बढ़ती जीवनशैली जनित बीमारियों, भूजल संकट और पर्यावरण क्षरण के समाधान के लिए कृषि वैज्ञानिकों, आहार विशेषज्ञों और समाजसेवियों ने वनस्पति आधारित भोजन, वीगन जीवनशैली तथा पारंपरिक श्रीअन्न (मोटे अनाज) को दैनिक आहार में शामिल करने का आह्वान किया है। आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने संयोजन व संचालन करते हुए कहा कि राष्ट्रीय पोषण सप्ताह के समापन पर आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के 645वें वेबिनार में आयोजित किया गया, जिसे इंडियन वीगन्स- वेजिटेरियन्स सोसाइटी, लंदन के सहयोग से किया गया था।
सभा के अंत में आरजेएस परिवार के सदस्य प्रांजल श्रीवास्तव की माताजी श्रीमती मंजुला श्रीवास्तव के 5 सितंबर को हुए निधन पर दो मिनट का मौन रखकर शोक व्यक्त किया गया।
इंडियन वेजिटेरियन्स व वीगन्स सोसाइटी, लंदन के संस्थापक और आरजेएस पाॅजिटिव ब्रांच, लंदन के मानद प्रभारी कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नितिन मेहता ने औद्योगिक पशुपालन और व्यावसायिक डेरी उद्योग में बरती जाने वाली क्रूरता की ओर ध्यान आकर्षित किया। उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर दूध उत्पादन के लिए गायों को कृत्रिम गर्भाधान, बछड़ों को मां से अलग करने, नर बछड़ों के कत्ल और अत्यधिक दोहन के कारण आर्थराइटिस जैसी व्याधियों से गुजरना पड़ता है।
वैश्विक पर्यावरणीय संकट का उल्लेख करते हुए मेहता ने कहा कि दुनिया भर में लगभग 8 अरब मनुष्यों के भोजन के लिए प्रतिवर्ष 120 अरब पशुओं का संहार किया जाता है और 32 अरब से अधिक मुर्गियां यातनापूर्ण पोल्ट्री फार्मों में रखी जाती हैं। इन मवेशियों को खिलाने के लिए मक्के जैसे अनाजों को मोड़े जाने से विकासशील देशों में खाद्य असुरक्षा बढ़ती है और ताजे पानी के स्रोत समाप्त हो रहे हैं। ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के अध्ययनों का हवाला देते हुए उन्होंने कहा कि शाकाहारी व्यक्तियों में हृदय संबंधी रोगों का खतरा काफी कम पाया गया है। उन्होंने भारतीय खानपान में पनीर के अत्यधिक प्रचलन के प्रति आगाह करते हुए कहा कि यह पाचन के लिए अत्यंत भारी है और वजन व अन्य व्याधियां बढ़ाता है। उन्होंने शिक्षण संस्थानों में शाकाहार के संकल्प अभियान चलाने पर बल दिया।
कार्यक्रम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)-आईएआरआई, नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. श्रवण सिंह,पंजाब के प्राकृतिक कृषक तथा खेती विरासत मिशन के मिलेट अभियान के निदेशक रसविंदर सिंह ग्रेवाल और राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग की सलाहकार सदस्य डॉ. इंदु जैन ने भी कार्यक्रम को संबोधित किया।
भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर)-आईएआरआई, नई दिल्ली के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. श्रवण सिंह ने वीगन और शाकाहारी आहार के वैज्ञानिक पहलुओं का विश्लेषण किया। उन्होंने बताया कि वनस्पति आधारित खाद्य पदार्थों में लाइकोपीन, डायटरी फाइबर और एंटीऑक्सीडेंट जैसे द्वितीयक मेटाबोलाइट्स प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। ये तत्व शरीर में उत्पन्न होने वाले हानिकारक फ्री रेडिकल्स को निष्क्रिय करते हैं, जिससे हृदय रोग, टाइप-2 मधुमेह, मोटापा और कैंसर जैसी गैर-संचारी बीमारियों का जोखिम काफी कम हो जाता है।
