मशहूर संगीतकार ओ.पी नैयर को 93वीं जयंती पर श्रद्धा सुमन अर्पित

अखिल भारतीय स्वतंत्र पत्रकार एवं लेखक संघ के राष्ट्रीय महासचिव दयानंद वत्स ने आज महान संगीतकार स्वर्गीय ओ.पी नैयर को.उनकी 93वीं जयंती पर संघ के मुख्यालय बरवाला में आयोजित सादा समारोह में भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। अपने संबोधन में श्री वत्स ने कहा कि मशहूर  संगीतकार ओ.पी नैय्यर बेहद संवेदनशील  और स्वाभिमानी व्यक्ति थे। अनबन के चलते उन्होने लता मंगेशकर से उन्होने कभी भी कोई गीत नहीं गवाया। शमशाद बेगम, गीता दत्त, आशा भोंसले थीं उनकी पहली पसंद की गायिकाएं, मौ.रफी थे उनके फेवरेट। लेकिन महेंद्र कपूर और मुकेश को भी दिया मौका। अपनी ही शर्तों पर काम करने वाले इस महान संगीतकार की आज 93वीं जन्म जयंती है। गुरुदत्त, देवानंद, दिलीप कुमार, जानीवाकर, शम्मीकपूर सबको अपने संगीत से आसमान की बुलंदियों तक पंहुचाया। उनके पसंदीदा गीतकारों में साहिर लुधियानवी, मजरूह सुल्तानपुरी, कमर जलालाबादी, जां निसार अख्तर, एस.एच बिहारी प्रमुख थे। आईये नजर डालते हैं उनके संगीतबद्ध कुछ गीतों पर…… 

कभी आर कभी पार लागा तीरे नजर सैंया घायल किया रे तूने मेरा जिगर।
-कजरा मुहब्बत वाला अंखियों में ऐसा डाला
– आओ हुजूर तुमको सितारों में ले चलूं
– आंखों ही आंखों में इशारा हो गया
– लाखों हैं यहां दिलवाले-ले के पहला पहला प्यार, भर के आंखों में खुमार
– ऐ दिल है मुश्किल जीना यहां
-यूं तो हमने लाख हसीं देखे हैं, तुमसा नहीं देखा
-चल अकेला चल अकेला, तेरा मेला पीछे छूटा
-बदल जाए अगर माली चमन होता नहीं खाली
-ये देश है वीर जवानों का-ठंडी हवा काली घटा
-जाने कहाँ मेरा जिगर गया जी
– आपके हसीन रुख पे आज नया नूर है 

ये तो कुछ बानगी भर गीत हैं। ओ.पी नैय्यर साहब ने  हर गीत को अमर संगीत दियाहै।नेशनल मीडिया नेटवर्क के प्रधान संपादक दयानंद वत्स इस महान संगीतकार को उनकी जयंती पर भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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