​​विभिन्न किरदारों में एक्सपेरिमेंट करना अच्छा लगता है- जया भट्टाचार्य

प्रेमबाबू शर्मा

छोटे परदे का जाना-पहचाना नाम है जया भट्टाचार्य । जया अब तक कई शोज कर चुके हैं, जिनमें उन्होंने हमेशा अलग-अलग किरदार ही निभाये हैं।

टीवी शो,क्योंकि सास भी कभी बहू थी, बनूं मैं तेरी दुल्हन, पलछिन, कसम से, केसर, करम अपना अपना, क्योंकि सास भी कभी बहू थी, बनूं मैं तेरी दुल्हन, पलछिन, कसम से, केसर, करम अपना अपना आदि मिलाकर करीब तीस से ज्यादा धारावाहिक और एक दर्जन फिल्मों में अपने अभिनय के जौहर दिखा चुकी है।


आजकल जय एंड टीवी के शो गंगा व कलर शो ‘थपकी प्यार की’ के अलावा डी डी के किसान चैनल पर प्रसारित धारावाहिक ‘‘शिक्षा’ से जुड़ी हैं। इन सीरियल में उनकी भूमिका तथा उनके करियर से जुड़े सवालों के साथ बातचीत हुई प्रेमबाबू शर्मा से।

करीब तीन दर्जन शोज में काम करने के बाद भी आप क्योंकि सास.. के किरदार पायल से अभी तक पीछा नहीं छुड़ा पाई?
कोई भूमिका ऐसी होती है जिसके बारे में आपको पहले से पता नहीं होता कि उसे दर्शक किस तरह लेंगे। पायल एक निगेटिव रोल था जिसके लिये मुझे उन दिनों सैकड़ों गालियों का सामना करना पड़ा लेकिन वही उस रोल की सफलता थी।

निगेटिव रोल निभाने से पहले आपके दिमाग में क्या था?
दरअसल यह एक पहले बहुत छोटी सी भूमिका थी लेकिन बाद में इस विस्तार दे दिया गया। शुरू में मैंने जरा भी नहीं सोचा था कि यह रोल घर घर पहुंच जाएगा। जहां तक रोल की नकारात्मकता की बात की जाये तो इसे निभाते हुये मेरी डांस की ट्रेनिंग काफी काम आई। क्योंकि बात करते हुये भवें मटकाना या कमर मटकाना यह सब मैं इसलिये कर पाई क्योंकि मैं डांस जानती थी। बाद में पायल का रोल इतना टाइप कास्ट हो गया कि सालों मुझे उसी तरह के रोल ऑफर होते रहे। उन दिनों मैंने करीब चालीस सीरियल्स नकारे थे।

किसी रोल को निभाने से पहले घर से आप कितनी तैयारी करके सेट पर जाती हैं?
जरा भी नहीं क्योंकि मैं मैंर्टड एक्टर नहीं हूं और न ही मैंने एक्टिंग कहीं से सीखी है। मैं सेट पर बिल्कुल न्यूट्रल होकर जाती हूं, वहां जो मुझे करने के लिये कहा जाता है वही मैं करती हूं। एक बार मैंने ट्राई करने की कोशिश की थी। वह एक फिल्म थी जिसमें काफी दिग्गज अभिनेता थे जिन्हें सीन में मुझे डांटना था। मैं मुंबई से लखनऊ तक उस सीन के सवांद रटते हुये गई थी लेकिन सीन मैं मैंने इतनी बुरी अभिव्यक्ति दी कि बाद में मैं घर भाग गई। उसके बाद से मैं हर चीज सेट पर ही करती हूं। 

मौजूदा धारावाहिक ‘‘शिक्षा’ के बारे में क्या कहना है?
इस सीरियल का पूरा नाम ‘‘शिक्षा-एक मजबूत आधारशिला’ है। सिद्धार्थ नागर ने यह कॉन्सेप्ट महज दो दिन में लिखा और एग्जीक्यूट किया। दरअसल किसान चैनल पर यह सब्जेक्ट पांच दिन के भीतर जमा करना था। हम सब बैठकर सोच रहे थे, तीन दिन तक किसी के दिमाग में कुछ नहीं आया लेकिन चैथे दिन सिद्धार्थ के दिमाग में आया उन्होंने हमें सुनाया और फिर इसे लिखकर जमा कर दिया।
शो का कॉन्सेप्ट क्या है?
इसका मेन कॉन्सेप्ट यह है कि शिक्षा का तात्पर्य क ख ग से नहीं है बल्कि इसका तात्पर्य नॉलेज से है। आपको जितनी नॉलेज होगी जीवन में आप उतना ही आगे बढ़ेंगे। हम बहुत सारी चीजें इसलिये भी नहीं कर पाते क्योंकि हमें उसकी नॉलेज नहीं होती। इस शो के तहत एक गांव को वह सारी बातें बताई जा रही हैं वह सारी शिक्षा दी जा रही है जिसकी उनके जीवन में जरूरत है। फिल्म का मुख्य किरदार एक लड़की सारिका ढिल्लन है जो शहर जाकर एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर फिर वापस गांव आती है और वह यहां आकर न सिर्फ गांव वालों को वहां के जमींदार के कर्ज से मुक्ति दिलवाती है बल्कि उन्हें खेती करने के आधुनिक तरीकों से भी परिचित करवाती है।

आप शो में कौन सी भूमिका निभा रही हैं?
मैं सारिका की मां बनी हूं जो हमेशा उसके साथ रहते हुये हर अच्छे काम में उसका साथ देती है।
इसके अलावा आपका एंड टीवी के शो गंगा व कलर शो ‘थपकी प्यार की’ में भी आप काम कर रही है ?
जी हाॅ। इन दिनों कलर टीवी शो ‘थपकी प्यार की’में वसुधंरा नामक किरदार को निभा रही हॅू जबकि गंगा में सुधा का रोल है,यह शो विधवाओं के जीवन पर आधारित है।

सुना है आपकी एक्टिंग के अलावा प्रोडक्शन में भी दिलचस्पी है?
एक हद तक, मैं पिछले सात साल से सिद्धार्थ नागर जिन्हें मैं अपना भाई मानती हूं के साथ उनके सीरियल्स के अलावा प्रोडक्शन में भी उनका हाथ बंटाती हूं। इससे मुझे इतना पता चला कि आज मैं स्पॉट ब्वॉय से एडी तक सबकी रिस्पेट करती हूं।

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