गुरु पूर्णिमा के पावन अवसर पर राम जानकी संस्थान पॉजिटिव ब्रॉडकास्टिंग हाउस RJS PBH और दिल्ली मेट्रोपॉलिटन एजुकेशन( DME) नोएडा द्वारा “शिक्षा, तकनीक और मूल्य” विषय पर संगोष्ठी आयोजित की गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि माननीय पूर्व उच्च न्यायालय न्यायाधीश भंवर सिंह,डीजी डीएमई ने गुरु-शिष्य परंपरा पर अपना उद्बोधन दिया।
न्यायाधीश भंवर सिंह के उद्बोधन की 10 प्रमुख बातें:
1. गुरु केवल जानकारी नहीं देता, वह चरित्र बनाता है। आज हमें सूचना नहीं, संस्कार चाहिए।
2. 1969 से अब तक मैंने देखा है कि शिक्षक का सम्मान धीरे-धीरे कम हुआ है। इसका कारण आर्थिक असमानता और अभिभावकों की उदासीनता है।
3. अमीर परिवारों में बच्चों को यह सिखाना बंद हो गया है कि गुरु भगवान के समान होते हैं। शिक्षा के साथ सकारात्मक संस्कार आवश्यक है।
4.जेनेरेशन अल्फा के सामने मोबाइल है, पर मार्गदर्शक नहीं है। इसलिए वह भटक रहा है।
5. छात्र अब ज्ञान के लिए नहीं, केवल नौकरी और पैसे के लिए पढ़ना चाहता है। यह शिक्षा का पतन है।
6. जनसंख्या बढ़ी, कक्षाएं बड़ी हुईं, पर गुरु और शिष्य के बीच का आत्मीय संबंध समाप्त हो गया।
7. द्रोणाचार्य ने एकलव्य से अंगूठा नहीं मांगा था, उन्होंने उसकी तकनीक सुधारी थी। हमें इतिहास को सही संदर्भ में समझना होगा।
8. शिक्षक को भी अपनी मर्यादा में रहना होगा। अधिक मित्र बनने से अधिकार समाप्त हो जाता है।
9. छात्र फिक्स्ड डिपॉजिट की तरह है। जिज्ञासा रूपी ब्याज से ही उसका ज्ञान बढ़ेगा।
10. अनुशासन गंगा की तरह है। सीमा में रहकर ही वह सागर तक पहुंचती है। युवा तकनीक अपनाएं, पर मर्यादा न तोड़ें।
आरजेएस पीबीएच के संस्थापक उदय कुमार मन्ना ने कहा कि AI के युग में मानवीय मार्गदर्शन और अधिक आवश्यक हो गया है। प्रकृति व जीवन के कवि अशोक कुमार मलिक ने गुरु शिष्य परंपरा की प्राचीन कथाओं की नई व्याख्या प्रस्तुत की।
समापन पर आरजेएस पीबीएच की ओर से घोषणा की गई कि 1 से 15 अगस्त तक “भारतीय स्वाधीनता का रंग – सकारात्मक आंदोलन के संग” के अंतर्गत 15 दिन, 15 संकल्प कार्यक्रम चलाया जाएगा।
RJS POSITIVE MEDIA ने देशवासियों से गुरु पूर्णिमा पर संकल्प लेने की अपील की – गुरु का सम्मान करें और सकारात्मक मूल्यों को घर व विदेश में आगे बढ़ाएं।





