तन-मन को बनाए निरोगी ‘नारायण रेकी’

वर्तमान में पूरी दुनियां में अनेकों चिकित्सा पद्धतियां विकसित हैं। इनमें मन,शरीर एवं आत्मा की शुद्धि कर उसे निरोगी बनाने वाली चिकित्सा ‘नारायण रेकी’ के प्रति लोगों का रुझान दिनों-दिन बढ़ता ही जा रहा है। इस पद्धति में शरीर में स्थित चक्रों की शुद्धि कर संतुलन बनाते हुए अबाध्य गति से प्राण शक्ति प्रदान किया जाता है। नारायण रेकी’ की संस्थापिका श्रीमती राजेश्वरी जी मोदी ‘राजदीदी’ के मार्गदर्शन में इस पद्धति से बड़ी संख्या में लोग न सिर्फ स्वयं स्वास्थ्य लाभ उठा रहे हैं, बल्कि दूसरों को भी निरोगी बनाने में योगदान दे रहे हैं। गत 05 जनवरी को पश्चिम विहार स्थित ‘अप्सरा बैंक्वेट’ में आयोजित शिविर के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों ने स्वास्थ्य लाभ उठाया।

शिविर के दौरान नारायण रेकी’ के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उपस्थित लोगों को इसकी बारीकियों से भी अवगत कराया गया। शिविर में प्रमुख रूप से ‘राजदीदी’, अंजू टोडी, अंजू बंसल, रेनू विज एवं अलका बंसल का मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। इन्होने बताया कि ‘रेकी’ जापानी भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ है ब्रह्माण्ड की सकारात्मक ऊर्जा (ढृढ़ निश्चयाशक्ति)।‘रेकी’ प्राण शक्ति है, आध्यात्मिक शक्ति है जो सभी प्राणियों में प्रवाहित हो रही है। मान्यता है कि इस संजीवनी/प्राणशक्ति का जन्म वैदिक काल में हुआ, पर यह काल के गर्त में समा गयी। गौतम बुद्ध ने भी इस प्राणशक्ति का उपयोग हीलिंग (उपचार) के लिए किया था। उन्नीसवीं सदी में हजारों वर्षों बाद जापान के डॉ. मिकाओ उसुई ने इसे पुनः खोज निकाला।
एक पर्वत पर एकांत में 21 दिन तक साधना करने के बाद डॉ. मिकाओ उसुई को रेकी के प्रतीकों का वरदान प्राप्त हुआ। जिनका उपयोग आज पूरे विश्व में ‘रेकी’ उपचार के लिए किया जा रहा है। नारायण रेकी’ आध्यात्मिक एवं पारम्परिक रेकी प्रतीकों का बेजोड़ मेल है। रेकी के इस प्रकार में उसुई रेकी के प्रतीकों का मंत्र जाप के साथ अनमोल संयोग करते है। जिसके परिणाम चमत्कारिक हैं एवं शीघ्र परिणाम मिलते हैं। नारायण की कृपा से जो प्रतीक समय-समय पर ‘राजदीदी’ को आशिर्वाद रूप में मिले हैं, वे भी नारायण रेकी’ का अभिन्न अंग है। नारायण रेकी’ स्वयं के भीतर बैठे नारायण (परमशक्ति) को जानने लिए बढ़ाया गया एक सक्रिय कदम है।
‘नारायण रेकी’ सत्संग परिवार गोकुलधाम (गोरेगांव) स्थित राजस्थानी मंडल सभागृह में सोमवार, मंगलवार, गुरूवार एवं शुक्रवार को मानसिक एवं शारीरिक रूप से बीमार व्यक्तियों का सामूहिक उपचार मंत्रों एवं संकेतों द्वारा किया जाता है। इन सत्रों का लाभ उठाने के लिए लोग बड़ी संख्या में आते हैं। बुधवार के सत्र में प्रवाहित ऊर्जा और उसके परिणाम चमत्कारिक हैं। लोग दूर-दूर से अपने लक्ष्यों की पूर्ति जैसे शादी, संतान की चाह, बुरी लत एवं मानसिक परेशानियों से छुटकारा, व्यापार, पढ़ाई में सफलता तथा अन्य उद्देश्यों के लिए आशीर्वाद पाते हैं, तथा अपने जीवन में चमत्कारों का अनुभव करते हैं। यह चमत्कारिक सत्र बुधवार के दिन कृष्ण्वाटिका मंदिर (गोकुलधाम) के योग हाल में सुबह 11 बजे से 01 बजे तक संचालित किया जाता है। ‘नारायण रेकी’ की संस्थापिका बी. कॉम स्नातक श्रीमती राजेश्वरी जी मोदी उसुई रेकी एवं करुणा रेकी की ग्रैंड मास्टर हैं।

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