दर्शकों का भायेगी ‘एक-तेरा-साथ’

-प्रेमबाबू शर्मा‘

एक दौर था जब हाॅरर फिल्मों के निर्माण में सिर्फ रामसे ब्रादर्स का ही बोलबाला था,लेकिन कहानी के अभाव के चलते उसी राह पर कई निर्माताओं ने कदम रखा। ओर वे फिल्में सफल भी रही। बॉक्स-ऑफिस पर इस साल हॉरर फिल्मों का हाल कुछ ज्यादा अच्छा नहीं रहा। वही घिसीपिटी कहानी, खौफ से ज्यादा हंसी पैदा करने वाले भूत-चुड़ैलें और अपनी कर्कश आवाज से दर्शकों को अपने कान बंद कर लेने के लिए मजबूर कर देने वाले काले-काले कौए, आजकल हर भूतिया फिल्म बनाने वाला फिल्मकार इन्ही बेस्वाद मसालों को लेकर एक बासी और बोरियत भरी फिल्म दर्शकों के सामने थाली में सजा कर रख देता है। फिल्म बनाते वक्त हमारे फिल्मकार शायद भूल जाते हैं कि अगर दर्शकों को फिल्म पसंद नहीं आयी तो वे सिनेमाघरों से अपने आप को ऐसे दूर रखते हैं जैसे कि हम और आप अपने आप को भूतिया बंगले से लेकिन निर्देशक अरशद सिद्दीकी की फिल्म ‘1-13-7 एक तेरा साथ’ उस लीक से हटकर एक अच्छी फिल्म बनी है। वैसे भी उनके पास कई हिट फिल्मों का अनुभव है।

कहानी
देश की आजादी के बाद राजस्थान के अधिकतर राजाओं-महाराजाओं ने अपने महलों की सही ढंग से देखभाल न कर पाने की वजह से उन्हें या तो बेच दिया या फिर उनको हेरिटेज होटलों में तब्दील कर दिया, और उसी के एक भाग में खुद रहने लगे। फिल्म की कहानी एक ऐसे राजकुमार की है जिसने ऐसा कुछ नहीं किया।

शांत, शालीन लेकिन तन्हा, कुंवर आदित्य प्रताप सिंह (शरद मल्होत्रा) की सारी दुनिया उसका वह पुराना दरबार महल ही है जहां कभी उसका हंसता खेलता परिवार बसता था। बरसों पहले राजकुमार आदित्य को कस्तूरी (ऋतु दुदानी) नाम की एक राजकुमारी से प्यार हो जाता है। जल्द ही दोनों शादी भी कर लेते हैं, लेकिन शादी के कुछ दिनों बाद ही कस्तूरी की एक हादसे में मौत हो जाती है, और उसकी आत्मा उसी महल में रहने लगती है।
कुछ दिनों बाद आदित्य के कॉलेज की पुरानी दोस्त सोनाली (मेलानी नजारेथ) को जब आदित्य की पत्नी की मौत की खबर लगती है तो वह उसे दिलासा देने के लिए उसके महल पहुंच जाती है। जल्द ही दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ जाती हैं, जोकि कस्तूरी की आत्मा को बिल्कुल भी रास नहीं आता। आगे क्या होता है यह तो आपको फिल्म देखकर ही पता चलेगा।



निर्देशन और स्क्रिप्ट
कोई भी फिल्मकार जब राजस्थान की पृष्ठभूमि पर एक फिल्म बनाता है तो उसका उस राज्य के खूबसूरत महलों, हेरिटेज होटलों, गलियों और कस्बों को ही अपनी फिल्म का हिस्सा बनाता है। 1-13-7 एक तेरा साथ’ में निर्देशक ने महलों के काफी शॉट्स दिखाए है,जो मन को भाते। अरशद सिद्दीकी का कसा निर्देशन ने फिल्म को खास बना दिया है।

अभिनय
एक तेरा साथ’ में कुंवर आदित्य प्रताप सिंह की भूमिका में टीवी के मशहूर सितारों में से एक शरद मल्होत्रा काफी ने किरदार के साथ न्याय किया हैं, कस्तूरी की भूमिका निभा रही हैं हृतु दुदानी ने भी पात्र के अनुरूप काम किया है। मेलानी नाजरेथ ने भी अच्छी परफॉरमेंस दी है,लेकिन अभी उनको और मेहनत की जरूरतर है।

गीत-संगीत
फिल्म का म्यूजिक वर्तमान में प्रचलित संगीत की तरह है,जो आकर्षक लगता हैं। संगीतकार सुनील सिंह, लियाकत अजमेरी, अली अनिरुद्ध की जोडी ने फिल्म की धुन तैयार करने में पूरी मेहनत की है।
अमूमन देखा गया है कि हॉरर फिल्मों का संगीेत काफी तीखा होता है बीते बरसों में जितनी भी हॉरर फिल्में हिट हुई हैं उनकी सफलता में फिल्म के सफल म्यूजिक ने काफी योगदान दिया हैं, इस श्रेणी में अब एक नाम एक तेरा साथ का भी जुड गया ।

फिल्म के हीरो शरद मल्होत्रा टेलीविजन के काफी जानेमाने कलाकार हैं. अगर आप उनके फैन हैं, तो आप यह फिल्म देख सकते है,कुल मिलाकर कम बजट की एक अच्छी फिल्म बनी है।

कलाकारः शरद मल्होत्रा, ऋतु दुदानी, मेलानी नजारेथ, विश्वजीत प्रधान, इत्यादि
निर्देशकः अरशद सिद्दीकी
संगीत-निर्देशकः सुनील सिंह, लियाकत अजमेरी, अली अनिरुद्ध

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