Nepal India Literature Festival

नेपाल भारत साहित्य महोत्सव 2018 :मैत्री भाव का एक नया अध्याय


राजीव कुमार पाण्डेय
कवि ,कथाकार, हाइकुकार, समीक्षक

बीरगंज एक वाणिज्यिक नगरी नेपाल की लेकिन 12 अगस्त 2018 को इतिहास में दर्ज हुई जब उसे साहित्यिक नगरी घोषित किया गया । कलमकारों द्वारा एक नयी क्रांति का जन्म हुआ जिसमें रिश्तों की गर्माहट ने सिकुड़ी हुई बाँहो को खोल दिया। और समेट लिया सम्बन्धों को अपने अपने आगोश में।

हमारी धार्मिक मान्यताओं के अनुसार किसी भी शुभ कार्य का श्री गणेश प्रथम पूज्य देवता की अर्चना से होता है। और उस कार्य को स्वयं गणेश प्रसाद अपने संयोजन में सम्भालने को कमर कसे हों तो ‘विजय’ श्री को कौन रोक सकता है।

10 वर्षों की हिमालयी तपस्या डॉ विजय पण्डित की इस आयोजन को शिखर तक पहुंचाने की। आजकल जब गला काट प्रतिस्पर्धा हो अपना अपना झंडा ऊँचा करने की ।लेकिन यही वह तपस्वी जिसने दोनों देशों के झंडों को शिखर पर गाड़ दिया नेपाल की एवरेस्ट चोटी पर। आने वाली पीढ़ियों के लिये आदर्श खड़ा कर दिया एक भगीरथ ने।

11 से 13 अगस्त की साहित्यिक क्रांति में मगध साम्राज्य के अशोक वैद्य आगे आये अपने मजबूत इरादों को लेकर। और अंत तक डटे रहे।
सुदामा के पैरों में कितने छाले हैं कितने कंटक हैं यह तो उनका बाल सखा और सबका द्वारिका धीश कृष्ण ही जान सकता है। इस सुदामा के कृष्ण अरुण राज सुमार्गी उनकी भार्या रुक्मिणी अंकिता सुमार्गी के पावन सानिध्य ने सब कुछ सहज कर दिया, इस साहित्यिक कुम्भ को आसान बना दिया। जिसमें दो देशों की साहित्यिक सांस्कृतिक परम्परा ने डुबकी लगाकर अपने को पुनः पवित्र कर लिया। कुछ लोग जो बिना यश के वशीभूत काम करते है उनकी विनम्रता के चर्चे पीढ़ियों को जुबानी याद होते हैं।कौन भूल सकता है उस सबरी के योगदान को जिसने सारे खट्टे बेर स्वयं चखे हों और मीठे अपने मेहमानों को। उस अनीता आर्यन नेपाल को बारम्बार प्रणाम की मुद्रा में झुक जाने को मन करता है।

जिस साहित्यिक आयोजन में माँ शारदे का आशीर्वाद हो वहाँ सफलता के नए कीर्तिमान स्वयं स्थापित हो जाते है। उसी साहित्यिक आयोजन में इस उपाधि को पाया अर्थात नेपाल की सरस्वती डॉ श्वेता दीप्ति के हँसमुख व्यक्तित्व ने सभी को अपना बना लिया। जिस आँगन में इतने फूल एक साथ खिले हों उस फूलों के आँगन में सच्चे आनन्द की अनुभूति होती है उसे सच्चिदानंद ( श्री सच्चिदानंद मिश्र) की प्राप्ति होती है।

10 अगस्त की शाम से ऐसे आथित्य के सागर में गोते लगाये कि 14 की सुबह को ही बाहर आ सके उस सागर से। 11 का आयोजन हेटोंडा के नाम रहा।वहाँ की परम्परागत नृत्य शैली ने मन मोह लिया।साथ ही सम्मानित होने गर्व भी साथ लेकर आये हिंदुस्तानी साहित्यिक मित्र। हेटोंडा अकेडमी माध्यमिक विद्यालय के सुरम्य प्राकृतिक मनमोहक वातावरण ने आनन्द आगोश में समेट लिया। धन्य हैं सुमार्गी दम्पति श्री अरुण राज सुमार्गी और श्रीमती अंकिता सुमार्गी जिनके स्नेह से अभिसिंचित हुए और उनके प्रेम में पगे वे व्यंजन जो सपनो के स्वाद में भी मिठास भर देते हैं। दहीयुक्त रसगुल्ला वाह क्या कहने।

हेटोंडा शहीद स्मारक जो देश भक्ति की चिंगारी भी जगा गया कलम में। भुटन देवी मंदिर का प्रांगण पावन कर गया हमारे आगमन को।
आत्मिक शान्ति को प्राकृतिक वरदान ही काफी होते हैं उस कुष्माण्ड सरोवर त्रिवेणी त्रिवेणी धाम के पावन तट पर सब कुछ भूल गये और एक असीम आनंद की अनुभूति में गोते लगाने लगे।प्रातः से देर शाम तक के इस आनंद के पल उपलब्ध कराने के लिये एक बार पुनः ह्र्दय से अनायास आभार निकलता है सुमार्गी दम्पति के लिये। काश ऐसे मनुष्य पूरे विश्व मे हों और उनकी खुशबू से सारा जहाँ सुवासित हो उठे ।
12 तारीख के आकर्षण को कभी नहीं भुलाया जा सकता । जब विधिवत उद्घाटन हुआ प्रदेश नम्बर दो के मुख्यमंत्री माननीय लाल बाबू राउत गद्दी के शुभ हाथों से उस शानदार महोत्सव का जिसमें दो देशों की सभ्यता को शिखर पर ले जाने की चर्चा हुई।

