किरदार के साथ न्याय करने का प्रयास करता हॅू: वत्सल सेठ


प्रेमबाबू शर्मा  

‘टार्जन-द वण्डर कार’,तो बात पक्की, पैंईग गेस्ट ,नन्हें जैसलमेर, हीरोज, हाॅस्टल और में जय हो जैसी सरीखी फिल्मों में अभिनय कर चुके वत्सल सेठ ने कहा कि ‘एक अभिनेता होने के नाते उनका भूमिकाओं को सावधानीपूर्वक चुनना जरूरी है।’ वत्सल ने यहां एक समूह साक्षात्कार में कहा, ‘‘आपको चूजी होने की जरूरत है। आप मिलने वाली हर भूमिका नहीं कर सकते…मैं भी अच्छी ही लगने वाली भूमिकाएं चुनता हूं। इसके लिए कभी-कभी आपको खाली भी बैठना पड़ता है।’’

वत्सल ने अपनी फिल्मों की सफलता के बारे में कहा, ‘‘उद्देश्य जबर्दस्त था। हर किसी को लगा कि हमारे पास एक बढ़िया पटकथा है, लेकिन मुझे लगता है कि हम इसे रुपहले पर्दे पर उस तरह से ही रूपांतरित कर पाए, जिस तरह करना चाहिए था इसी कारण फिल्म और मेरे काम को पंसद किया गया।’ टीवी शो ‘जस्ट मोहब्बत’ से अपना करियर शुरू करने वाले वत्सल ने ,बाद में फिल्मों में दस्तक दी। इन दिनों स्टार टीवी शो ‘ एक हसीना थी’ में अभिनीत किरदार शौर्य गोयनका को लेकर सुर्खियों में है। उनका था कि ‘शो में निभाया गया किरदार उनके करियर के सबसे कठिन किरदारों में से एक है।’ आगे बताया कि शो में मेरा किरदार किस तरह आकार लेगा हमने इस पर कई बार चर्चा की, लेकिन निर्देशक हर बार मेरी बात को टाल जाता था,लेकिन रोल को करते हुए लगता था कि कहीं न कहीं कुछ छूट रहा है,और मैं किरदार को मजबूत करने के लिर पूरी मेहनत कर रहा हॅू। जब मैंने शो को साईन किया तो मुझे इस शो की कहानी और रोमांच भरे ड्रामे की वजह से यकीन था कि यह शो अच्छा प्रदर्शन करेगा। शो में मैंने शौर्य गोयनका की भूमिका निभायी है।

शो आपका क्या किरदार है ? प्रश्न के उतर में उनका जवाब था ‘शौर्य घमंडी प्रवृति का युवा है ,जो बिगड़ा हुआ है। अपने आगे वह किसी कि नही सुनता है, इस रोल में आपको वत्सल एक एक अलग ही रंग में दिखायी देगा। वह किसी हीरो की तरह नहीं है। मैं अब तक जितने किरदार करता रहा हूं, यह उनसे पूरी तरह अलग है इसलिये मैंने इस भूमिका के लिये तुरंत हां कर दिया। ’ ‘एक हसीना थी’ किरदार दुर्गा पर केन्द्रित है। यह बदले की कहानी नहीं है बल्कि यह अपने साथ किये गये गलत के लिये न्याय लेने की कहानी है। दुर्गा की भूमिका में संजीदा शेख, और शो ऐसे परिदृश्य को दिखाता है जहां कोई एक कदम आगे बढ़ कर जिंदगी के स्याह हिस्से को उजागर करता है। हालांकि दुर्गा की लड़ाई आसान नहीं है क्योंकि उसके मुकाबले में हैं खतरनाक, अमीर और प्रभावशाली गोयनका परिवार जिनकी इस शहर में सिक्का चलता है और जो पैसों से कुछ भी खरीदने का दम भरते हैं