आशावादी सोच के प्रखर प्रहरी साहित्यकार थे स्वर्गीय हरिवंशराय बच्चन: दयानंद वत्स

अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक संघ के तत्वावधान में संघ के राष्ट्रीय महासचिव दयानंद वत्स की अध्यक्षता में आज उत्तर पश्चिम दिल्ली स्थित मुख्यालय बरवाला में प्रख्यात हिंदी कवि, लेखक, साहित्यकार और.शिक्षाविद् , पूर्व राज्यसभा सांसद स्वर्गीय श्री हरिवंशराय बच्चन.की 110 वीं.जयंती सादगी और श्रद्धा पूर्वक मनाई गई। श्री दयानंद वत्स ने बच्चन जी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें कृतज्ञ राष्ट्र की ओर से अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संबोधन में श्री वत्स ने कहा कि हरिवंशराय जी आशावादी सोच के प्रखर प्रहरी साहित्यकार थे। उनकी रचनाओं में मानवीय संवेदनाओं का इंद्रधनुष नजर आता है। बच्चन जी की मधुशाला हिंदी काव्य जगत की कालजयी कृति है। उनकी काव्यकृति मधुकलश, निशा निमंत्रण, हलाहल, उमर खय्याम की रुबाइयां भी पाठकों का ध्यान आकर्षित करती हैं। दो चट्टानें के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार तदनंतर उन्हें सोवियत लैंड पुरस्कार, बिरला फाउंडेशन का सरस्वती सम्मान से सम्मानित किया गया। सरकार द्वारा भी उनकी साहित्य ओर.शिक्षा के क्षेत्र में की गई सेवाओं के लिए पद्षम भूषण से अलंकृत किया।

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