‘खिड़की अलग तरह का शो – उमेश शुक्ला

प्रेमबाबू शर्मा

फिल्म निर्देशक उमेश शुक्ला, जोकि अपनी फिल्म ‘ओह माय गॉड’ से चर्चित हुये हैं, इसके अलावा ढूढते रह जाओगें,आल इज वेल,फुल एंढ फाइनल जैसी फिल्मों के बाद वर्तमान में आगामी शो खिड़की को लेकर काफी व्यस्त नजर आ रहे हैं। इस शो का प्रसारण सब टीवी पर किया जायेगा और इसका निर्माण उमेश, जेडी मजेठिया और आतिश कपाड़िया द्वारा किया गया है।

यह साप्ताहिक एपिसोडिक सीरीज दर्शकों द्वारा भेजी गई असली जिंदगी की मजेदार कहानियों से प्रेरित है। एक साक्षात्कार में शुक्ला ने हमारे साथ अपना अनुभव साझा किया प्रस्तुत है प्रेमबाबू शर्मा से मुलाकात के अंशः

क्या आपको अपने शो के लिए दर्शकों से कई कहानियां मिली हैं?
हमने कभी उम्मीद नहीं की थी कि हमें महज दो महीनों में लोगों से 7,600 कहानियां मिलेंगी। हमारे पास अच्छे लेखकों की एक टीम है जिन्होंने कहानियों का चुनाव किया। इस शो की परिकल्पना तैयार करने का सबसे अच्छी बात यह है कि यह सभी असली जिंदगी की कहानियां हैं और आप इस निष्कर्ष पर पहुंचेंगे कि ‘सच्चाई फिक्शन की तुलना में अनजान होती है।‘ सभी के लिखने का अंदाज एकदम निराला है।

इनमें से कितनी कहानियों को एपिसोड में बदलने में सक्षम हुये हैं?
जब जेडी मजेठिया ने मुझसे कुछ अलग हटकर करने के लिए संपर्क किया, तो मुझे लगा कि वह जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं। हमें कई ऐसी कहानियां मिली जिन्होंने हमारे दिल को छुआ और हमें हंसने पर मजबूर किया। कुछ ऐसी चैंकाने वाली कहानियां भी थीं जिन्हें हमने एपिसोड में तब्दील किया और अब वे काफी हास्यप्रद लगती हैं।

क्या आपको प्राप्त कंटेंट को शाॅर्टलिस्ट करने में किसी मुश्किल का सामना करना पड़ा?
जब कोई अपनी जिंदगी की कहानी भेजता है, तो यह महत्वपूर्ण हो जाता है कि उसे ऐसे नहीं देखना चाहिये जैसे आप उसके अनुभव का मजाक उड़ा रहे हों। लेकिन हम अपने लेखकों की वजह से यह अंतर भरने में सफल रहे। कुछ लोगों ने महज 1-2 लाइनों में अपनी कहानियां भेजी, और ऐसी कहानी को 2-3 एपिसोड में परिवर्तित करना कठिन था। उदाहरण के लिए, रेगुलर शो में हर बार एक ही सेटिंग होती है लेकिन हर नई कहानी के साथ, सेटिंग में बदलाव करना पड़ता है।


आप एक अभिनेता भी है?
जी हाॅ,जबान संभाल के ,किस किस की किस्मत में भी काम किया है। इसलिए मैं कहानी और कलाकारों के साथ न्याय करने का प्रयास करता हॅू।

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