विश्व पर्यावरण दिवस पर आरजेएस की 69वीं बैठक गुवाहाटी में ह्दय परिवर्तन के केंद्र शांति साधना आश्रम में संपन्न

नई दिल्ली-राम जानकी संस्थान -आरजेएस,नई दिल्ली द्वारा भारत के 22 राज्यों में सकारात्मक भारत मिशन चलाया जा रहा है. इसके अंतर्गत सकारात्मक बैठकों और पत्रकारिता से भारत-निर्माण करने के लिए स्वयं पत्रकार और समाज सेवी प्रयासरत हैं .इसी कड़ी में सामाजिक कार्यकर्ता व पत्रकार विशाल जैन ने गुवाहाटी में विश्व पर्यावरण दिवस के पूर्व आरजेएस की 69 वीं सकारात्मक बैठक का आयोजन शांति साधना आश्रम गुवाहाटी असम में किया।

इस अवसर पर सबसे पहले महात्मा गांधी जी को श्रद्धांजलि दी गई और गांधी जी का प्रिय भजन गाया गया।  उनके सत्य और अहिंसा के मार्ग कोअपनाने की बात कही गई।शांति साधना आश्रम की निदेशक प्रज्ञा जी ने कहा कि गांधी आज बहुत ज्यादा प्रासंगिक हो गए हैं। आज युवा पीढ़ी को गांधी शांति दे सकते हैं। गांधी हमें  सहिष्णु बनाते हैं। उन्होंने धर्म और विज्ञान को साथ लेकर चलने को कहा था । बदलते दौर में  नए और पुराने विचारों के साथ नई तकनीक का भी इस्तेमाल कर आगे बढ़ा जा सकता है । बैठक की अध्यक्षता कर रहे असम में ह्रदय परिवर्तन के केंद्र  शांति साधना केंद्र के संस्थापक गांधीवादी हेम भाई ने कहा कि आश्रम में  सर्व जाति धर्म समभाव के साथ सभी भाई बहन एक परिवार की तरह प्रकृति की गोद में रहते हैं। इसके साथ इस परिवार में जंगली जीव बाघ, हाथी, मधुमक्खी, तितली और बंदर सब प्राणी यहां स्वतंत्र होकर आसपास आते-जाते रहते हैं।कोई किसी का नुक़सान नहीं करता और ना ही दखल देता है।बिना किसी द्वेष और घृणा के सभी साथ-साथ खुले मन से निवास करते हैं। हथकरघा और अन्य लघु उद्यम का आश्रम में प्रशिक्षण देकर युवा पीढ़ी को आत्म निर्भर बनाया जाता है। उन्होंने पूर्वोत्तर के नौजवानों को अस्त्र उठाने की जगह औजार उठाने के लिए प्रेरित किया।स्वच्छ पर्यावरण का संदेश देते हुए गांधीवादी हेम भाई का कहना है कि  हम हमारे लोभ के लिए पर्यावरण को नुकसान पहुंचा रहे हैं।

गांधी कहते थे‌ कि हमारी आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए धरती पर सबकुछ है लेकिन हमारी लालच के लिए नहीं। धरती की रक्षा के साथ-साथ धरती पर रहने वाले छोटे-छोटे जीवो की भी रक्षा करना मनुष्य का कर्तव्य है।  पहाड़ और नदी का संरक्षण करना शुद्ध रखना हमारा कर्तव्य है। हम लोग आश्रम में जैविक खेती करते हैं । हमने असम में लगभग चालीस हजार पौधा वितरित किया है जो आज फलदार वृक्ष बन चुके हैं। हेम भाई कि दिली इच्छा है कि असम के गांव गांव में  शिक्षा से वंचित महिलाओं ,आदिवासियों और बच्चे-बच्चियों  की पढ़ाई नि:शुल्क हो। अभी शांति साधना आश्रम की सहायता से साढ़े तीन सौ बच्चों को नि:शुल्क शिक्षा दी जाती है।

सामाजिक कार्यकर्ता विशाल जैन के प्रश्न का जवाब देते हुए हेम भाई ने कहा समाज व्यवस्था के साथ शिक्षक प्रशिक्षण की व्यवस्था के लिए शिक्षा संस्थान बनाना चाहते हैं, जहां गणित, विज्ञान, उपनिषद पुराने सभी विषयों के साथ आवासीय व्यवस्था हो और आश्रम में  विज्ञान और प्रकृति के साथ आयुर्वेद ,योग और नेचुरोपैथी को मिलाकर एक कॉलेज और अस्पताल का निर्माण करेंगे। इसके साथ-साथ गुवाहाटी में निरामिष भोजन के लिए एक होटल निर्माण की भी योजना है।

शांति साधना आश्रम के व्यवस्थापक बाबूलाल विद्रोही उर्फ ह्रदयानंद  ने कहा कि राजनीति के विद्यार्थी होने के नाते  अलग-अलग विचारों का अध्ययन किए, लेकिन सबसे ज्यादा  विनोबा भावे जी से मिलकर  समाजसेवा के लिए प्रेरित हुए और काम करना शुरु किया । शांति साधना आश्रम गुवाहाटी में  हेम भाई अक्सरहां  बाहर जाकर गांधीजी और विनोबा जी के विचारों को प्रचार-प्रसार करते थे और  आश्रम की सारी व्यवस्था 1980 से मैं देख रहा हूं। सब्जियों और फलों के बागीचे कई एकड़ में हैं। यहां हम जैविक खेती करते हैं।बैठक में गांधी आश्रम में खादी उत्पादों की इंपोरियम देखने वाली कुसुम लॉकर, बनोलता मंडल, रुपा नेयो, बंकिम नेयो ,डिलेमा फूकन ,अमित और नयन तारा आदि उपस्थित रहे।

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