राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर “विज्ञान में करियर” पर आरजेएस पीबीएस ने कार्यक्रम आयोजित किया

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 28 फरवरी के उपलक्ष्य में आरजेएस पीबीएच -आरजेएस पाॅजिटिव मीडिया के संस्थापक और राष्ट्रीय समन्वयक उदय कुमार मन्ना के नेतृत्व में आयोजित 525वें संस्करण हाई-टेक स्वायत्त कृषि से लेकर बहुभाषी कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) में करियर की संभावनाएं।

छत से लैब तक: व्यावहारिक आत्मनिर्भरता

25 फरवरी 2026 को आयोजित वेबिनार ने वैज्ञानिक अनुप्रयोग की व्यक्तिगत सफलता की कहानियों को भी प्रदर्शित किया। वरिष्ठ सामाजिक कार्यकर्ता और सह-आयोजक टीफा26 उदय शंकर सिंह कुशवाहा ने मुजफ्फरपुर में एक पारंपरिक कृषि पृष्ठभूमि से दिल्ली में सिविल इंजीनियरिंग में एक सफल करियर तक की अपनी यात्रा साझा की। कार्यक्रम में आईएआरआई ,पूसा नई दिल्ली की प्रधान वैज्ञानिक डॉ ऋतु जैन,भारत सरकार के पूर्व आईटी अधिकारी और साइबर विशेषज्ञ निखिलेश मिश्रा,हिंदुस्तान टाइम्स के राजनीतिक संपादक मदन जैड़ा और दिलिप कुमार झा,प्रोग्राम एक्जीक्यूटिव ,साइंस सेल, आकाशवाणी, दिल्ली ने संकेत दिया कि क्षेत्रीय भाषा निर्देश,हाईटेक कृषि और नैतिक एआई का अभिसरण यह सुनिश्चित करेगा कि विज्ञान में करियर सामाजिक और आर्थिक गतिशीलता का सबसे शक्तिशाली इंजन बनेगा

कृषि 2.0: हाई-टेक किसान का उदय

वेबिनार का एक मुख्य फोकस कृषि की क्रांतिकारी री-ब्रांडिंग थी, जिसका नेतृत्व भारतीय कृषि अनुसंधान संस्थान (आईएआरआई) पूसा की प्रधान वैज्ञानिक डॉ ऋतु जैन ने किया। उन्होंने कृषि को हाई-टेक उद्यमिता के अगले मोर्चे के रूप में प्रस्तुत किया, जिसमें क्रिस्पर-कैस (CRISPR-Cas) जीन एडिटिंग, बायोइन्फॉर्मेटिक्स और ड्रोन तकनीक द्वारा परिभाषित एक श्वेत-कॉलर क्षेत्र का वर्णन किया गया।डॉ ऋतु जैन ने आरजेएस पीबीएस परिवार को पूसा कृषि विज्ञान मेले(25-27 फरवरी )के लिए आमंत्रित किया, जहां आईएआरआई हर्बिसाइड-प्रतिरोधी फसलों और सेंसर-आधारित सिंचाई प्रणालियों जैसे नवाचारों का प्रदर्शन कर रहा है। उन्होंने कृषि विज्ञान के भीतर एक महत्वपूर्ण सामाजिक बदलाव का भी उल्लेख किया: विज्ञान का नारीकरण। कई आधुनिक कृषि विज्ञान कक्षाओं में अब महिला छात्रों की संख्या पुरुषों से अधिक है, जो उन वर्गों में 35 महिलाओं और 15 पुरुषों के अनुपात तक पहुंच गई है जो कभी पुरुष-प्रधान थे। इस बदलाव से खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण प्रबंधन में नए दृष्टिकोण आने की उम्मीद है।

आर्थिक अनिवार्यता: 70 प्रतिशत का बदलाव

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता हिंदुस्तान टाइम्स के राजनीतिक संपादक मदन जैड़ा ने मुख्य भाषण दिया, जिसमें भारत में विज्ञान शिक्षा का एक गंभीर लेकिन आशावादी सांख्यिकीय विश्लेषण प्रस्तुत किया गया। 

