असंवेदनशील समाज में मानवीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का सार्थक प्रयास है डॉ. अनुज का सद्य प्रकाशित उपन्यास दैट ऐरोटिक साइलैंस: दयानंद वत्स

अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव, गांधीवादी विचारक एवं चिंतक दयानंद वत्स की अध्यक्षता में आज संघ के मुख्यालय बरवाला दिल्ली में विश्वविख्यात माइक्रो सर्जन डॉ. अनुज द्वारा लिखित उपन्यास दैट ऐरोटिक साइलैंस पर एक सार्थक परिचर्चा का आयोजन किया गया।


उपन्यास की प्रासंगिकता पर अपने अध्यक्षीय संबोधन में अपने विचार प्रकट करते हुए श्री दयानंद वत्स ने कहा कि आज के असंवेदनशील समाज में मानवीय मूल्यों को जन-जन में प्रतिस्थापित करने में डॉ. अनुज का यह उपन्यास सार्थक सिद्ध होगा। 
डॉ. अनुज द्वारा लिखित “दैट एरोटिक साइलेंस” अपने आप में एक ऐसी रचना है जो संभवतः आने वाली युवा पीढ़ी के समग्र विकास का द्योतक साबित होगी। मेरा यह मानना है कि यह उपन्यास भविष्य में डॉ अनुज के लिए मील का पत्थर साबित होगा। जिस तरह से वह हस्त शल्य चिकित्सा (हैंड सर्जन) और सूक्ष्म शल्य चिकित्सा (माइक्रो सर्जन) के क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर ख्याति प्राप्त कर चुके है उसी तरह इस उपन्यास के ज़रिए देश विदेश में एक लेखक के रुप में भी अपनी अमिट छाप अवश्य छोड़ेंगे । इस उपन्यास की महत्ता बताते हुए श्री वत्स ने कहा कि “यह मैं व्यक्तिगत तौर पर मानता हूँ कि यह रचना लोगों की वर्तमान मनोदशा का उचित मार्गदर्शन कर मानवीय मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाएगी । इस पुस्तक में निहित सभी घटनाएं एक ज्वलंत समस्या का दूरदर्शितापूर्ण समाधान है। जिसको डॉ अनुज ने अपने कलम से इस तरह से उकेरा है कि समाज के लिए यह एक धरोहर होगी। जिसके माध्यम से समाज के सभी वर्ग अपनी कल्पनाओं से परे हटकर धरातल पर कुछ कर गुजरने की क़ुव्वत रख सकेंगे। इस उपन्यास का नायक ज़िंदगी की आपाधापी में एक ऐसी कलुषित संवेदनाओं से जूझ रहा है जो मानवीय मूल्यों पर करारा आघात कर रहा है। इसीलिए मैं व्यक्तिगत तौर पर डॉ अनुज का धन्यवाद ज्ञापन करना चाहता हूँ कि उन्होंने विश्व पटल पर एक ऐसी नयी विषय वस्तु को रखा है जो असंवेदनशील समाज को उनका आईना दिखाने में समर्थ है।

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