राधे राधे राधे !!!

मधुरिता 

राधे शब्द अपने आप में आनंद प्रदान करने वाला है अर्थात जिसने राग व द्वेष को दूर कर लिया वही इस रस की अनुभूति कर सकता है ।राधे शब्द अपने आप में आनंद प्रदान करने वाला है अर्थात जिसने राग व द्वेष को दूर कर लिया वही इस रस की अनुभूति कर सकता है ।राधे शब्द अपने आप में आनंद प्रदान करने वाला है अर्थात जिसने राग व द्वेष को दूर कर लिया वही इस रस की अनुभूति कर सकता है ।

राधे तू बड़ी भागनी कौन तपस्या किन्हीं तीनों लोक तारण तरन सो तेरे आधीन , सो तेरे आधीन ।

राधे राधे राधे तू तो श्याम की बनिओ राधे , श्याम की बनिओ ……… ओ राधे , ओ राधे ………………..हमें भी तो कोई राह दिखा दे दिखा दे ओ राधे , ओ राधे ।

हमने सुना है राधे तेरी मर्ज़ी के बिना तेरी मर्ज़ी के बिना कृपा नहीं करते , कृपा नहीं करते वो तो कृपा नहीं करते …..तेरे मोहना से भी हमारी भी गुहार लगा दे , गुहार लगा दे ………. ओ राधे , हमारी प्यारी राधे, हमारी दुलारी राधे, राधे , राधे ।

तू तो है गोरी राधे , गोरी गोरी राधे , गोरी गोरी राधे …….श्याम तो बलिहारी जाए तुझ पर ही राधे ……….श्याम तो बलि , बलि जाए तुझ पर ही राधे , राधे , राधे ।

सात सुरों का ज्ञान नहीं हमपे सात सुरों का ज्ञान नहीं हमपे कैसे बुलाऊं उनको भक्ति नहीं है ……… रिझाऊं उनको गुण भी तो नही है , गुण भी तो नहीं है ………..राधे , राधे ,राधे ।

हम पर भी दया कर दो मेरी राधे , हम पर भी कृपा करो ओ मेरी प्यारी प्यारी राधे , प्यारी प्यारी राधे , प्यारी राधे ……….रस बरसाने वाली , आनंद दिलाने वाली राधे , ओ राधे , ओ राधे , ओ राधे ……राधे , राधे , राधे ।