DJA workshop for journalists on stress management


पत्रकारों ने सीखे तनाव मुक्ति के गुर

मीडिया के दिन-प्रतिदिन बदलते स्वरूप और तकनीक के कारण मीडियाकर्मियों में तनाव का स्तर बहुत तेजी से बढ रहा है। मात्र तीस साल की आयू में ही पत्रकार गंभीर बीमारियों के शिकार हो रहे हैं। ‘न्यूजरूम’ के तनावपूर्ण माहौल के कारण अनेक नवोदित पत्रकार इस पेशे को ही अलविदा कह रहे हैं। ऑफिस के तनाव के कारण पत्रकारों का पारिवारिक जीवन भी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में पत्रकारों को तनावमुक्ति के गुर सिखाने के लिए आज दिल्ली पत्रकार संघ ने प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के साथ मिलकर एक कार्यशाला का आयोजन किया। ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने मात्र 5 मिनट में तनावमुक्त होने के तरीके सिखाये और यह भी सिखाया कि किस प्रकार व्यक्ति सकारत्मक सोच के साथ स्वयं को आत्मविश्वास से सराबोर कर सकता है।

दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के अध्यक्ष मनोहर सिंह ने पत्रकारों द्वारा दैनंदिन जीवन में महसूस की जाने वाली समस्याओं का जिक्र किया। इस अवसर पर दिल्ली जर्नलिस्ट्स एसोसिएशन के महासचिव डा प्रमोद कुमार ने अपने शोध का जिक्र करते हुए बताया कि दिल्ली में करीब 76 प्रतिशत पत्रकार अत्यंत तनाव में जीवन गुजार रहे हैं। उन्होंने विश्वस्तर पर इस संबंध में विभिन्न मीडिया संस्थानों द्वारा मीडियाकर्मियों को तनावमुक्त रखने के लिए उठाये गये कदमों की भी चर्चा की। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारतीय मीडिया संस्थान पश्चिमी देशों में मीडिया में आ रहे बदलाव के अनुसार स्वयं को तो ढाल रहे हैं परन्तु वहां मीडियाकर्मियों को ‘रिलेक्स’रखने के लिए जो कदम उठाये गये हैं उन्हें अपनाने की दिशा में गंभीर नहीं दिखते।

प्रजापिता ब्रह्माकुमारी ईश्वरीय विश्वविद्यालय, सेक्टर 26, के सदभावना भवन में आयोजित कार्यशाला में भोपाल से आयीं वरिष्ठ राजयोग शिक्षिका डा. बी.के. रीना ने मेडिटेशन सिखाया। उन्होंने राजयोग की विभिन्न विधियों के व्यावहारिक जीवन में प्रयोग के सहज तरीके भी बताये, जिसमें विशेष रूप से समय प्रबंधन के बारे में विस्तार से चर्चा की गई। इस अवसर पर फरीदाबाद से आयीं राजयोगिनी ब्र0कु0 पूनम ने कहा कि पत्रकार के हाथ में दूसरों के विचारों को प्रभावित करने की शक्ति होती है इसलिए उनके स्वयं के विचार भी सकारात्मक होने चाहिए। उन्होंने कहा कि जैसा हम सोचेंगे वैसी ही हमारी परिस्थितियां होंगी। यदि हम चिन्ता, दुख, तनाव में रहकर काम करेंगे तो हमारी परिस्थितियां भी वैसी ही होंगी। उन्होंने कहा कि तब तक कुछ नहीं बदलेगा, जब तक हम स्वयं को नहीं बदलेंगे और हम इसलिए नहीं बदल पाते क्योंकि हम अपने ‘कमफर्ट जोन’को छोड़ना नहीं चाहते।

इस अवसर पर इन्दौर से आये वरिष्ठ पत्रकार प्रो. कमल दीक्षित ने अपने जीवन में राजयोग से हुए लाभों को साझा करते हुए बताया कि ब्रह्माकुमारी संस्था में सिखाये जा रहे राजयोग की विधि तार्किक एवं वैज्ञानिक आधार पर खरी है। इस अवसर पर दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष अनिल पांडे, कार्यकारिणी सदस्य संतोष सूर्यवंशी, नेशनल यूनियन ऑफ जर्नलिस्ट्स (इंडिया) के कार्यकारिणी सदस्य श्री हर्षवर्धन त्रिपाठी एवं सुश्री सर्जना शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार निशि भट एवं विजय लक्ष्मी सहित बडी संख्या में पत्रकार एवं दिल्ली जर्नलिस्ट एसोसिएशन के सदस्य उपस्थित थे।

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