पान सिंह तोमर में दमदार अभिनय से सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले 46 वर्षीय अभिनेता इरफान खान की फिल्म ‘लाईफ ऑफ पाई’ ने सर्वश्रेष्ठ निर्देशक समेत कई ऑस्कर पुरस्कार जीते। इरफान ने कहा कि वह खुश हैं कि प्रतिभा को पहचाना गया और पान सिंह तोमर में मेरे अभिनय को नजर अंदाज नहीं किया गया।
जयपुर से मुंबई तक का अभिनय सफर तय करने, इरफान खान ने बनेगी अपनी बात, चन्द्रकांता, स्टार बेस्ट सेलर, और डर सहित अनेक धारावाहिकों के बाद सलाम बोम्बे से….फिल्म कबूल,बिल्लू बारबर, स्लगडाग, ‘लाईफ ऑफ पाई’ निर्माता कृष्ण चैधरी की फिल्म राईट या राग की सफलता में इरफान खान का कितना योगदान था, यह बहस छोड दें और सिर्फ सोचें कि यह अभिनेता अपने अभिनय के प्रति कितना समर्पित है? न उसे पैसे की भूख है और न प्रचार की। इसके बावजूद इरफान राष्ट्रीय सिनेमा की सीमाओं को पार कर आज अंतर्राष्ट्रीय सिनेमा की सरहदों तक पहुँच गया है। हाल में उनके करियर के उतार चड़ाबों से जुडें ऐसे ही तमाम सवालों के साथ प्रेम बाबू षर्मा की मुलाकात इस लाजवाब अभिनेता के साथ हुई तो बातों का सिलसिला शुरू हो गया।
आपकी गिनती लीक से हटकर काम करने वाले कलाकारों में होती है ?
हाल मे मैने पान सिंह तोमर, साहेब बीवी और गैंगस्टर रिटर्न्स जैसी फिल्मों में काम किया है। और चरित्र किरदार निभाने से कोई परहेज नहीं है लेकिन बॉलीवुड में ऐसे किरदारों को खास महत्व नहीं दिया जाता।
फिल्मों की सफलता और लोकप्रियता हासिल करने के बावजूद आपकी फिल्में नजर नहीं आई, क्यों?
क्योंकि में सिर्फ खास भूमिकाएं ही करता हूं। मकबूल के बाद मुझे इंडस्ट्री के बड़े-बड़े बैनर्स की फिल्मों के आफर तो मिलते रहे लेकिन ऐसी कोई फिल्म आफर नहीं हुई जो मकबूल जैसी मजबूत भूमिका वाली होती। आखिर में रोग, चाकलेट,चेहरा, ..में कुछ करने को मिला।
आपके साथ काम कर चुके कलाकारों का कहना है कि आप अपने प्रभावशाली अभिनय से उनके अंदर असुरक्षित की भावना और डर पैदा कर देते हैं?
मै यह तो नहीं बता सकता कि साथी कलाकार मेरे बारे में क्या राय रखते हैं। मैं सिर्फ अपने बारे में बता सकता हूं कि मैं सिर्फ वहीं भूमिका और वहीं पात्र निभाना पसंद करता हूँ जो मुझे पंसद है। अपने पात्र में डूबकर काम करता हूं।
लेकिन कम फिल्में करने का आपको नुकसान नही होता ?
मैं किसी प्रकार के समझौते करने की अपेक्षा अच्छा करना ही मेरा मकसद है । मैं अभिनय के लिए जीता हूँ । दूसरी बात मैं किसी एक पात्र का टाईप्ड भी नही होना चाहता। आपने क्रेजी 4 सहित कई फिल्मों में हास्य रूप में देखा होगा। जबकि दिलकबडडी जैसी अनेक फिल्मों में एक अलग किरदार में था। हाँ आपकी बात से सहमत हूँ कि अच्छे काम के चक्कर में मेरे हाथ कई फ़िल्में निकल जाती है।
चर्चा थी आपके निर्माता कृष्ण चैधरी की फिल्म ‘राइट या रांग’ के दौरान कुछ मतभेद हो गये ?
ऐसा तो कुछ नही हुआ था। हाँ मैं अपने किरदार को जिन्दा रखने के लिए अपने तरीके से काम करता हूँ । बस इतनी सी बात थी और निर्माता कृष्ण चैधरी भी मेरे विचार से बाद में सहमत हो गये थे। मजेदार बात यह रही कि फिल्म रीलिज के बाद मेरे किरदार को भी लोगों ने पंसद किया और फिल्म हिट रही।
निर्माता कृष्ण चैधरी के साथ काम करने का कैसा अनुभव कैसा रहा ?
बहुत ही अच्छा रहा । वह टेंलेटेड और कमिटेड है। उनके साथ काम करना काफी सम्मान की बात है।वैसे भी कई फिल्मों के अनुभव से उनमें अच्छे बुरे को पहचाने का एक्सपीरियस है।
‘स्लमडॉग मिलेनियर’ और ‘लाईफ ऑफ पाई’ के लिए पांच वर्ष में दो बार ऑस्कर के रेड कारपेट पर चल चुके अभिनेता इरफान खान की सोच क्या है?
मेरा मानना है कि भारतीय अभिनेताओं के लिए हॉलीवुड में काम करने का यह सुनहरा दौर है क्योंकि इस समय हॉलीवुड में भारत फैशन में है। हॉलीवुड वाले जानते हैं कि इसे विस्तार कैसे देना है और वे ऐसा कई वर्षों से कर
रहे हैं। स्पेन फैशन में था तो उन्होंने स्पेन के अभिनेता लिए। इसके बाद चीन का नंबर आया। वे विभिन्न संभावनाएं देखने की कोशिश कर रहे हैं। वे सीमाओं से परे जाना चाहते हैं और दर्शकों को विविधता देना चाहते हैं।