सुरों के बेताज बादशाह थे स्वर्गीय मोहम्मद रफी साहेबः दयानंद वत्स

नेशनल मीडिया नेटवर्क फिल्म फॉउंडेशन ट्रस्ट एवं अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक संघ के संयुक्त तत्वावधान में आज संघ के राष्ट्रीय महासचिव गांधीवादी विचारक एवं चिंतक दयानन्द वत्स की अध्यक्षता में उत्तर पश्चिमी दिल्ली स्थित संघ के मुख्यालय बरवाला में हिंदी के सुप्रसिद्ध पार्श्व गायक स्वर्गीय मोहम्मद रफी साहेब की 93वीं जयंती सादगी और श्रद्धा पूर्वक मनाई गई। श्री वत्स ने रफी साहेब के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें करोड़ों कृतज्ञ संगीत प्रेमियों की और से भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संबोधन में श्री दयानंद वत्स ने कहा कि रफी साहेब सुरों के बेताज बादशाह थे, हैं, और हमेशा रहेंगे। रफी साहेब अपनी सुरमयी आवाज के रुप में हमेशा अमर रहेंगे। संगीतकार नौशाद के संगीत निर्देशन में 1946 में फिल्म अनमोल घडी में रफी साहेब का गाए गये गीत तेरा खिलौना टूटा के बाद उन्होनें कभी पीछे मुडकर नहीं देखा। उसके बाद रफी ने शहीद, मेला, दुलारी, बैजू बावरा फिल्मों में अपनी आवाज का जादू जगा दिया। संगीतकार नौशाद के साथ ही रफी साहेब ने एस.डी. बर्मन, ओ.पी नैयर, रवि, मदनमोहन, गुलाम हैदर, जयदेव, सलिल चौधरी, शंकर जयकिशन, लक्ष्मीकांत- प्यारेलाल, कल्याण जी- आनंद जी जैसे दिग्गज संगीतकारों के साथ एक लंबी पारी खेली ओर हजारों सुपर डुपर गीत गाए। उनकी सुरीली आवाज को अपनी फिल्मों में इस्तेमाल करने वाले फिल्म अभिनेताओं में भारत के पहले सुपर स्टार अशोककुमार, उनके भाई किशोरकुमार जो खुद भी एक विलक्षण गायक थे, ट्रैजेडी किंग दिलीपकमार, रोमांटिक हीरो देवानंद, भारतभूषण, शम्मीकपूर, शशिकपूर, राजेंद्र कुमार, राजेश खन्ना, धर्मेंद्र, जीतेंद्र, जॉय मुखर्जी जैसी हस्तियां शामिल रहीं। जिस भी फिल्म में रफी के गाए गये गीत होते थे उस फिल्म की सफलता की गारंटी पक्की होती थीं। संगीतकार रवि के संगीत निर्देशन में सजी गुरुदत्त की चौदहवीं का चांद के गीत चौहदवीं का चांद हो या आफताब हो के गीत के लिए उन्हें पहला फिल्मफेयर अवार्ड मिला। उसके बाद रवि के साथ ही रफी साहेब ने घराना, काजल, नीलकमल, दो बदन में सुपर हिट गीत गाए।

रफी साहेब को दूसरा फिल्मफेयर अवार्ड ससुराल फिल्म में गाए गीत तेरी प्यारी प्यारी सूरत को किसी की नजर ना लगी के लिए मिला। तीसरा फिल्मफेयर उन्हें दोस्ती फिल्म में.गाए गीत चाहूंगा मैं तुझे सांझ सवेरे के लिए मिला। उन्हें चौथा फिल्मफेयर सूरज फिल्म के गीत बहारो फूल बरसाओ मेरा महबूब आया है के लिए, पांचवा फिल्मफेयर फिल्म ब्रह्मचारी के गीत दिल के झरोखे में तुझको बिठाकर, यादों को तेरी मैं दुल्हन बनाकर रखूंगा मै दिल के पास, मत हो मेरी जां उदास।


श्री वत्स ने कहा रफी साहेब एक नेकदिल इंसान थे। उन्होने कई संगीतकारों की फिल्मों में बहुत ही कम मेहनताना लेकर भी काम किया। उनके गाए भजन आज भी सुने जाते हैं। मन तडपत हरि दर्शन को आज और मधुबन में राधिका नाचे रे को सुनकर आज भी श्रोता मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। देशभक्ति गीतों में उनका गाया गीत अपनी आजादी को हम हरगिज मिटा सकते नहीं, सर कटा सकते हैं लेकिन सर झुका सकते नहीं को सुनकर हर भारतवासी का सीना गर्व से चौडा हो जाता है। हम लाए हैं तूफान से कश्ती निकाल के, इस देश को रखना मेरे बच्चों संभाल के, नन्हें मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है, मुट्ठी में है तकदीर हमारी सदाबहार गीत हैं।
रफी साहेब की मखमली आवाज ने हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में अनेकों अभिनेताओं, संगीतकारों को स्थापित किया। श्री वत्स ने कहा कि जब तक दुनिया कायम है तब तक रफी साहेब का नाम अमर रहेगा।

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