वीर कुंवर सिंह फाउंडेशन द्वारा 1857 की क्रांति : प्रेरणा समारोह दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित


(द्वारका परिचय न्यूज डेस्क)

गत रविवार: १६ सितम्बर,२०१८ को वीर कुंवर सिंह फाउंडेशन द्वारा तालकटोरा स्टेडियम में 1857 की क्रांति के 160 साल पूरे होने पर तालकटोरा स्टेडियम में प्रेरणा समारोह का सेमिनार एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमो का आयोजन किया गया जिसमे बहादुर शाह जफर, कुंवर सिंह , लक्ष्मी बाई , तात्या टोपे , झलकारी बाई , बेगम हजरत महल सहित सभी गुमनाम शहीदों को नमन किया गया। वीर कुंवर सिंह फाउंडेशन द्वारा जारी विज्ञप्ति अनुसार इस मौके पर केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्वनी चौबे, एम एस बिट्टा ,महाबल मिश्र (पूर्व सांसद)और रश्मि सिंह(सचिव एन डी एम सी )फाउंडेशन के अध्यक्ष निर्मल सिंह के साथ  मौजूद रहे।

अपने संबोधन में राजनाथ सिंह ने कहा कि 18 57 की पहली क्रांति के नाम इसलिए मशहूर है क्योंकि 1942 में भारत छोड़ो का नारा बुलंद हुआ था उसके बाद 5 साल बाद अंग्रेजों को भारत छोड़ना पड़ा था। उन्होंने यह भी कहा 18 57 की क्रांति ने देश के युवा क्रांतिकारियों को आगे बढ़ने का मौका दिया और जिन क्रांतिकारियों ने इसके बाद देश की आजादी में योगदान दिया उसमें से कई गुमनाम हो गए इतिहास के पन्नों में नहीं मिले, ऐसे लोगों को वीर कुंवर सिंह फाउंडेशन ने याद कर एक बहुत ही साहसिक एवं ऐतिहासिक कदम उठाया है । उन्होंने यह भी कहा यह संगठन पिछले 21 सालों से दिल्ली में वीर महापुरुषों को याद करने का जो बीड़ा उठाया है उसमें व्यक्तिगत रूप से सहयोग करेंगे।
इस दौरान केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री अश्विनी चौबे ने कहा कि यह आयोजन इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि यह 1857 के महागाथा में लेकर लोक राष्ट्र तक कि बात की गई है । कार्यक्रम के दौरान एम एस बिट्टा ने कहा कि जहां भी वीरो का सम्मान होता है वहां बिट्टा मौजूद रहता है इसीलिए वह इस संस्थान से जुड़े हैं शुरू से। कार्यक्रम के दौरान वीर कुंवर सिंह फाउंडेशन के चेयरमैन निर्मल कुमार सिंह ने बताया कि वीर कुंवर सिंह फाउंडेशन पिछले दो दशक से वीर कुंवर सिंह विजयोत्सव समारोह मनाने का काम कर रहे हैं। इससे लोगों को जो सहयोग मिला उसके बाद हमने तालकटोरा में शहीदों को याद करने के लिए कार्यक्रम का आयोजन किया। खुशी इस बात की है कि पूरी दिल्ली के लोगों ने बढ़-चढ़कर सहयोग किया उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह को आश्वस्त किया कि आने वाले समय में फाउंडेशन देश के क्रांतिकारियों को याद करने के लिए बेहतर कार्यक्रम करेगा। रश्मि सिंह ने कहा कि इस तरह के कार्यक्रम वास्तव में अनूठा एवं प्रेरणादायक है । फाउंडेशन अध्यक्ष निर्मल सिंह ने कहा कि वीरो के इतिहास को दबाना नही चाहिए एवं उनके व्यक्तित्वों और कृतित्वो को वर्तमान एवं भावी पीढ़ी के सामने  बार बार प्रस्तुत करना चाहिए, जिससे शाहीदो से उन्हें प्रेरणा मिलती रहे तथा राष्ट्र एकता एवं अखंडता , साम्प्रदायिक सद्भाव और सामाजिक समरसता बनी रहे । निर्मल सिंह ने कहा कि मेरा स्पष्ट मानना है कि जो पीढ़ी अपने पूर्वजों एवं इतिहास का सम्मान को सम्मान और संरक्षण नही करती वो पीढ़ी मिट जाती है एवं खटीमम हो जाती है।
कार्यक्रम के प्रथम क्षत्र में एन डी एम सी के छात्रों ने बढ़ चढ़ कर हिस्सा लिया और 1857 की क्रांति पर अपनी बात रखी । सांस्कृतिक कार्यक्रमो में संगीत कला अकादेमी के नार्थ ईस्ट के कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति की , भोजपुरी का राष्ट्रीय गीत बटोहिया और वीर गाथा को केंद्रीय गृह मंत्री ने खूब सराहा । एवं अन्य कलाकारों में डॉ नीतू कुमारी नूतन, खुशबू तिवारी , स्मिता सिंह ,मधु पांडेय , आदि ने भाग लिया।
आयोजन समिति में सामाजिक संगठनों के निम्न लोग आयोजन समिति का हिस्सा थे -रंजीत सिंह , मुरारी तिवारी , दिनेशवर राय , मुकेश सिंह , पी एस सिंह , दीपक ज्योती , डा आर एन सिंह ,पंकज सिंह,गोपाल झा , प्रदिप पांडेय , डा. आर. एन. सिंह ,पंकज सिंह,ओ.पी सिंह,धनंजय,संजय सिंह,श्रीकांत विद्यार्थी,श्रीकांत सिंह यादव,रमेश चौधरी,कुँवर विक्रम सिंह,एच. एन. सिंह,ओमप्रकाश श्रीवास्तव,एस.के.सिंह,प्रदीप गुप्ता,विनोद श्रीवास्तव,राकेश परमार,कमलेश सिंह,आर.पी. सिंह,एच.पी. सिंह,बी.पी. सिंह,रमाकांत तिवारी,प्रेम कुमार,आर.पी. सिंह,सी.एस.सिंह|

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