पंजाब के प्राकृतिक कृषक तथा खेती विरासत मिशन के मिलेट अभियान के निदेशक रसविंदर सिंह ग्रेवाल ने गिरते भूजल स्तर और मिट्टी की उर्वरता के संकट से निपटने के लिए श्रीअन्न की खेती और उपयोग को अनिवार्य बताया। उन्होंने तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि एक किलोग्राम श्रीअन्न उगाने में केवल 250 से 500 लीटर पानी खर्च होता है, जबकि पंजाब में एक किलोग्राम धान के लिए 8,000 लीटर से अधिक और गेहूं के लिए करीब 2,000 लीटर पानी की खपत होती है। अंतरराष्ट्रीय अध्ययनों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि एक किलोग्राम मांस के उत्पादन में 5,000 से 15,000 लीटर पानी व्यय होता है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के मानकों का उल्लेख करते हुए डॉ. सिंह ने स्पष्ट किया कि शरीर की सूक्ष्म पोषक आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए प्रत्येक व्यक्ति को प्रतिदिन कम से कम 400 ग्राम सब्जियों का उपभोग करना चाहिए। गर्म और आर्द्र जलवायु में सब्जियों पर कीटनाशकों के उपयोग से जुड़ी चिंताओं पर उन्होंने उपभोक्ताओं को मौसमी सब्जियां चुनने, किचन व रूफटॉप गार्डनिंग अपनाने और पकाने से पूर्व सब्जियों को 5 से 10 मिनट तक हल्के गर्म पानी में रखने अथवा ब्लांच करने की सलाह दी। आनुवंशिक रूप से संवर्धित (जीएम) फसलों के संदर्भ में उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत सरकार ने अब तक केवल जीएम कपास के व्यावसायिक उपयोग की अनुमति दी है, जबकि किसी भी जीएम खाद्य फसल को खाने के लिए मंजूरी नहीं दी गई है।
राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग, नई दिल्ली की सलाहकार सदस्य डॉ. इंदु जैन ने शाकाहार को जैन दर्शन के मूल सिद्धांत अहिंसा और ‘परस्परोपग्रहो जीवानाम्’ से जोड़ा। उन्होंने कहा कि मनुष्य का दायित्व केवल स्वजाति तक सीमित नहीं है, बल्कि सूक्ष्म जीवों और समस्त प्रकृति की रक्षा करना भी उसका कर्तव्य है। उन्होंने रात्रि भोजन निषेध, दैनिक प्रतिक्रमण और क्षमावाणी जैसे अनुशासनों का उल्लेख करते हुए कहा कि खानपान और विचारों की शुद्धि ही व्यक्ति के नैतिक और आत्मिक विकास का आधार है।
ग्रेवाल ने बताया कि हरित क्रांति के बाद धान की सघन खेती के कारण पंजाब के 200 गांवों के नमूनों में मिट्टी का जैविक कार्बन घटकर 0.2 से 0.3 प्रतिशत पर आ गया है, जिसे कम से कम 1 प्रतिशत होना चाहिए। सी-4 श्रेणी की घास होने के कारण श्रीअन्न विभिन्न तापमानों में बिना किसी रासायनिक खाद और कीटनाशक के आसानी से पैदा होता है। उन्होंने कहा कि बाजरा जैसे मोटे अनाजों को आठ से दस घंटे भिगोकर व भाप में पकाकर खाने से उनके एंटी-न्यूट्रिशनल तत्व समाप्त हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त खमीरयुक्त (फर्मेंटेड) श्रीअन्न आंतों के माइक्रोबायोम को पुनर्स्थापित कर हार्मोन संतुलन बनाए रखता है, जिससे मधुमेह के रोगियों में इंसुलिन की निर्भरता कम करने में सफलता मिली है।
आरजेएस पॉजिटिव मीडिया के संस्थापक और राष्ट्रीय संयोजक उदय कुमार मन्ना ने घोषणा की कि 1 अगस्त के बाद आयोजित कार्यक्रमों के बौद्धिक विमर्श को संकलित कर संस्था की आठवीं पुस्तक के रूप में प्रकाशित किया जाएगा, जिसका लोकार्पण 10 से 24 जनवरी के मध्य आयोजित होने वाले अंतरराष्ट्रीय गणतंत्र दिवस पखवाड़े में होगा। उन्होंने भारतीय रेड क्रॉस सोसाइटी के साथ संयुक्त रूप से मीडिया संगोष्ठी और रक्तदान शिविर आयोजित करने की भी जानकारी दी।


