मिडिल क्लास की लड़की है वह अपनी बहनों और मां के साथ रहती है पर सारा परिवार सौतेले भाइयों पर निर्भर है,अवि साइंस का स्टूडेंट है, फिजिक्स में उसकी मास्टरी है,सत्या कैमेस्ट्री में तेज तर्रार है.ये चारों मिलकर एक ऐसे उपकरण की ईजाद करना चाहते थे,जो लगातार बैंकों में हो रही सीरियल चोरी को रोक सके मगर बिना पैसों के यह संभव नहीं है इसलिए पॉकेट मनी और अनाथ गरीब बच्चों को टयूशन देकर जो पैसा अर्न होता है उससे ,सत्या, बल्ली और बेनजीर एक ऐसा उपकरण बनाते हैं जिससे बैंकों की सीरियल चोरी को रोक जा सके.उपकरण.की ट्रॉयल अवि के कहने पर उसी बैंक में की जाती है,जिसमें उसके पिता जनरल मैनेजर है.उपकरण के सही रिजल्ट आने से पहले बैंक में चोरी हो जाती है.पुलिस के इंवेस्टिकेशन पर उन्हें कुछ सबूत ऐसे हाथ लगते हैं कि चोरी का इल्जाम अवि,सत्य और बल्ली की गैंग्स पर आजाता है और उन्हें जेल की सीखचों में बंद कर दिया जाता है जबकि श्लिटिल गैंग्सश्बेकसूर और इनोसेंट थी.क्या पुलिस असली चोरों की गैंग्स को पकड़ सकी ?जब अवि के पिता को अपने बेटे की अप्रत्याशित हरकत का पता चला तो उनका रुख क्या रहा?आखिर वो कौन से करण रहे जिनकी वजह से स्कूल के प्रिसिपल (गोविन्द नामदेव)और स्टेट के मुख्यमंत्री बच्चों को दोषी नहीं मान पाते और हस्तक्षेप करते हैं,? उनका उठाया हुआ कदम क्या कारगर साबित होता है? प्रतिभाशाली. बच्चों को जब सरकार पुरस्कृत करती हैं तब उनके पैरेंट्स को क्या अपनी गलतियों का एहसास होता है ? इन्ही गंभीर गुथियों को सिलसिलेवार सुलझाएगी चाइल्ड क्राइम और पैरेंट्स की और से की जारही बच्चों की अवेहलना पर सटीक तस्वीर खींची है-‘गोल-गैंग्स ऑफ लिटिल..’में.

युवा निर्देशक वैभव विकास ने बताया-यूँ तो मैंने अपने कैरियर में कई फिल्में.की हैं,मगर ष्गोल -गैंग्स ऑफ लिटिलष्मेरे लिए .बहुत खास है इसमें मैंने सायक्लोजिकल ढंग से एक गहरी समस्या को उठाने .का प्रयास किया है.मझे खुशी है मैं स्क्रिप्ट के अनुसार अपने काम को अंजाम दे पाया.मुझे पूरा विश्वास है कि यह फिल्म हरवर्ग को पसंद आएगी.

अभिषेक जैन, रौशनी वालिया,दीपराज राणा, विजु खोटे, शहजाद खान,राहुल सिंह,माही भारद्वाज, बलविंदर सिंह,करन और गोविन्द नामदेव. निर्माता दीपक जैन, निर्देशक वैभव विकास,कथा -ए. खरे,पटकथा-ए. खरे और वैभव विकास, संगीत -सूरज..गीत – मौला

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