128 वीं जयंती पर गणेश शंकर विद्यार्थी को श्रद्धा सुमन अर्पित


अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक संघ के तत्वावधान में आज संघ के मुख्यालय बरवाला में संघ के राष्ट्रीय महासचिव दयानंद वत्स की अध्यक्षता में पत्रकार, समाजसेवी और स्वतंत्रता सेनानी स्वर्गीय श्री गणेश शंकर विद्यार्थी की 128वीं जयंती सादगी और श्रद्धा पूर्वक मनाई गई। श्री वत्स ने श्री गणेश शंकर विद्यार्थी के चित्र पर माल्यार्पण कर उन्हें कृतज्ञ राष्ट्र की और से अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किए। अपने संबोधन में श्री दयानंद वत्स ने कहा कि स्वर्गीय गणेश शंकर विद्यार्थी पत्रकारिता के भीष्म पितामह और निर्भीक कलम के सिपाही थे। जो परिस्थितियां उनकी दुखद मृत्यु के समय थीं वही आज भी उससे भी भयावह रुप में समाज में विद्यमान हैं। उनकी लेखनी ने अंग्रेजी शासन की नींव हिलाकर रख दी थी। उनके लेखों और निबंधों में भावात्मकता, ओज, गांभीर्यता, निर्भीकता, सरलता ओर प्रवाहमयता स्पष्ट परिलक्षित होती है। उन्होंने कर्मयोगी, स्वराज्य, अभ्युदय, हितवार्ता, सरस्वती समाचार पत्र पत्रिकाओं में अपनी कलम से नये भारत का नवनिर्माण किया। विद्यार्थी जी ने साप्ताहिक प्रताप को दैनिक प्रताप में परिवर्तित कर एक संपादक, एक लेखक के रुप में राष्ट्रहित में जन- जागरण का महत्वपूर्ण कार्य किया। वे स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी थे। आचार्य महावीरप्रसाद द्विवेदी उनकी लेखनी के प्रशंसक रहे ओर अपनी पत्रिका सरस्वती में विद्यार्थी जी ने अपना लेख आत्मोसर्ग प्रकाशित कराया। वे बाल गंगाधर तिलक , महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित थे। उनकी लिखी शेखचिल्ली की कहानियां पाठक आज भी चाव से पढते हैं। आत्मोसर्गता नामक संग्रह में उनकी अपूर्व शैली के दर्शन होते हैं। उनके सारे निबंध त्याग और बलिदान पर आधारित हैं। श्री वत्स ने कहा कि गणेेेश शंकर विद्यार्थी का व्यक्तित्व एवं कृतित्व भावी पीढी और पत्रकारिता जगत के लिए प्रेरणादायक है।

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