भारतवर्ष की आत्मा उसकी संस्कृति और परंपरा में बसती है। इन्हीं परंपराओं को जीवंत करने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुँचाने का कार्य देशभर में होने वाली रामलीलाएँ करती हैं। दिल्ली में हर वर्ष आयोजित होने वाली द्वारका श्री रामलीला एवं भव्य मेला इस दिशा में सबसे बड़ा और लोकप्रिय आयोजन माना जाता है। इस वर्ष जब इस भव्य आयोजन की 14वीं रामलीला का मंचन हो रहा है, तो द्वारका की धरती पुनः जय श्रीराम के नारों से गूंज उठी है।
यह आयोजन द्वारका श्री रामलीला सोसायटी (पंजी.) द्वारा मुख्य संरक्षक एवं चेयरमैन श्री आकाश राजेश गहलोत और उनकी समर्पित टीम के नेतृत्व में संपन्न हो रहा है। इस बार की लीला में श्रद्धा, भक्ति और संस्कृति का ऐसा अद्भुत संगम देखने को मिला, जिसने दर्शकों को भावविभोर कर दिया।
रामलीला मंचन के दौरान विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित हुए जॉइंट सीपी श्री जतिन नरवाल द्वारका ज़िला dcp श्री अंकित सिंह, ने मंच से श्रद्धालुओं को संबोधित किया। उन्होंने इस आयोजन को केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं बल्कि दिल्ली की पहचान बताया।
चौथी रात्रि का मंचन – सीता स्वयंवर से राम-बारात तक 25 सितम्बर 2025, गुरुवार को रामलीला की चौथी संध्या का मंचन हुआ। इस दिन की विशेष प्रस्तुतियाँ थीं—सीता स्वयंवर, राम बारात, सीता का अयोध्या में स्वागत जनकपुर के दरबार में धनुष भंग का दृश्य जब मंच पर प्रस्तुत किया गया, तो पूरा पंडाल “जय श्रीराम” और “जय सिया-राम” के नारों से गूंज उठा। माता सीता ने स्वयंवर में भगवान राम को पति रूप में स्वीकार किया, और राम-सीता के पवित्र मिलन पर श्रद्धालुओं की आँखें श्रद्धा और भावनाओं से भर आईं।
इसके बाद राम बारात का भव्य दृश्य हुआ। मंच पर सजी झाँकियों और नृत्य-नाट्य के साथ बारात का दृश्य ऐसा था मानो अयोध्या से सचमुच बारात जनकपुर पहुँच गई हो। अंत में सीता के अयोध्या आगमन का दृश्य प्रस्तुत हुआ, जिसने पूरे वातावरण को भक्ति और आनंद से भर दिया।
श्रद्धालुओं का महासागर
इस मंचन को देखने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु उपस्थित हुए। दूर-दराज़ से आए रामभक्तों की भारी भीड़ ने आयोजन स्थल को आध्यात्मिक मेले का रूप दे दिया। बच्चे, युवा, महिलाएँ और बुज़ुर्ग—सभी रामकथा के अमृत रस में डूबे रहे।
मंचन के दौरान हर दृश्य पर तालियों की गड़गड़ाहट और जयकारों से पूरा वातावरण गुंजायमान होता रहा। लोगों ने कहा कि “यह केवल लीला नहीं, बल्कि प्रभु श्रीराम के दर्शन का दिव्य अवसर है।”
नेताओं और विशिष्ट अतिथियों की गरिमामयी उपस्थिति
इस भव्य आयोजन की विशेषता यह रही कि दिल्ली की माननीय मुख्यमंत्री, केन्द्रीय एवं राज्य मंत्रीगण, और विभिन्न राजनीतिक दलों के कई वरिष्ठ नेता भी मंचन स्थल पर उपस्थित रहे। पूर्व सांसद श्री रमेश बिधुरी जी भी इस आयोजन में विशेष अतिथि के रूप में पहुंचे और उन्होंने इस सांस्कृतिक धरोहर को आगे बढ़ाने की पहल की सराहना की। उनकी गरिमामयी उपस्थिति ने न केवल श्रद्धालुओं का उत्साह बढ़ाया, बल्कि सुरक्षा और अनुशासन की दृष्टि से भी इस आयोजन को और भव्य एवं व्यवस्थित बनाया। उनकी उपस्थिति ने यह भी स्पष्ट किया कि द्वारका श्री रामलीला केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि समाज, प्रशासन और राजनीति के बीच सांस्कृतिक पुल का कार्य भी करती है।
संस्कृति और परंपरा का केंद्र
द्वारका श्री रामलीला ने यह सिद्ध कर दिया है कि परंपराएँ केवल किताबों या इतिहास तक सीमित नहीं होतीं, बल्कि जब उन्हें जीवंत रूप में मंच पर प्रस्तुत किया जाए तो वे समाज को संस्कार और संस्कृति देने का माध्यम बन जाती हैं। भव्य पंडाल, सजीव झाँकियाँ, आकर्षक वेशभूषा और तकनीकी संसाधनों का सुंदर मेल इस आयोजन को विशिष्ट बनाता है। साथ ही, मेले में लगे झूले, हस्तशिल्प, धार्मिक पुस्तकें और विविध व्यंजन भी हर वर्ग के लोगों को आकर्षित करते हैं।
स्व. राजेश गहलोत की विरासत – आकाश राजेश गहलोत का नेतृत्व
स्वर्गीय राजेश गहलोत जी ने अपने जीवनकाल में इस आयोजन को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाया। उनकी दूरदृष्टि और निष्ठा ने इस रामलीला को देश के सबसे बड़े आयोजनों में शामिल कर दिया। आज उनके पुत्र और उत्तराधिकारी श्री आकाश राजेश गहलोत उसी समर्पण और दृढ़ संकल्प के साथ इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं। उनके नेतृत्व में यह 14वीं रामलीला न केवल सफल हो रही है, बल्कि निरंतर नई ऊँचाइयाँ छू रही है।
द्वारका श्री रामलीला 2025 केवल एक धार्मिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह भारत की आत्मा, उसकी संस्कृति, लोक परंपरा और भक्ति का जीवंत प्रतीक है। यह आयोजन श्रद्धालुओं को यह सिखाता है कि श्रीराम केवल एक देवता नहीं, बल्कि जीवन जीने की कला और मर्यादा पुरुषोत्तम का आदर्श हैं। आज जब हजारों की संख्या में लोग इस रामलीला का हिस्सा बनते हैं, तो यह स्पष्ट हो जाता है कि यह आयोजन केवल दिल्ली ही नहीं, बल्कि पूरे देश की सबसे लोकप्रिय और जीवंत रामलीलाओं में से एक है।