मदन जैड़ा ने कहा कि दक्षिणी राज्यों में विज्ञान का नामांकन मजबूत है, जिसमें आंध्र प्रदेश 75 प्रतिशत और तेलंगाना 64 प्रतिशत पर है। इसके विपरीत, उत्तरी औद्योगिक और कृषि क्षेत्र पीछे छूट रहे हैं, जहां पंजाब में केवल 13 प्रतिशत और हरियाणा में 15 प्रतिशत विज्ञान नामांकन दर्ज किया गया है। जैरा ने तर्क दिया कि यह प्रतिभा की कमी के कारण नहीं बल्कि पहुंच की कमी के कारण है। उन्होंने तकनीकी विषयों में क्षेत्रीय भाषा के निर्देश की ओर आमूलचूल बदलाव का आह्वान किया। 

एआई के खतरे और ब्रेन ड्रेन की बहस का खंडन,

 कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए भारत सरकार के पूर्व आईटी अधिकारी और साइबर विशेषज्ञ निखिलेश मिश्रा ने वर्तमान एआई हिस्टीरिया की तुलना 1980 के दशक से की, जब कंप्यूटर की शुरुआत ने देशव्यापी बेरोजगारी का डर पैदा कर दिया था। उन्होंने जोर देकर कहा कि तकनीक नौकरियों को खत्म नहीं करती है; यह उनकी प्रकृति को बदल देती है।

निखिलेश मिश्रा के अनुसार, एआई शिक्षा के लिए एक बल गुणक (force multiplier) के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने तारा ऐप और एनसीईआरटी मैजिक बॉक्स जैसे बहुभाषी एआई उपकरणों के उदय पर प्रकाश डाला, जो छात्रों को क्षेत्रीय भाषाओं में जटिल वैज्ञानिक प्रश्न पूछने और सरल, सटीक उत्तर प्राप्त करने की अनुमति देते हैं। एआई उपकरणों का उपयोग करके अपनी मातृभाषा में शोध करने से ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र अब उसी स्तर की जानकारी तक पहुंच सकते हैं जो पहले केवल शहरी छात्रों के लिए उपलब्ध थी।

विज्ञान के प्रसार में आकाशवाणी की भूमिका 

धन्यवाद ज्ञापित करते हुए दिलिप कुमार झा,प्रोग्राम एक्जीक्यूटिव ,साइंस सेल, आकाशवाणी, दिल्ली ने कहा कि 

वैज्ञानिक सोच और विज्ञान की अवधारणाओं की समझ विकसित करने के लिए, AIR के कार्यक्रम अत्यंत प्रासंगिक हैं। यह उन लोगों तक भी पहुँचता है जो इससे वंचित हैं। AIR की घरेलू सेवा में देश भर में स्थित 470 प्रसारण केंद्र शामिल हैं, जो देश के लगभग 92% क्षेत्रफल और कुल जनसंख्या के 99.19% हिस्से को कवर करते हैं। स्थलीय स्तर पर, AIR 23 भाषाओं और 179 बोलियों में कार्यक्रम प्रसारित करता है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में ही आकाशवाणी दिल्ली का विज्ञान एकांश सप्ताह में चार विज्ञान कार्यक्रमों का निर्माण और प्रसारण विभिन्न चैनलों पर करता है।

विज्ञान पत्रिका और धरती आकाश हिंदी में और science magazine और science talk अंग्रेजी में।

इसके अलावा पंजाबी, उर्दू, परिवार कल्याण, कृषि और गृह , fm रैंबो और fm गोल्ड अनुभाग भी विज्ञान विषयों, स्वास्थ, कृषि आदि से जुड़े कार्यक्रमों का प्रसारण नियमित रूप से किया करता है।

कार्यक्रम में दयाराम सारोलिया, सरिता कपूर,डीपी सिंह कुशवाहा, पवन ,आरएस कुशवाहा, शुभ्रा सिंह, सोनू कुमार, राकेश मनचंदा, रेखा सारोलिया, सत्यनारायण सिंह कुशवाहा,पवन‌कुमार, आकांक्षा, मयंक राज, आदि शामिल हुए।