प्रेमबाबू शर्मा
राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित निर्माता निर्देशक गुलशन सचदेवा का हाल में ही दूरदर्शन के मुख्य चैनल पर एक नया धारावाहिक बाबुल के देस में का प्रसारण हुआ। क्या कहना है अपने नये धारावाहिक पर। सुनते है उनकी ही जुबानी । गुलशन सचदेवा के कहते है कि ‘मै आम विषयों से हटकर क्रिएटिव काम करने में विश्वास रखता हूँ । जिसमें चुनौतियां हो। बाबुल के देस का विषय आजकल के फैमिली सीरियल्स की तरह इसमें किचन पालिटिक्स नही है। बल्कि धारावाहिक की कहानी मनोरंजन के साथ साथ नैतिकता, सामाजिक चेतना मूल्यों के प्रति सजग करती है। इसके साथ ही धारावाहिक में नारी समास्याओं को भी उठाया गया है।
धारावाहिक की कहानी क्या है ? प्रश्न के उतर में उनका जबाव था कि बाबुल के देस एक परिवारिक कहानी पर आधारित चारू नामक लडकी की पर केन्द्रित है जो कि नारी के अधिकारों को लेकर लडती है और अपने परिवार के प्रति समर्पित है।
दूरदर्शन सहित अलग अलग चैनलों के लिए दर्जनों धारावाहिक और टेलीफिल्मों का निर्माण व निर्देशन कर चुके गुलशन सचदेवा के पास एक लंबा अनुभव है। वह सुर्ख़ियों में आये एक समय में जीटीवी से प्रसारित धारावाहिक ‘आपकी अदालत’ से । अब यह कार्यक्रम इंडिया टीवी पर प्रसारित हो रहा है।
कालांतर में सत्य घटनात्मक जीवन और पारिवारिक पृष्ठभूमि से प्रेरित धारावाहिक रावण,पंचम, जंजीरे, लकीरें, कन्हैया, बूँद बूंद, आसमान कैसे कैसे, लेखू और झूठ बोले कौवा काटे का निर्माण किया। किन्तु एक ही प्रकार के धारावाहिकों के निर्माण के पीछ कोई खास वजह ? प्रश्न के उतर में उनका कहना था कि मैं आम जिंदगी से जुड़े यथार्थवाद विषय ही मेरी पंसद रहे है। इस प्रकार के विषय के माध्यम से आप समाज मे फैली कुरूती जैसे मुददों को उठा सकते है । जैसे हमने कन्हैया और पंचम की कहानी द्वारा अनेक ज्वंलत मुददों को उठाया ।












