जब नेपाल की धरती पर लगे भारत माता की जय के नारे


नेपाल भारत सहयोग मंच वीर गजं व क्रांतिधरा साहित्य अकादमी मेरठ के संयुक्त सहयोग से 12 व 13 अगस्त को नेपाल के वीर गजं मे आयोजित नेपाल भारत साहित्य महोत्सव मे भारत नेपाल के बीच साहित्य समृद्धता बढ़ाने के लिए विचार मन्थन किया गया। महोत्सव के मुख्य अतिथि नेपाल प्रांत नम्बर दो के मुख्यमंत्री लाल बाबू राउत रहे। जिन्हें भारत की ओर से श्रीगंगा सभा हरिद्वार के द्वारा प्रदत्त गंगा जली व गंगा माँ का प्रसाद वरिष्ठ साहित्यकार डा योगेन्द्रनाथ शर्मा अरुण,उत्तराखण्ड के वरिष्ठ पत्रकार श्रीगोपाल नारसन,हरिद्वार के कथाकार संजय हांडा व लेखिकाश्रीमती सरिता अग्रवाल ने संयुक्त रूप से भेंट किया।वही इस महोत्सव मे भारत व नेपाल के दो साहित्यकारों भारत के डा योगेन्द्र नाथ शर्मा अरुण व नेपाल के गणेश लाठ को विशेष साहित्य साधना सम्मान से विभूषित किया गया।

महोत्सव का शुभारम्भ मुख्यमंत्री लालबाबू राउत ने व्रक्षारोपण करके किया।महोत्सव मे डा योगेन्द्र नाथ शर्मा अरुण द्वारा लिखित पुस्तक ‘जीवित है आशा का विमोचन भी मुख्यमंत्री लालबाबू राउत ने किया।मेरठ ग्रीन केयर सोसायटी के अध्यक्ष विजय पण्डित के संयोजन व नेपाल भारत सहयोग मंच के अध्यक्ष अशोक वैद्य की अध्यक्षता मे महोत्सव की शुरुआत दोनो देशो के राष्ट्रगान से हुई।नेपाल का राष्ट्रगान श्रीमती अनीता आर्यन ने गाया जबकि भारत के राष्ट्रगान का सौभाग्य कोलकता की श्रीमती उषा शा को मिला।राष्ट्रगान के अंत मे भारतीय साहित्यकारों ने नेपाल की धरती पर भारत माता की जय के नारे लगाये तो लगा जैसे नेपाल भारत मे समाहित हो गया हो।

मुख्यमंत्री लालबाबू राउत ने साहित्य को देश और संस्कृति का दर्पण बताते हुए अंग्रेजी के प्रभुत्व को लेकर चिंता प्रकट की और हिन्दी तथा नेपाली भाषा के माध्यम से दोनो देशो के बीच बन्धुत्व का सेतु बनाने के प्रयास की सराहना की।उन्होंने साहित्यकारों की कई पुस्तको का लोकार्पण कर उन्हें अभिनन्दित भी किया।उन्होंने कहा कि दोनो देशो के बीच रिश्तों को प्रगाढ़ बनाने के लिए जो काम दोनो देशो की सरकारो को करना चाहिए वह काम दोनो देशो के कलमकारों ने कर दिखाया है।इससे लगता है कलमकार देश की सीमाओ से परे केवल और केवल रचनात्मकता का पुजारी है जिसकी दुनिया के देशो को एक बनाने मे महती भूमिका हो सकती है।

भारत की ओर से ऐसा ही एक साहित्यिक समागम हरिद्वार मे करने के लिए भी सहमति बनी,जिसका जिम्मा वहाँ से आये कथाकार संजय हांडा को सोपा गया।उदघाटन सत्र के बाद चले आधुनिक कविता व गद्य चर्चाओ के बीच राजस्थान के भीलवाड़ा से आई डा सुमन सोनी ने ‘मेरे वतन के लोगो’ भारतीय राष्ट्र भक्ति का गीत सुनाकर और भारत माता की जय का उदघोष कर भारतीय साहित्यकारों के चेहरे पर नई चमक लाने का काम किया।लग रहा था जैसे भारत के राष्ट्रीय पर्व स्वाधीनता दिवस मनाने की तैयारी नेपाल मे की जा रही हो।कवि सम्मेलन के लम्बे दौर मे हिन्दी, नेपाली, असमिया, सिक्किम, उर्दू ओर अन्य भाषाओ मे भी काव्यपाठ किया गया।इस महोत्सव मे रचनाकारों को उनकी साहित्यिक सेवाओ के लिए प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित भी किया गया।जिसके तहत उत्तराखण्ड से वरिष्ठ पत्रकार श्रीगोपाल नारसन,हरिद्वार के कथाकार संजय हांडा व लेखिका सरिता अग्रवाल को नेपाल भारत साहित्य सेतु सम्मान से विभूषित किया गया।इस अवसर पर पंजाब से मनप्रीत,चम्पारण से मनोज कुमार,काठमांडू से सचिदानंद व प्रोफेसर स्वेता दीप्ति,छत्तीसगढ़ से ज्योति मिश्रा,कानपुर से मधु प्रधान ,नेपाली भाषा की कवियत्री अनीता आर्यन आदि मौजूद रहे।जिनकी मौजूदगी मे भारत नेपाल साहित्य मैत्री रिश्तों पर इस आयोजन के माध्यम से नई मोहर लगी।

डा श्रीगोपाल नारसन एडवोकेट
पोस्ट बॉक्स 81,1043,गीतांजलि विहार,
गणेशपुर ,रुड़की,उत्तराखण्ड
मो0 9997809955

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