विश्व पर्यटन दिवस 27 सितंबर पर आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक व राष्ट्रीय संयोजक उदय मन्ना द्वारा 655वें राष्ट्रीय कार्यक्रम में नागरिक उड्डयन, विदेश मंत्रालय और पर्यटन क्षेत्र के वरिष्ठ पूर्व अधिकारियों तथा तकनीकी विशेषज्ञों ने पर्यटन के नए डिजिटल परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा की।
कार्यक्रम के मानद को-होस्ट व मुख्य वक्ता और भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद के पूर्व निदेशक व राजनयिक सुनील कुमार सिंह ने कहा कि यूपीआई, स्मार्ट सेंसर और सोशल मीडिया प्रचार ने भारत में पर्यटन को नया विस्तार दिया है। उन्होंने अपने गुयाना और मॉरीशस के अनुभवों का उल्लेख करते हुए बताया कि भारतीय प्रवासियों और विदेशी नागरिकों में भारतीय सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्रों के प्रति गहरा आकर्षण है।
मुख्य अतिथि स्टिक ट्रैवल्स ग्रुप ऑफ कंपनीज के संस्थापक एवं चेयरमैन डॉ. सुभाष गोयल ने मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के कई लाभ हैं, लेकिन इस पर पूरी तरह निर्भर रहना जोखिम भरा हो सकता है। आज फर्जी वेबसाइटों, टिकटों में धोखाधड़ी और वॉइस क्लोनिंग के जरिए करोड़ों की ठगी हो रही है।
डॉ. गोयल ने कहा कि मशीनें सूचनाएं दे सकती हैं, लेकिन वे उस आत्मीय मुस्कान और अतिथि देवो भव: की मानवीय भावना की जगह नहीं ले सकतीं जो भारतीय पर्यटन की मूल पहचान है।
विशिष्ट अतिथि भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के पूर्व महाप्रबंधक और एयर ट्रैवलर्स एसोसिएशन के महासचिव जी. एस. बावा ने कहा कि ई-वीजा, चिप वाले पासपोर्ट, डीजी यात्रा और रियल टाइम बहुभाषी अनुवाद से अंतरराष्ट्रीय व घरेलू आवागमन बेहद सहज हो गया है। इसके अलावा माता वैष्णो देवी जैसे संवेदनशील धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों पर वास्तविक समय में भीड़ नियंत्रण और डायनेमिक टिकटिंग के जरिए हादसों को रोका जा सकता है।
विशिष्ट अतिथि कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में वरिष्ठ आईटी सलाहकार और पूर्व सरकारी आईटी अधिकारी निखिलेश मिश्रा ने बताया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता किस तरह सामूहिक पैकेज पर्यटन को व्यक्तिगत प्राथमिकताओं में बदल रही है। कोई भी पर्यटक अपने बजट, अवधि, स्थानीय खानपान, इतिहास या प्राकृतिक रुचि के आधार पर कुछ ही पलों में अनुकूलित योजना प्राप्त कर सकता है।
मिश्रा के अनुसार, ऐतिहासिक स्मारकों पर एआई आधारित डिजिटल टूर गाइड विभिन्न भाषाओं में बच्चों और बड़ों को उनकी समझ के अनुसार इतिहास समझा सकते हैं। इससे देश के छोटे शहरों, ग्रामीण इलाकों और स्थानीय हस्तशिल्प केंद्रों को वैश्विक मानचित्र पर लाने में मदद मिलेगी, जिससे वहां रोजगार के नए अवसर बनेंगे। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया कि तकनीक सिर्फ एक माध्यम है और पर्यटन का वास्तविक स्वरूप इसे उपयोग करने वालों के दृष्टिकोण पर निर्भर करेगा।
अतिथि वक्ता पर्यटन मंत्रालय के पूर्व सहायक निदेशक मृत्युंजय मिश्रा ने जमीनी बुनियादी ढांचे के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि आधुनिक डिजिटल मीडिया तभी प्रभावी होगा जब भौतिक सुविधाएं, स्वच्छता और सुरक्षा चाक-चौबंद हों। पर्यटन का विकास केवल सरकार का नहीं, बल्कि समाज के हर वर्ग की सामूहिक जिम्मेदारी है।
आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक उदय मन्ना ने परिचर्चा का संचालन करते हुए कहा कि इस वैचारिक मंथन का डिजिटल और प्रिंट प्रलेखन किया जा रहा है, जो आगामी जनवरी 2027 में आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस व प्रवासी भारतीय दिवस अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक पखवाड़े के मुख्य कार्यक्रम में आठवीं पुस्तक G-8 का लोकार्पण किया जाएगा।




