दिल्ली के किसान मुआवजे के इंतजार में, बर्बाद फसल की कटाई शुरू


(द्वारकापरिचय न्यूज़ डेस्क)

दिल्ली में कई दिन पहले हुई बेमौसम बरसात और ओलों से बर्बाद हुई फसल की एवज में मुआवजे का ऐलान नहीं होने से किसान दुखी हैं। दिल्ली देहात के किसानों ने अपने खेतों में गेहूं की कटाई शुरू कर दी है। कुछ दिन पहले सरसों की कटाई की गई थी लेकिन ओलों से बर्बाद फसल नुकसान का सौदा साबित हुई। गेहूं की फसल भी ओलों की मार से बुरी तरह प्रभावित है। यूनिटी फाॅर डवलपमेंट के अध्यक्ष आनंद राणा ने मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल ये आग्रह किया है कि तुरंत प्रति एकड़ 25 हजार रूपये का मुआवजा देने की घोषणा दिल्ली सरकार करे।

आनंद राणा ने देहात के किसानों को हुए नुकसान का आकलन करते हुए कहा है कि सरसों की फसल प्रति एकड़ डेढ़ से 2 क्विंटल निकल रही है। यानि किसान को फसल बेचने पर अधिकतम 6000 रूपये मिल रहे हैं जबकि अगर ओलों की मार नहीं पड़ी होती तो किसान को सरसों की फसल से प्रति एकड़ 30 से 35 हजार रूपये मिलते। दुखद पहलू यह है कि सरसों की कटाई और निकलवाई का खर्च जोड़ दें तो वह भी करीब 6000 रूपये प्रति एकड़ बनता है। सीधा मतलब है कि किसान को कोई फायदा नहीं हुआ है।

गेहूं की फसल पर तो और भी बुरी मार पड़ी है। खेतों में गेहूं की फसल बुरी तरह पड़ी हुई है। कटाई और निकलवाई भी किसान को जेब से देनी पड़ेगी। दिल्ली देहात के अनुभवी किसानों का कहना है कि ओलों से बर्बाद हुई फसल मुश्किल से प्रति एकड़ 3 से 5 क्विंटल निकलेगी। यानि 1500 रूपये प्रति क्विंटल के बाजार भाव के हिसाब से 4500 से 7500 रूपये में गेहूं मंडी में बिकेगा। दूसरी तरफ किसान को गेहूं की फसल कटवाने में ही मजदूरों को 7 से 8 हजार रूपये प्रति एकड़ देने पड़ रहे हैं। बाद में थे्रसर से फसल निकलवाने का खर्च करीब 2 हजार रूपये अलग से करना पडेगा। मतलब साफ है कि किसान को फायदा तो दूर जेब से खर्च करना पड़ेगा।
जिन किसानों की प्याज, पालक और अन्य सब्जियों की फसल ओलों से बर्बाद हुई है वे भी खून के आंसू रो रहे हैं।

यूनिटी फाॅर डवलपमेंट के अध्यक्ष आनंद राणा ने मुख्यमंत्री श्री अरविंद केजरीवाल से मांग की है कि दिल्ली देहात के हजारों किसानों को तुरंत मुआवजा दिया जाए। जिन किसानों ने खेती के लिए बैंक से कर्ज लिया था उनको भी राहत दिलाने की पहल दिल्ली सरकार करे।

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