ऐसा दौर हर कोई उनसे मिलने को आतुर चाहे प्रोटोकॉल ही क्यों न तोड़ना पड़ा हो।डॉ विजय जी उस ज्वार को देख कर मन्द मन्द मुस्काते ही रहे उस दिन । एक ऐसा सत्र चला कि प्रातः से प्रारम्भ होकर शाम तक चलता ही रहा। इसी मध्य काव्यपाठ भी होता रहा और सम्मान भी होते रहे। विशेष उपलब्धि में शिखर सम्मान प्राप्त हुए दोनों देशों के वरिष्ठ कवियों में सर्व श्री डॉ योगेन्द्र नाथ शर्मा अरुण (भारत),डॉ ध्रुव चन्द्र गौतम नेपाल,कैसा सामन्जस्य बैठाया गया,सराहनीय पहल ।

लगभग 250 साहित्यकार एक स्थान पर एकत्रित हुए एक बड़ी उपलब्धि। नेपाल भारत अंतरराष्ट्रीय साहित्य रत्न सम्मान, नेपाल भारत अंतरराष्ट्रीय साहित्य सेतु सम्मान से अलंकृत हुए। सभी की प्रोफाइल में जुड़ गया एक नया आयाम।

कई ग्रन्थों के विमोचन जिसमें मेरे भी उपन्यास ‘बाँहों में आकाश’ का विमोचन अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि रही मेरे लिए। जिनके भी ग्रन्थ विमोचित हुए सभी को भरपूर आशीर्वाद मिला उस साहित्यिक प्रागंण का। नेपाल ऊर्दू अकादमी के अध्यक्ष इम्तियाज वफ़ा की उपस्थिति ने चार चाँद लगा दिए। उनकी शायरी और श्री दिलदार देहलवी की शायरी लोगों की जुबान पर चढ़ गई। श्री महेश पौडयाल, गोकुल अधिकारी ,निमेष निखिल शान्तिंप्रिय वंदना डॉ वसु काफले प्रियवन्दना आचार्य काफले, डॉ ऊषा शाह,श्री कुंवर वीर सिंह मार्तंड,श्री प्रदीप श्रीवास्तव सुभाष खनाल जैसे आदि अनेको विदानों से सजे मंच को कौन भूल सकता है। रात के उस काव्य पाठ को सदैव स्मरण रखा जाएगा जिसमे डॉ विजय पण्डित जी का संचालन केवल दो शब्द अन्यथा वाह वाह, सभी को मन भा गया।

अगले दिन 13 अगस्त प्रातःकाल से देर शाम तक विभिन्न सत्र बिना इंटरवल के, कविताओं का दौर और उनके कव्यपाठ के समापन पर सम्मान। मीठी स्मृतियों के आकाश ले गए अपने आँगन में आनन्द वर्षा करने लिए।

ट्रैन में कवि सम्मेलन बस में संकीर्तन का अद्भुत आनन्द जिया हम सब साहित्यिक मुसाफिरों ने। हमारे अग्रज कैप्टन ब्रह्मानन्द तिवारी अवधूत के श्रृंगार पगे गीत उल्लेखनीय रहें, डॉ सरोजिनी तन्हा की गज़लें ,और मेरे मतलब डॉ राजीव पाण्डेय के गीत लोगों की जुबान पर चढ़ गए।

नेपाल भारत सहयोग मंच, ग्रीन केयर सोसायटी, हिमालिनी पत्रिका के सहयोग से सम्पन्न इस आयोजन की स्मृतियाँ एक लम्बे अंतराल तक अन्तस् मे अंकित रहेंगीं। इस पूरे वृतांत में अपने विनम्र व्यवहार से सबके मन मे प्रीत जगाने वाले हरमन प्रीत की बात न हो, बेतिया के लाल मनोज कुमार और उनके आतिथ्य सत्कार और पौधे बाँटने का जिक्र न हो तो पूरा व्रतांत अधूरा लगता है। साहित्यक अभियान को आगे बढाने वाले श्री ओमप्रकाश खनाल सदैव स्मरण रहेंगे।श्री एस एस डोगरा,व श्री गोपाल नारसन ने भी अपनी कलम से प्रसारित करने में अहम भूमिका निभाई उनक प्रयासों कोे भी साधुवाद।पूरे मनोयोग से अपना मधुर व्यववहार की आभा बिखेर रहा मधुर शर्मा सबका प्रिय बन गया। हम सब तो साक्षी थे और उस आयोजन का आनन्द ले रहे थे । लेकिन एक प्राणी ऐसा भी था जो हिंदुस्तान में तन से था और सुखद आयोजन की प्रभु से प्रार्थना कर रहा था लेकिन मन से उपस्थित उस आयोजन में थी वह और कोई नहीं केवल और केवल श्रीमती पूनम पण्डित ही थीं।
अंत मे मैं उन सभी कार्यक्रम के सूत्रधारों, आयोजकों, और उसमें लगे सभी मील के पत्थरों को नमन करता हूँ। किसी का योगदान इस कलम से न लिख पाया हो उसे भी नमन करते हुए अपनी कलम को विराम देता हूँ।

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