कंक्रीट जंगले के बीच एक वरदान – DDA और सामाजिक कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा

1. पार्क की सफाई की कोई गतिविधि यहाँ allowed नहीं है।
2. ग्रिल लगा संरक्षित किया गया है।
3. 40 प्रकार के पक्षी साल के अलग अलग समय में देखे गए हैं।
4. मोरों की संख्या पिछले 2 सालों में दुगनी हो गयी है।
5. सौ साल से भी अधिक पुराने बरगद और पीपल के पेड़ हैं।
6. चिड़ियों को आश्रय देने के लिए देसी कीकर (बबूल) के पेड़ वे लगाये गए हैं।

जापान की एक स्टडी के मुताबिक यदि कोई आदमी ऐसे जंगल में रोज़ आधा घंटा बिताये तो उसे कभी डिप्रेशन या ब्लड प्रेशर या अग्रेस्सन की दिक्कत नहीं होगी| उसी तरह का जंगल बनाने की यह मुहीम है काफी हद तक काम पूरा हो चूका है| 
DDA के चीफ इंजिनियर श्री डी पी सिंह का ख़ास सहयोग रहा है| उन्होंने पिछले साल और इस साल भी हमारे कहने पर सभी काम करवाए है out of way जाकर भी| समय समय पर वो खुद आते हैं और हमारी मदद के लिए कर्मचारियों को आदेश देके जाते हैं| इसमें DDA के सभी अफसरों का रोल है और मैं आपसे गुज़ारिश करूँगा के स्टोरी करने से पहले आप समय निकाल कर यहाँ आयें और आधा घंटा यहाँ रहे तभी असली मकसद समझ सकेंगे| इसमें बहुत से लोगों का सहयोग रहा है, उन सबसे बात भी हो जाएंगी| यह बड़ी स्टोरी बनेगी| आपके इस खबर को सही जगह देने से हमारे काम में मदद मिलेगी और हमारी टीम को प्रोत्साहन मिलेगा !

Citizen’s reporter
Shobhit Chauhan

chauhanshobhit24@gmail.com

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